एशिया-पैसेफ़िक देशों में प्राकृतिक आपदाओं की विकराल चुनौती

22 अगस्त 2019

एशिया और पैसेफ़िक क्षेत्र में पर्यावरण क्षरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बदलते स्वरूपों और उनके घातक प्रभावों से ऐसी विनाशकारी घटनाओं के बार-बार होने की आशंका बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में स्थित देशों के लिए ऐसी आपदाओं का समय पर अनुमान लगाना और उनसे निपटने के लिए ज़रूरी तैयारी कर पाना मुश्किल साबित हो रहा है जो भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती का संकेत है.

एशिया और पैसेफ़िक के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (UNESCAP) ने Asia-Pacific Disaster Report 2019  रिपोर्ट गुरुवार को जारी की है. इसके अनुसार प्राकृतिक आपदाओं से इस क्षेत्र को हर वर्ष 675 अरब डॉलर का आर्थिक नुक़सान होता है – यह इसके कुल सकल घरेलू उत्पाद का 2.4 फ़ीसदी है.

मानव जीवन पर आपदाओं के असर के अलावा, आर्थिक नुक़सान से एशिया-पैसिफ़िक क्षेत्र में कड़े प्रयासों के बाद हासिल किए गए विकास को भी क्षति पहुंचने का ख़तरा है.

यूएन आयोग की प्रमुख अर्मिदा अलिसझबना के अनुसार क्षेत्रीय देश अगर अपने लोगों को आपदाओं से सुरक्षित नहीं करते तो फिर टिकाऊ विकास लक्ष्यों को 2030 तक हासिल नहीं कर पाएंगे.

“इसका अर्थ महज़ प्राथमिकता वाले ज़ोन में सुदृढ़ता सुनिश्चित करना नही है बल्कि ऐसा पूरा क्षेत्र में किया जाना चाहिए – जहां वंचित और संवेदनशील हालात में रह रहे लोगों तक भी पहुंचा जाए.”

उन्होंने ध्यान दिलाया कि आपदा के जोखिम को कम करने और सहनशीलता का निर्माण करने के लिए निवेश की राशि आपदाओं से होने वाले नुक़सान से बहुत कम है.

“इन निवेशों से हमें कई अन्य लाभ भी होंगे – जैसे बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक और बुनियादी ढांचे की सेवाएं, उच्चतर कृषि उत्पादन और आय.”

अपनी रिपोर्ट में यूएन आयोग ने क्षेत्र में चार विशिष्ट ‘हॉटस्पॉट’ की पहचान की है जहां नाज़ुक हालात का सामना कर रहे पर्यावरणों और गंभीर सामाजिक-आर्थिक कमज़ोरियों से विनाशकारी नतीजों की आशंका बढ़ रही है. इन हॉटस्पॉट में दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया में नदियों के बेसिन; पैसिफ़िक रिंग ऑफ़ फ़ायर; पैसेफ़िक लघु द्वीपीय विकासशील देश; और धूल भरे तूफ़ानों वाले गलियारे शामिल हैं.

ग़रीबी, भूख और अल्पपोषण से पीड़ित इन इलाक़ों में कमज़ोर पर्यावरण, भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण और जलवायु परिवर्तन जैसे कारक मिलकर मुश्किल हालात पैदा कर रहे हैं.

इस रिपोर्ट को यूएन आयोग की ‘कमेटी ऑन डिज़ास्टर रिडक्शन’ की 28-30 अगस्त को होने वाली बैठक से ठीक पहले जारी किया गया है.

इस रिपोर्ट में रूपान्तरण कर देने वाले बदलावों का अनुरोध किया गया है और रेखांकित किया गया है कि सामाजिक नीतियां और आपदा सहनशीलता को अलग-अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए.

इसके बजाए सरकारी एजेंसियों और मंत्रालयों को सहयोग और समन्वयन से अपनी योजनाओं को एक साथ लाना ज़रूरी है ताकि आपदा जोखिम कम करने और सहनशीलता के निर्माण को सभी नीतिगत सेक्टरों में सुनिश्चित किया जा सके.

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग, एशिया और पैसेफ़िक क्षेत्र में विकास प्रयासों पर केंद्रित है. इसके 53 सदस्य देश और 9 सहभागी देश हैं. इन देशों में विश्व की कुल आबादी का दो-तिहाई हिस्सा रहता है.

 

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