प्रसव के दौरान मौतों के मामलों में गिरावट लेकिन चुनौती बरक़रार

18 सितम्बर 2019

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं और बच्चों की मौतों के मामलों में पिछले दो दशकों के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई है लेकिन अब भी हर 11 सेकेंड में एक गर्भवती महिला या उसके शिशु की मौत होती है. अधिकांश मौतें जिन कारणों से होती हैं उनकी रोकथाम की जा सकती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2000 की तुलना में स्थिति में सुधार सुलभ और क़िफ़ायती स्वास्थ्य सेवाओं के ज़रिए संभव हो पाया है.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नेतृत्व में एक समूह ने बच्चों और मातृत्व मौतों के मामलों पर आधारित यह रिपोर्ट जारी की है.

वर्ष 2000 से अब तक बच्चों की मौत के मामले घटकर लगभग आधे रह गए हैं और मातृत्व मौतों के मामलों में एक तिहाई कमी आई है.

क़िफ़ायती और गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवाओं के सुलभ होने से इन आंकड़ों में कमी दर्ज की गई है.

रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं और नवजात शिशुओं को प्रसव के तुरंत बाद जान का जोखिम सबसे ज़्यादा होता है.

प्रति वर्ष 28 लाख गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की मौत – हर 11 सेकेंड में एक मौत – उन कारणों से होती है जिनकी रोकथाम की जा सकती है.

यूएन एजेंसियों ने सुझाव साझा करते हुए बताया है कि हर वर्ष इन लाखों गर्भवती महिलाओं और बच्चों की मौतें किस तरह रोकी जा सकती हैं.

इनमें प्रसव के दौरान दाइयों के लिए हाथ धोने के लिए पानी का उपलब्ध होना और किशोर लड़कियों की पढ़ाई जारी रखा जाना है ताकि वे छोटी उम्र में गर्भ धारण ना कर सकें.  

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा है कि जो देश हर नागरिक के लिए सुरक्षित, क़िफ़ायती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं वहां महिलाएं और बच्चे फल-फूल रहे हैं. यही सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की ताक़त है.

लेकिन नए आंकड़ों के मुताबिक़ 15 साल से कम उम्र के 62 लाख बच्चों की वर्ष 2018 में मौत हो गई जबकि दो लाख 90 हज़ार महिलाओं की गर्भावस्था और प्रसवकाल के दौरान होने वाली जटिलताओं के कारण जान चली गई.

UNICEF/Jan Zammit
मंगोलिया के उलानबाटर के एक स्वास्थ्य केंद्र में एक माँ अपने नवजात शिशु के साथ. (4 सितंबर 2015)

53 लाख बच्चों की मौतें पिछले पांच साल में हुई हैं और इनमें लगभग आधी संख्या उन बच्चों की है जिनकी जन्म के पहले महीने में ही मौत हो गई.

जन्म के पहले महीने में मौत होने का सबसे अधिक ख़तरा बच्चों को होता है, विशेषकर उन मामलों में जहां उनका जन्म समय से बहुत पहले हो, वे कमज़ोर हों, प्रसव के दौरान जटिलताएं पेश आएँ या फिर उन्हें संक्रमण हो जाए.

वर्ष 2018 में, सब-सहारा अफ़्रीका में हर 13 में से एक बच्चे की मौत पांचवे जन्मदिन से पहले ही हो गई.

योरोप की तुलना में वे 15 गुना ज़्यादा जोखिम झेलते हैं जहां पांच वर्ष से कम उम्र के हर 196 बच्चों में सिर्फ़ एक की मौत होती है. 

विश्व में बच्चों और मातृत्व मौतों की संख्या कम करने में सफलता हासिल हुई है और पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों ने इस मामले में ख़ासी प्रगति दिखाई है जहां पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौतों के मामले में 80 प्रतिशत की गिरावट आई है.

वहीं मातृत्व मौतों के मामलों को कम करने में दक्षिणी एशियाई देशों को भी सफलता मिल रही है और वर्ष 2000 से अब तक 60 फ़ीसदी की कमी हुई है.

बेलारूस, बांग्लादेश, कंबोडिया, कज़ाख़्सतान, मलावी, मोरक्को, मंगोलिया, रवांडा, तिमोर-लेस्ते और ज़ांबिया जैसे देश इस संबंध में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं.

गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने में राजनैतिक इच्छाशक्ति और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश को अहम बताया गया है.

इसके तहत गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए निशुल्क सेवाएं मुहैया कराना, परिवार नियोजन को समर्थन देना शामिल हैं.

कई देशों ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज पर प्रयास केंद्रित किए हैं जिसके फलस्वरूप ये नतीजे सामने आए हैं.

 

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