ओडिशा के पुरी तट से टकराया 'फणी', बांग्लादेश में यूएन एजेंसियां सतर्क

3 मई 2019

हाल के दशकों में आए सबसे शक्तिशाली चक्रवाती तूफ़ानों में से एक ‘फणी’ ने शुक्रवार सुबह भारत के ओडिशा राज्य के पुरी ज़िले में दस्तक दी जिसके बाद वहां भारी बारिश के साथ 175 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से हवाएं चलीं.  ‘फणी’ चौथी श्रेणी का तूफ़ान है जिस पर यूएन एजेंसियां नज़र रख रही हैं और उसके बांग्लादेश पहुंचने से पहले वहां शरणार्थी परिवारों के लिए राहत इंतज़ामों में जुटी हैं. 

शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार तटीय इलाक़ों में पानी भर गया है. ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में भी 140 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चली हैं और राज्य के अन्य तटवर्ती इलाक़ों में  भारी बारिश हो रही है. 

ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और किसी को हताहत न होने देने के लिए भारत सरकार ने विशेष नीति तैयार की है. उसके बारे में जानकारी देते हुए संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण (UNISDR) के प्रवक्ता डेनिस मैक्कलीन ने बताया कि भारतीय मौसम विभाग से सटीक जानकारी और पूर्व चेतावनी मिल जाती है.

इससे स्थानीय प्रशासन को लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की योजना तैयार करने में मदद मिलती है. चक्रवाती तूफ़ान फणी से बचाव के लिए 10 लाख से ज़्यादा लोगों को राहत शिविरों में रखा गया है.

तूफ़ान प्रभावितों के लिए चार हज़ार शिविरों का इंतज़ाम किया गया है – इनमें 880 विशेष रूप से निर्मित हैं जों तूफ़ान की तेज़ हवाओं को झेलने में सक्षम हैं.  “स्कूल, हवाई अड्डे और यातायात के साधन बंद रहे. बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है लेकिन अभी तक किसी के मारे जाने की जानकारी नहीं है.”

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने शुक्रवार को बताया कि चक्रवाती तूफ़ान ‘फणी’ ओडिशा के बाद उत्तर-उत्तर पूर्व का रुख़ करेगा और बांग्लादेश की ओर बढ़ेगा जहां तटीय इलाक़ों में बाढ़ का ख़तरा पैदा हो सकता है.  

विश्व खाद्य कार्यक्रम की प्रवक्ता क्लेअर नुलीस ने बताया कि “कॉक्स बाज़ार और अन्य इलाक़ों में तूफ़ान का ज़्यादा गंभीर असर न होने की संभावना है.” कॉक्स बाज़ार में दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी राहत शिविर है जहां मुख्य रूप से उत्तरी म्यांमार से आए रोहिंज्या शरणार्थियों ने शरण ली हुई है. 

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन ( IOM) भारी बारिश और तेज़ हवाओं से शरणार्थी परिवारों को बचाने के लिए समुचित कदम उठा रहे हैं. यूएन न्यूज़ के साथ इंटरव्यू में प्रवासन संगठन के बांग्लादेश में मिशन उपप्रमुख मैनुएल परेरा ने बताया कि घरों और शिविरों की सुरक्षा के लिए किट का वितरण किया जा रहा है.

इससे टेंटों और अस्थायी घरों को बांधे रखने में मदद मिलेगी और जान माल के ख़तरे को टाला जा सकेगा. विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कॉक्स बाज़ार के आस-पास के इलाक़ों में यूएन कर्मचारी आपदा से होने वाले नुक़सान को कम करने के इंतज़ाम में जुटे हैं.

इसके तहत शिविरों को मॉनसून और चक्रवाती तूफ़ान के मौसम से बचाने के लिए मज़बूत बनाया जा रहा है. खाद्य और अन्य ज़रूरी सामानों के वितरण की व्यवस्था की गई है. 

बांग्लादेश में 9 लाख से ज़्यादा रोहिंज़्या शरणार्थी रहते हैं जिनमें से अधिकतर 2017 में म्यांमार से भागकर वहां पहुंचे.

 

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