प्रदूषित कोहरे की चादर में लिपटी दिल्ली

4 नवंबर 2019

भारत की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण ख़तरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति की घोषणा की है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के विशेषज्ञ वेलेन्टीन फ़ोल्टेस्कू ने कहा है कि वायु प्रदूषण को अदृश्य क़ातिल माना जाता है लेकिन उसके असहनीय स्तर के कारण यह अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. 

प्रदूषित कोहरे की चादर ने पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है जिसके कारण हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ है और कुछ उड़ानों का रास्ता बदलना पड़ा है. मीडिया रिपोर्टों में राजधानी दिल्ली में रह रहे लोगों को अभी इस समस्या से एक सप्ताह और जूझने की आशंका ज़ाहिर की गई है.

भारत में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम में वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधन अधिकारी वेलेन्टीन फ़ोल्टेस्कू ने यूएन न्यूज़ को बताया कि हवा में मौजूद प्रदूषण के बारीक कणों का मौजूदा स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से 40 गुना ज़्यादा हो गया है. ये ऐसे कण हैं जो मानव स्वास्थ्य के नज़रिए से बेहद नुक़सानदेह हैं.  

वायु प्रदूषण की मुख्य वजह कृषि के ख़राब तरीक़े बताए गए हैं. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के आस-पास के राज्यों में किसान बड़े पैमाने पर खुले खेतों में पराली जला रहे हैं जिसका धुंआ दिल्ली और उसके आसपास के शहरों में अपना असर दिखा रहा है.

कचरा प्रबंधन की सही व्यवस्था ना होने और भारी यातायत और उससे निकलने वाले धुंए से ज़हरीली हवा का स्तर ज़्यादा हो गया है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने पार्टिकुलेट मैटर - हवा में मौजूद ख़तरनाक बारीक कण – से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए बताया है कि इससे बच्चों के मस्तिष्क का विकास रुक जाता है, ह्रदय रोग होने की आशंका बढ़ती है, और फेफड़ों का कैंसर होने का ख़तरा पैदा होता है.

दुनिया में हर 10 में से 9 व्यक्ति जिस हवा में सांस लेते हैं वह स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं है.

एक अनुमान के अनुसार वायु प्रदूषण से हर साल 70 लाख असामयिक मौतें हो रही हैं जिनमें छह लाख से ज़्यादा बच्चे हैं.

यूएन पर्यावरण एजेंसी दिल्ली सहित अन्य इलाक़ों में प्रदूषण और ज़हरीली हवा से निपटने के लिए कई सैक्टरों से मिलकर काम कर रही है.

इसके तहत सरकार के नेतृत्व में कृषि संबंधी पहल शुरू की गई हैं और पराली जलाने की नुक़सानदेह परंपरा की रोकथाम के लिए परियोजना चलाई जा रही है.  

 

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