जलवायु परिवर्तन और विकास चुनौतियों से निपटने में युवाओं का साथ अहम

यमन के सना गवर्नरेट के एक स्कूल में छात्र यूनीसेफ़ द्वारा उपलब्ध कराए गए लैपटॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं.
© UNICEF/Hani Alansi
यमन के सना गवर्नरेट के एक स्कूल में छात्र यूनीसेफ़ द्वारा उपलब्ध कराए गए लैपटॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं.

जलवायु परिवर्तन और विकास चुनौतियों से निपटने में युवाओं का साथ अहम

एसडीजी

दुनिया युवाओं के आशावाद, तकनीकी कौशल और उनकी ऊर्जा को निखारे बग़ैर टिकाऊ विकास लक्ष्यों के 2030 एजेण्डा या जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने की उम्मीद नहीं कर सकती है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम में युवाओं के बेहतर भविष्य और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिये डिजिटल समाधानों, शिक्षा और ट्रेनिंग में निवेश किये जाने का आहवान किया है.  

यूएन प्रमुख ने उच्चस्तरीय कार्यक्रम ‘जैनरेशन अनलिमिटेड’ के दौरान सरकारों, व्यवसायों और बहुपक्षीय एजेंसियों के शीर्ष नेताओं व अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी ने लम्बे समय से चली आ रही विषमताओं को उजागर कर दिया है.‘

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जैनरेशन अनलिमिटेड’ एक वैश्विक साझेदारी है जिसका लक्ष्य 10 से 24 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों और युवाओं के लिये शिक्षा, प्रशिक्षण व रोज़गार के अवसर सुलभ बनाना है. 

महासचिव गुटेरेश ने कहा, “बच्चों और युवाओं की मौजूदा स्थिति संकट के भीतर एक और संकट की है. मेरी पीढ़ी हमारे समक्ष मौजूद वैश्विक चुनौतियों के ख़िलाफ़ उपयुक्त जवाबी कार्रवाई में विफल रही है.”

इस वर्चुअल कार्यक्रम की थीम ‘आधी दुनिया को अवसरों से जोड़ना’ (Connecting Half the World to Opportunities) रखी गई थी जिसमें प्रतिभागियों ने साढ़े तीन अरब बच्चों और युवाओं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने का संकल्प लिया है. 

इसके तहत वर्ष 2030 तक विश्वस्तरीय डिजिटल समाधान, दूरस्थ पढ़ाई (Distance Learning) और कौशल विकसित करने पर ज़ोर दिया जाएगा.

महासचिव ने ध्यान दिलाया कि कोरोनावायरस संकट से पहले युवाओं की लगभग 20 फ़ीसदी आबादी के पास रोज़गार, शिक्षा और ट्रेनिंग के अवसर उपलब्ध नहीं थे. 

उनमें से एक-तिहाई बच्चे अब घर पर रहकर पढ़ाई-लिखाई जारी रखने में मददगार माध्यमों तक पहुँच से वंचित हैं और निर्धनतम परिवारों और ग्रामीण इलाक़ों में रहने वाले बच्चे इस समस्या से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं. 

बताया गया है कि कोविड-19 के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई में शिक्षा और डिजिटल टैक्नॉलॉजी दो ऐसे अहम क्षेत्र हैं जिनमें निवेश के ज़रिये देश मज़बूत पुनर्बहाली की नींव तैयार कर सकते हैं.

डिजिटल टैक्नॉलॉजी में निवेश 

यूएन प्रमुख ने कहा कि डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई और युवाओं की ट्रेनिंग में निवेश करना सामाजिक समरसता के निर्माण और उन विषमताओं को घटाने में बेहद आवश्यक है जिनसे मानव विकास अवरुद्ध होता है.

उन्होंने आगाह किया कि इन क्षेत्रों में निवेश सुनिश्चित करने के लिये युवाओं को ख़ुद अग्रिम मोर्चे पर आना होगा, निर्णय लेने होंगे और मुश्किलों को हल करने के अपने हुनर का उपयोग करना होगा. 

“मैं विशेष तौर पर युवा महिलाओं को बोलने के लिये प्रोत्साहित करता हूँ और उनकी आवाज़ें सुनना चाहूँगा.”

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महासचिव गुटेरेश ने कहा कि युवाओं के सपनों को पूरा करने के लिये ‘जैनरेशन अनलिमिटेड’ पहल संसाधनों और नैटवर्कों का निर्माण कर रही है. 

इसका लक्ष्य है: हर युवा की इन्टरनेट, शिक्षा, ट्रेनिंग और उद्यमिता तक पहुँच सुनिश्चित बनाना, चाहे वे किसी भी जातीयता, नस्ल, धर्म, लिंग या क्षमता से सम्बन्ध रखते हों. 

यूएन एजेंसियाँ और सार्वजनिक, निजी व नागरिक समाज क्षेत्र के साझीदार संगठन इस सिलसिले में नवाचार (Innovation) समाधानों का दायरा और स्तर बढ़ाने के लिये प्रयासरत हैं.

“हमारी एक मज़बूत शुरुआत हुई है. आज की बैठक इस कार्य को अगले स्तर तक ले जाने के रास्ते ढूँढने के लिये है.” 

ग़ौरतलब है कि टिकाऊ विकास के 2030 एजेण्डा को पूरा करने के लिये 10 वर्षों का समय शेष है.

महासचिव गुटेरेश ने इन लक्ष्यों की अहमियत और तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सैक्टरों में कड़ियाँ मज़बूत बनाने और निवेश बढ़ाने की पुकार लगाई है. 

उन्होंने बताया कि व्यापक स्तर पर वित्तीय और राजनैतिक संसाधनों को सम्भव बनाने के लिये विकसित और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ अन्तरराष्ट्रीय एजेंसियों को आगे आना होगा और निजी क्षेत्र भी इन साझेदारियों में निवेश कर सकता है.

यूएन प्रमुख के मुताबिक इन महत्वाकाँक्षी लक्ष्यों के लिये ज़मीन देशीय स्तर पर तैयार की जानी होगी जिसमें युवा और राष्ट्रीय साझीदार अग्रणी भूमिका निभाएँगे.