20 सितम्बर 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विश्व नेताओं से दुनिया के सामने तमाम नाटकीय समस्याओं का समाधान निकालने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आहवान किया है. महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र के 74वें सत्र के शुरू होने के अवसर पर यूएन समाचार के साथ एक ख़ास इंटरव्यू में ये पुकार लगाई है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सभी सदस्य देशों से महासभा के 74वें सत्र में जलवायु परिवर्तन मुद्दे पर पेरिस समझौते को मज़बूत करने और 2030 के टिकाऊ विकास एजेंडा के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाओं के साथ आने का आहवान किया है.

यूएन समाचार के साथ एक ख़ास इंटरव्यू में उन्होंने ये आग्रह किया. संयुक्त राष्ट्र के ग्लोबल कम्यूनिकेशंस डिपार्टमेंट की नव निर्वाचित प्रमुख मेलीसा फ्लेमिंग को दिए इस इंटरव्यू में महासचिव ने कहा कि 2030 एजेंडा के अनेक पहलुओं को हासिल करने के लक्ष्यों पर प्रगति की रफ़्तार सही नहीं है. इस मुद्दे पर 24 और 25 सितंबर को होने वाली पहले टिकाऊ विकास लक्ष्य सम्मेलन में और ज़्यादा जान फूँकने की कोशिश की जाएगी.

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मेलीसा फ्लेमिंग को बताया कि दुनिया भर के अनेक हिस्सों में जिन अनेक संकटों का सामना हम आज के दौर में कर रहे हैं, उनके कई पक्ष हैं. इन मुद्दों का समाधान तलाश करने के लिए और ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ज़रूरत है जिनमें केंद्रीय भूमिका संयुक्त राष्ट्र की हो.  

UN News/Joon Park
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ग्लोबल कम्यूनिकेशंस डिपार्टमेंट की नव नियुक्त अध्यक्ष मेलीसा फ्लेमिंग के साथ एक ख़ास इंटरव्यू के दौरान. ये इंटरव्यू 74वें सत्र के मौक़े पर मुख्यालय में किया गया. 18 सितंबर 2019.

मेलीसा फ्लमिंग: आपने कहा है कि इस समय दुनिया कई मोर्चों पर बहुत नाज़ुक समय से गुज़र रही है: जलवायु आपातकाल, बढ़ती असानताएं, नफ़रत और असहिष्णुता में बढ़ोत्तरी व शांति और सुरक्षा समेत कई अन्य चुनौतियां. क्या आपके पास इन सबसे निपटने का कोई फार्मूला है? 

महासचिव: फार्मूला है ज़्यादा से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय सहयोग. जहाँ तक जलवायु का सवाल है, तभी तो ये सम्मेलन हो रहा है. और ये सम्मेलन सभी देशों को ये समझाने के लिए ही किया जा रहा है कि अब तक जो वो कर रहे है, उससे कहीं ज़्यादा करना होगा. और असमानताएँ तो पहले जैसी ही हैं. हमें एक न्यायोचित वैश्वीकरण चाहिए और ये संभव है केवल अंतरराष्ट्रीय सहयोग के ज़रिए. इसीलिए हम सतत् विकास लक्ष्यों पर ये सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं.

इसीलिए हमारा 2030 का एजेंडा है, जिसे एक न्यायोचित वैश्वीकरण के लिए सभी देशों को एकजुट करने का संयुक्त राष्ट्र का ब्लूप्रिंट माना जा सकता है. अगर हम इन पर ध्यान केंद्रित करें तो हमें तेज़ी से फैलती नफ़रत की भाषा समेत सभी मुद्दों का एकजुट होकर सामना करना होगा.

मेलीसा फ्लेमिंग: युवा सम्मेलन इतना अहम क्यों है?

महासचिव: आज के युवा कुछ दशकों बाद जब कल के व्यस्क बनेंगे तो हमारी आज की ग़लतियों का बड़ा ख़ामियाज़ा भुगतेंगे. इसीलिए आज युवा आगे बढ़कर सरकारों, व्यवसायों, शहरों और इससे जुड़े सभी किरदारों पर ज़ोर डाल रहे हैं कि वो कुछ भी करके जलवायु परिवर्तन की रोकथाम करें.

