मेरे तीन दोस्तों को 'मेरी आंखों के सामने मार दिया गया'

15 अगस्त 2019

आतंकवाद के पीड़ितों के स्मरण एवं उन्हें श्रृद्धांजलि का अंतरराष्ट्रीय दिवस हर वर्ष 21 अगस्त को मनाया जाता है. यूएन समाचार की टीम ने 2019 के शुरू में पश्चिम अफ़्रीका के देशों - चाड और कैमरून के सुदूर पूर्वी क्षेत्र का दौरा किया और उन लोगों से बात की जिनके जीवन आतंकवाद ने तबाह कर दिए हैं.

प्रतिबंधित गुट बोको हराम संगठन से संबंधित होने का दावा करने वाले हथियारबंद चरमपंथियों ने वर्ष 2015 में लेक चाड के एक द्वीप ‘न्गोमिरोन दुमो’ पर हमला किया था. इस द्वीप पर साढ़े पांच हज़ार से ज़्यादा लोग रहते हैं.

बोको हराम लड़ाकों ने नाइजीरिया से आकर इस द्वीप पर धावा बोलने के बाद हथियार की नोक पर 300 से ज़्यादा पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को अगवा कर लिया.

25 वर्षीय केद्रा अबाकर उन लोगों में हैं जो आतंकियों के हाथों से बच निकलने और द्वीप लौटने में कामयाब रहे.

केद्रा अकबर की कहानी है...

“मेरा नाम केद्रा अबाकर है. मेरी उम्र 25 साल है और मैं न्गोमिरोन दुमो द्वीप पर रहता हूं. मैं 21 साल का था जब बोको हराम ने मेरे द्वीप पर हमला किया; उन्होंने डर और भ्रम का माहौल बनाया. कई पड़ोसी भाग गए, लेकिन जो ऐसा नहीं कर पाए उन्हें पकड़ लिया गया.”

मैं पकड़े गए लोगों में था. हमें एक पेड़ के नीचे रखा गया और मेरे तीन दोस्तों को हमारी आँखों के सामने ही मार दिया गया. वह भयावह था. हमें बताया गया कि अगर हम बोको हराम के साथ नहीं गए तो हमारे साथ भी यही होगा. हम बहुत भयभीत थे.”

UN Photo/Eskinder Debebe
लेक चाड के आतंकवाद से प्रभावित इलाक़ों में गश्त लगाते कैमरून के सैनिक.

“बोको हराम हमें नाइजीरिया ले गया. वहां हमारे तीन काम थे; खेतीबाड़ी का काम करना, मछली पकड़ना और बोको हराम के लिए लड़ना. अपनी बारी आने पर मुझे भी लड़ना पड़ा. मुझे एक बंदूक दी गई और एक गांव पर हमला करने के लिए कहा गया – इसके लिए मुझे मजबूर किया गया था – अगर मैं मना करता तो उन्होंने मुझे मार दिया होता. मैंने अपनी बंदूक तो चलाई लेकिन मुझे नहीं पता कि मैंने किसी को मारा या नहीं.”

“मैंने बोको हराम के साथ दो दर्दनाक साल गुज़ारे और मैं ख़ुश नहीं था. मैं भाग निकलने का एक अवसर तलाश कर रहा था लेकिन मुझे मालूम था कि अगर मैं पकड़ा गया तो मुझे जान से मार दिया जाएगा. इसलिए मैं बहुत डरा हुआ था. अंत में, मैं भाग निकलने में कामयाब रहा. मैं रात में लेक चाड के तट पर एक नौका में सवार हो गया. मैं सीधे चाड तो नहीं आ पाया लेकिन कैमरून से होकर जाना पड़ा.”

“जब मैं बोको हराम के साथ बीते अपने समय को याद करता हूं तो मुझे दुख होता है. जिन 300 लोगों को ले जाया गया था उनमें से 100 ही द्वीप पर वापस आ पाए हैं. कई लोग लड़ाई के दौरान मारे गए और कुछ अब भी वहां हैं; वे जो ये मानते हैं कि बोको हराम अच्छा है.”

“युवाओं को मेरी सलाह होगी कि वे समझें कि बोको हराम बहुत बुरा है. मैं उन्हें बताता हूं कि अगर संभव हो तो उन्हें गांव में रहना चाहिए. बोको हराम ने हमारे साथ धोखा किया क्योंकि हमें ज़्यादा मालूम नहीं था.”

“मेरे समुदाय ने वापस आने पर मेरा स्वागत किया और मुझे जिस किसी चीज़ की ज़रूरत थी उसे दिया गया. मुझे आशा है कि भविष्य में द्वीप पर एक स्कूल होगा, जहां लोगों को शिक्षा मिल सकेगी और वे बोको हराम के चंगुल में नहीं फंसेगे.”

 

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