हिंसक चरमपंथ के विरुद्ध लड़ाई में अफ़्रीकी देशों को मदद की अपील

8 फ़रवरी 2020

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफ़्रीका में सुरक्षा परिषद समर्थित आतंकवाद-विरोधी अभियानों की अहमियत को समझने की पुकार लगाई है. यूएन प्रमुख ने कहा है कि अफ़्रीकी महाद्वीप पर आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ के बढ़ते ख़तरे से निपटने के लिए इस लड़ाई में पर्याप्त फ़ंडिंग और समर्थन की आवश्यकता है. 

इथियोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में शनिवार को अफ्रीकी संघ की शिखर वार्ता के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए यूएन महासचिव ने अफ़्रीकी संघ और संयुक्त राष्ट्र के बीच साझेदारी को विश्व की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक बताया. 

“यह एक ऐसी साझेदारी है जो अफ़्रीकी जनता की बेचैनियों और आकांक्षाओं के अनुरूप काम करने और सभी के लिए एक बेहतर भविष्य का रास्ता बनाने के लिए संकल्पित है.”

यूएन प्रमुख ने पत्रकारों को बताया कि अफ़्रीका में आतंकवाद को हराने के लिए एक नए गठबंधन को बनाए जाने की आवश्यकता है लेकिन ऐसा पर्याप्त समर्थन और फ़ंडिंग की मदद से ही किया जा सकता है. 

उन्होंने कहा कि सहेल और लेक चाड क्षेत्र में स्थित देश कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. इनमें मुख्यत: जलवायु संकट, आर्थिक बदहाली, चरमपंथ और सामाजिक विलगाव शामिल हैं. 

यूएन प्रमुख के मुताबिक अफ़्रीका में शांति के लिए अफ़्रीकी संघ के सहयोग के साथ यूएन चार्टर के चैप्टर VII के अंतर्गत प्रयासों को अधिकृत किया जाना होगा जिसमें शांति स्थापना, आक्रामक कार्रवाई और शांति भंग होने के जोखिम से निपटने के लिए सुरक्षा परिषद द्वारा बल प्रयोग की अनुमति है. 

“यह कहना होगा कि अफ़्रीका में आतंकवाद महज़ अफ़्रीका के लिए ख़तरा नहीं है, अफ़्रीका में आतंकवाद एक वैश्विक ख़तरा है और इस लड़ाई में अग्रिम मोर्चे पर डटे अफ़्रीकी देशों के साथ असरदार ढंग से एकजुटता का प्रदर्शन सभी का दायित्व बनता है.” 

यूएन प्रमुख ने माना कि लीबिया में हालात रसातल में जा रहे हैं. साथ ही उन्होंने वहां हिंसा भड़काने और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के विरोधी गुट को हथियार मुहैया कराने में कुछ सदस्य देशों की सीधी भूमिका के लिए उनकी आलोचना की है. 

उन्होंने कहा कि लीबिया में एक राजनैतिक समाधान के ज़रिए ही शांति की स्थापना की जा सकती है. इसी को ध्यान में रखते हुए लीबिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNSMIL) “अपने परिसर में अफ़्रीकी संघ के एक प्रतिनिधि की मेज़बानी के लिए तैयार हैं.” 

बंदूकों को शांत करना ज़रूरी 

यूएन प्रमुख ने कहा कि अफ़्रीकी संघ और संयुक्त राष्ट्र के बीच रणनीतिक साझेदारी पहले से कहीं अधिक मज़बूत और गतिशील है. इस वर्ष सम्मेलन के केंद्र में मानवाधिकारों, लैंगिक समानता, जलवायु परिवर्तन के साथ अफ़्रीकी संघ की पहल ‘साइलेंसिंग द गन्स’ भी है. 

इस मुहिम का उद्देश्य युद्धों व घरेलू हिंसक संघर्षों का अंत करना, लिंग आधारित हिंसा व जनसंहार की रोकथाम करना है.

“हमें न्यायसंगत वैश्वीकरण की ज़रूरत है ताकि अफ़्रीका ऐसे भेदभावपूर्ण व्यापार और वित्तीय नियमों, सब्सिडी और अन्य नीतियों व बाज़ार की विकृतियों का शिकार ना हो जिनसे असमानता बढ़ती है और अफ़्रीका के लिए प्रतिस्पर्धा में बने रहना और समृद्धि पाना मुश्किल हो जाता है.”

यूएन प्रमुख ने अफ़्रीका में शांति, समृद्धि और विकास प्रक्रिया की राह में रोड़े अटकाने वाले जलवायु संकट की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया. उन्होंने विशेषतौर पर टिड्डियों के झुंड से उपजी चुनौती का ज़िक्र किया जिससे जिससे इथियोपिया और पूर्वी अफ़्रीका में फ़सलों को नुक़सान पहुंच रहा है और खाद्य सुरक्षा के लिए जोखिम बढ़ गया है. 

खाद्य एवं कृषि संगठन के मुताबिक पेरिस के आकार का टिड्डियों का झुंड एक दिन में फ़्रांस की आधी आबादी के बराबर भोजन नष्ट कर सकता है.”

शांति के वास्तविक संकेत 

महासचिव गुटेरेश ने तमाम चुनौतियों के बावजूद अफ़्रीका में उम्मीदों की बयार का भी ज़िक्र किया और मध्य अफ़्रीका गणराज्य में ऐतिहासिक शांति समझौते की पहली वर्षगांठ, और पिछले वर्ष कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य, मेडागास्कर और माली में संपन्न चुनावों की याद दिलाई. 

30 वर्षों तक सूडान की बागडोर संभालने वाले पूर्व राष्ट्रपति ओमर अल बशीर के एक साल पहले सत्ता से हटने के बाद देश राजनैतिक व आर्थिक संकट में घिर गया था. इसके बाद अंतरिम सरकार द्वारा किए गए प्रयासों को उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि करार दिया है. साथ ही देश के नए संविधान में अहम भूमिका निभाने के लिए अफ़्रीकी संघ की प्रशंसा की है. 

“अब हम सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि सूडान सरकार अपने संकल्पों को पूरा कर सके.”

“मैं पुरज़ोर ढंग से कहना चाहता हूं कि यह समय आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों की सूची से सूडान को हटाने और सूडान को चुनौतियों से उबारने के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने का है.”

ग़रीबी का शिकार महिलाएं

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि अफ़्रीका और बाक़ी दुनिया में सच्चाई यही है कि महिलाएं ग़रीबी से सबसे ज़्यादा पीड़ित हैं. अफ़्रीकी संघ की शिखर वार्ता के दौरान लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण पर एक उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही.

ऑंकड़े दर्शाते हैं कि 25-34 वर्ष के आयु वर्ग में सब-सहारा अफ़ीका में हर 100 पुरुषों पर 127 महिलाएं अत्यधिक ग़रीबी में जीवन बिताने को मजबूर हैं. 
महिलाओं को अक्सर बिना मेहनताने के काम और घरेलू ज़िम्मेदारियों को निभाना पड़ता है और उनके ख़िलाफ़ हिंसा भी होती है. उन्होंने सदस्य देशों से महिलाओं के लिए सामाजिक, आर्थिक और वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने की अपील की है. 

यूएन महासचिव ने कहा कि हिंसक संघर्ष के दौरान व शांतिकाल में, घर के अंदर और सड़कों पर महिलाओं को हिंसा से बचाना होगा.  इसके लिए यह भी ज़रूरी है कि महिलाओ व लड़कियों को वैज्ञानिक कौशल विकसित करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाए और अभिनव तकनीकों तक उनकी पहुंच को सुनिश्चित किया जाए. 

 

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