अफ़्रीका के समक्ष तीन बड़ी चुनौतियां, व्यापक व समन्वित प्रयासों की पुकार

9 फ़रवरी 2020

मौजूदा दौर में अफ़्रीकी देश जटिल और बहुआयामी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं जिनसे निपटने के लिए वैश्विक समुदाय द्वारा सामूहिक, व्यापक और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रविवार को अफ़्रीकी संघ शिखर वार्ता को संबोधित करते हुए ग़रीबी, जलवायु संकट व हिंसा से लड़ाई में यूएन और अफ़्रीकी संघ की साझेदारी को अहम बताया है. 

इथियोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में 55 अफ़्रीकी देशों की वार्षिक बैठक हो रही है जिसमें शिरकत करने के लिए यूएन प्रमुख वहां पहुंचे हैं. 
महासचिव गुटेरेश ने अफ़्रीकी संघ और संयुक्त राष्ट्र की रणनीतिक साझेदारी को बेहद महत्वपूर्ण बताया है और भरोसा दिलाया है कि वह स्पष्ट रूप मानते हैं कि अफ़्रीकी चुनौतियों को अफ़्रीकी नेतृत्व में ही सुलझाया जा सकता है.

यूएन प्रमुख ने विशेष रूप से तीन प्रमुख चुनौतियों का ज़िक्र किया: ग़रीबी का अंत, जलवायु संकट से सामना, और बंदूकों को शांत करना. उन्होंने कहा कि टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा के तहत कार्रवाई के दशक की शुरुआत हुई है जिसमें प्राथमिकता ग़रीबी दूर करने की है. इस मुहिम के अंतर्गत होने वाले प्रयास अफ़्रीकी संघ के एजेंडा 2063 को मज़बूत करते हैं. 

उन्होंने बताया कि टिकाऊ विकास प्रक्रिया से हालात में बेहतरी आई है, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य ज़रूरी सेवाओं को सुलभ बनाया जाना संभव हुआ है लेकिन प्रगति धीमी है और ग़रीबी व विलगाव के मुद्दों पर असमान है. 

न्यायोचित वैश्वीकरण

न्यायसंगत वैश्वीकरण की पुकार लगाते हुए उन्होंने कहा कि अफ़्रीकी देश भ्रष्टाचार का अंत करने और टैक्स प्रणाली, प्रशासन व संस्थाओं में सुधार लाने की दिशा में प्रयासरत हैं लेकिन इस दिशा में तेज़ प्रगति के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की भी अपेक्षा है ताकि दृढ़ संकल्प के साथ इसे पूरा किया जा सके. 

लैंगिक समानता व बराबरी को इस प्रक्रिया में अहम क़रार देते हुए टिकाऊ विकास में महिलाओं के योगदान व नेतृत्व को ज़रूरी बताया गया है. साथ ही युवाओं को सशक्त बनाना व उनसे संवाद स्थापित करना महत्वपूर्ण होगा. 

“मैं अफ़्रीका में उन युवाओं से प्रेरणा लेता हूं जो संवाद और हिंसक संघर्ष के मूल कारणों को दूर करने के ज़रिए शांति की पैरवी कर रहे हैं.”

जलवायु संकट 

महासचिव गुटेरेश ने ध्यान दिलाया कि तेज़ गति से हो रहे जलवायु परिवर्तन में अफ़्रीकी देश सबसे कम ज़िम्मेदार हैं लेकिन उसके दुष्प्रभावों को सहने में वे सबसे आगे खड़े हैं. उन्होंने जलवायु आपात स्थिति से निपटने में अफ़्रीकी नेतृत्व की नैतिक व राजनैतिक नेतृत्व की सराहना की है.

“चक्रवाती तूफ़ान इडाई और केनेथ के दौरान हुई भारी नुक़सान के कारण पिछला वर्ष तबाही भरा था, उसके साथ सहेल से ज़ाम्बिया और केनया से मेडागास्कर तक जलवायु संबंधी संकटों के बारे में कई बार पूरी जानकारी सामने नहीं आ पाती.”

जलवायु कारणों से ही टिड्डियों के बड़े झुंड पूर्वी अफ़्रीका में फ़सलों को भारी नुक़सान पहुंचा रहे हैं जबकि जलवायु के कारण उपजने वाले सुरक्षा जोखिम से निपटना हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका, मध्य अफ़्रीका और सहेल के लिए प्राथमिकता बताया गया है.

‘साइलेंसिग द गन्स’

अफ़्रीकी संघ और संयुक्त राष्ट्र की साझेदारी की सफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘साइलेंसिग द गन्स’ नामक साझा पहल के ज़रिए शांति को बढ़ावा देने में मदद मिली है. उदाहरण के तौर पर हाल के महीनों में सूडान लोकतांत्रिक शासन की दिशा में अग्रसर है.

उन्होंने सचेत किया कि पारंपरिक शांतिरक्षा की सीमितता के मद्देनज़र संयुक्त राष्ट्र के ‘एक्शन फ़ॉर पीसकीपिंग’ पहल को जारी रखना भी महत्वपूर्ण है, ख़ासतौर पर सहेल क्षेत्र में. शांति को मज़बूती से स्थापित करने और आंतकवाद-विरोधी अभियानों में संयुक्त राष्ट्र का समर्थन प्राप्त अफ़्रीकी संघ के अभियानों की ज़रूरत को रेखांकित किया गया है.

उन्होंने कहा कि सहेल और लेक चाड क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद का अभाव है. “आतंकवाद के कारण पूरे क्षेत्र पर जोखिम है.”

“हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं और अनगिनत पीड़ा सहन कर रहे हैं. बुर्किना फ़ासो, माली और निजेर में नागरिक व सैन्य प्रतिष्ठानों पर आतंकवादी हमलों की संख्या और जटिलता में इज़ाफ़ा हुआ है जिसके कारण एक पुख़्ता व एकीकृत जवाबी कार्रवाई की ज़रूरत है जिसमें सीमा-पार मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया जा सके.”

उन्होंने आश्वासन दिया कि जिस अफ़्रीका का संकल्प अफ़्रीकी संघ के एजेंडा 2063 में लिया गया है उसे साकार करने और बंदूकों को हमेशा के लिए शांत करने के लिए वह संकल्पित हैं.

 

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