मेलीसा फ्लेमिंग: आपको क्या लगता है कि विश्व नेता जलवायु संकट से निपटने के लिए क्या समाधान लेकर आएंगे?

महासचिव: हम चाहते हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा देश यहां आएँ और 2050 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी के प्रति प्रतिबद्धता ज़ाहिर करें और उत्सर्जन घटाने का वादा करें. साथ ही ग्रीन क्लाइमेट फंड के लिए और हर साल विकासशील देशों में इसकी रोकथाम के लिए 100 अरब डॉलर की जो ज़रूरत होती है उसके लिए वित्तीय पोषण दें. मतलब ये कि हमें ऐसी उम्मीद है कि सभी देश, शहर और व्यवसाय क्या उपाय करेंगे, उनकी घोषणा सम्मेलन के दौरान कर सकेंगे.

UN Photo/Mark Garten
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने एक पर्यावरण अनुकूल नाव पर यात्रा की जो सौर ऊर्जा के ज़रिए चलती है. साथ ही जलवायु मुद्दों सहित पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूता बढ़ाती है.

मेलीसा फ्लेमिंग: 2030 तक सतत् विकास लक्ष्य हसिल करने के लिए और क्या किया जा सकता है?

महासचिव: काफ़ी प्रगति हुई है. पिछले दशकों के मक़ाबले आज निपट ग़रीबी में कमी आई है. शिशु मृत्यु-दर घटी है, शिक्षा की दर में बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन अब भी हम सही रास्ते पर नहीं हैं. हमें ज़रूरत है बेहतर निवेश की, बेहतर राजनैतिक इच्छाशक्ति की, न्यायोचित वैश्वीकरण हासिल करने के लिए सतत् विकास लक्ष्यों की प्राथमिताएँ तय करना, ऐसा विकास करना जो परस्पर टिकाऊ और समावेशी हो, जिसमें कोई भी पीछे न छूट जाए और जो लोग विकास की दौड़ में पीछे रह गए हैं उन सभी वंचित लोगों को विकास का लाभ मिले.

मेलीसा फ्लेमिंग: संयुक्त राष्ट्र सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर सम्मेलन क्यों कर रहा है?

महासचिव: अनेक लोगों को या तो स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिलता या फिर मिलता भी है तो वो उत्तम गुणवत्ता की नहीं होती. और हमारा एक मूल लक्ष्य ये सुनिश्चित करना है कि जल्दी से जल्दी दुनिया के सभी नागरिकों को उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं मुहैय्या कराई जा सकें, जो उनका अधिकार है.

मेलीसा फ्लेमिंग: विश्व शांति और सुरक्षा के लिए आप कौन से उम्मीद के चिह्न देखते हैं?

महासचिव: हमने सूडान में प्रगति देखी है, पिछले सप्ताह दक्षिणी सूडान पर हुए विचार-विमर्श में प्रगति. हमने केंद्रीय अफ्रीकी गणराज्य के शांति समझौते के तौर पर हुई प्रगति देखी है. लेकिन हमने ये भी देखा कि डीआरसी से लेकर मलदीव और मेडागास्कर तक चुनावों में भारी हिंसा हुई. तो कई सकारात्मक चिह्न हैं, तो दुख की बात है कि कई नकारात्मक चिह्न भी हैं. सीरिया में, यमन में लीबिया में हर रोज़ लोगों की मौत हो रही है. हमें सभी देशों को ये समझाना है कि ये युद्ध कोई भी नहीं जीत रहे हैं – यहां सभी की हार ही है.

मेलीसा फ्लेमिंग: महासभा के लिए न्यूयॉर्क आ रहे नेताओं के लिए आपका संदेश?

महासचिव: जो भी बन सके करिए और ये सुनिश्चित कीजिए कि हमारे सामने जो नाटकीय समस्याएं हैं उनका समाधान निकले.  

 

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