महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहिष्णुता की पुकार

6 फ़रवरी 2019

महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहिष्णुता के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार को अपने संदेश में कहा कि जननांग विकृति मानवाधिकार हनन का एक ऐसा घिनौना रूप है जिससे दुनिया भर में लड़कियां और महिलाएं पीड़ित हैं.

"यह उन्हें उनकी गरिमा से वंचित करता है, स्वास्थ्य को ख़तरे में डालता है और अनावश्यक पीड़ा सहन करने के लिए मजबूर करता है."

जननांग विकृति - जिसे महिलाओं का ख़तना भी कहा जाता है - में लड़कियों के जननांग के बाहरी हिस्से को आंशिक तौर पर या पूरी तरह से काट दिया जाता है जिसका कोई मेडिकल आधार नहीं है. लड़कियों और महिलाओं को इसके गंभीर शारीरिक और मानसिक दुष्परिणामों को झेलना पड़ता है. 

यूएन महासचिव ने कहा कि यह प्रथा, "लैंगिक असमानताओं और ताक़त के असंतुलन पर आधारित है. लड़कियों और महिलाओं को अपने अधिकार हासिल करने की संभावनाओं को सीमित करते हुए ये असमानता कायम रखी जाती है."

जिन समुदायों में जननांग विकृति की प्रथा है उनमें यह ज़िम्मेदारी पारंपरिक रूप से कुछ व्यक्तियों को सौंपी जाती है जो बिना सुन्न किए और कच्चे औजारों से ख़तना करते हैं.

"अनुमान के मुताबिक़ दुनिया में इस समय 20 करोड़ लड़कियां और महिलाएं इस ख़तरनाक परंपरा से पीड़ित हैं और हर साल लगभग 40 लाख लड़कियां इस विकृति का शिकार होने का ख़तरा झेलती हैं." 80 प्रतिशत से अधिक ऐसी महिलाएं जो इस क्रूर प्रथा का शिकार हुई हैं उनके जननांग के बाहरी हिस्से क्लिटोरिस और लेबिया मिनोरा को काट दिया गया. 

स्थिति बिगड़ने से असहनीय पीड़ा, यौन संबंधों में दर्द का अनुभव, रक्त रिसाव और अन्य विकार होने का ख़तरा होता है. जननांग विकृति के मानसिक दुष्प्रभाव भी होते हैं और कईं बार पीड़ित बेचैनी, अवसाद, अपूर्णता और मानसिक रूप से धक्का पहुंचने का शिकार होती हैं. 

"टिकाऊ विकास लक्ष्यों के अंतर्गत 2030 तक जननांग विकृति को ख़त्म करने की पुकार है. इस लक्ष्य को पाने के लिए संयुक्त राष्ट्र वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय साझेदारों से एकीकृत ढंग से समग्रता में साथ आने का आग्रह करता है."

जननांग विकृति से निपटना यूएन के Spotlight Initiative का भी हिस्सा है जिससे यूरोपीय संघ की साझेदारी में शुरू किया गया है.

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि कुछ देशों में मज़बूत राजनीतिक संकल्प के परिणाम मिलने शुरू हो गए हैं लेकिन अगर वर्तमान रूझान जारी रहे तो जनसंख्या वृद्धि के चलते ये प्रयास पीछे रह जाएंगे.

जननांग विकृति का शिकार सबसे अधिक लड़कियां और महिलाएं अफ़्रीका के 28 देशों और कुछ एशियाई देशों में होती हैं. लेकिन अब यह प्रथा यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका  में भी सिर उठा रही है. अफ़्रीका और दक्षिण-पश्चिम एशिया से प्रवासियों के आने से ऐसा हो रहा है. 

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) and और महिलाओं के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट संस्था UN Women मिलकर इस समस्या से निपटने के लिए प्रयास कर रही हैं. इसके तहत जनता, स्वास्थ्य कर्मचारियों और ख़तना करने वाले लोगों में जागरूकता फैलाने का काम किया जा रहा है. 

 

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