बारूदी सुरंग कार्रवाई सप्ताह: युद्ध की 'भयावह विरासत' से जीवन बचाने की पुकार
संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने सोमवार को ‘बारूदी सुरंग कार्रवाई सप्ताह’ आरम्भ होने के अवसर पर, बारूदी सुरंगों (Land mines), बिना विस्फोट के बिखरी हुई युद्ध सामग्री की भयावह विरासत से लोगों के जीवन की रक्षा करने की पुकार लगाई गई है. उन्होंने आगाह किया है कि इससे युद्ध से बदहाल हो चुके और हिंसक टकराव से उबर रहे समुदाय, दैनिक के जीवन में प्रभावित होते हैं.
1990 के दशक के उत्तरार्ध से अब तक, सशस्त्र संघर्षों व युद्धों के दौरान ज़मीनों में बिछाई गई साढ़े पाँच करोड़ बारूदी सुरंगें नष्ट की गई हैं और 30 से अधिक देश इस जोखिम से मुक्त हो चुके हैं.
मगर, अब भी विश्व के 70 देशों में इनकी चपेट में आकर मासूम बच्चे व लोग हताहत व अपंगता का शिकार हो रहे हैं.
हर वर्ष, 4 अप्रैल को ‘बारूदी सुरंगों के बारे में जागरूकता व कार्रवाई में सहायता के लिए अन्तरराष्ट्रीय दिवस’ मनाया जाता है.
नवीनतम अनुमान दर्शाते हैं कि वर्ष 2021 में, बारूदी सुरंगों के कारण साढ़े पाँच हज़ार से अधिक लोगों की या तो मौत हुई या फिर वे अपंग हो गए. इनमें से अधिकांश आम नागरिक और उनमें भी लगभग 50 फ़ीसदी बच्चे हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस अवसर पर अपने सन्देश में कहा कि सशस्त्र संघर्षों के कोलाहल के बीच रह रहे लाखों लोगों, विशेष रूप से महिलाओं व बच्चों के लिए, हर एक क़दम उन्हें जोखिम के रास्ते पर ले जा सकता है.
इस वर्ष अन्तरराष्ट्रीय दिवस की थीम है: बारूदी सुरंग पर कार्रवाई प्रतिक्षा नहीं कर सकती है.
यह थीम, कम्बोडिया, लाओ जनतांत्रिक गणराज्य (लाओस) और वियतनाम में दशकों से बारूदी सुरंगों की मौजूदगी से दूषित स्थानों, और अन्य जगहों पर हाल के समय में विस्फोटकों के दूषण के प्रति जागरूकता प्रसार पर लक्षित है.
यूएन प्रमुख ने कहा, “हिंसक टकराव, लड़ाई रुक जाने के बाद भी, अपने पीछे एक भयावह विरासत छोड़ जाते हैं: बारूदी सुरंग और विस्फोटक युद्धक सामग्री, जो समुदायों में बिखरी हुई होती हैं.”
“जब सड़कों और मैदानों में बारूदी सुरंग बिछाई जाती है, तो शान्ति के साथ सुरक्षा का भरोसा नहीं पनपता है, जब बिना विस्फोट हुई युद्धक सामग्री से, विस्थापित आबादी के वापिस लौटने के लिए जोखिम पैदा होता हो, और जब बच्चे ऐसी चमकने वाली वस्तुओं के साथ खेलें जिनमें विस्फोट होता हो.”
कार्रवाई की दरकार
संयुक्त राष्ट्र बारूदी सुरंग कार्रवाई सेवा (UNMAS) अपने साझीदार संगठनों के साथ मिलकर इन घातक हथियारों को हटाने, राष्ट्रीय एजेंसियों को समर्थन देने, और घरों, स्कूलों, अस्पतालों व खेतों को सुरक्षित बनाने के लिए प्रयासरत है.
अब तक, 164 देशों ने बारूदी सुरंग पर प्रतिबन्ध लगाने वाली सन्धि पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे ‘ओटवा सन्धि’ भी कहा जाता है.
बारूदी सुरंग पर प्रतिबन्ध की सन्धि के पारित हो जाने के बाद भी, लगभग 70 देशों व क्षेत्रों में छह करोड़ से अधिक लोग, दैनिक जीवन में बारूदी सुरंग के जोखिम की छाया में रह रहे हैं.
युद्धकाल के दौरान समुद्री मार्गों में बारूदी सुरंगों के ज़रिए सुरक्षित रास्ता प्रदान करने वाली यूएन कार्रवाई सेवा ने ‘काला सागर अनाज निर्यात पहल’ को अपना समर्थन प्रदान किया, जिससे यूक्रेनी बन्दरगाहों के ज़रिए अनाज व उर्वरक का सुरक्षित निर्यात सम्भव हो पाया.
महासचिव गुटेरेश ने सभी सदस्य देशों से ओटवा सन्धि, पारम्परिक हथियारों सन्धि और अन्य प्रासंगिक सन्धियों पर मुहर लगाने व उन्हें पूर्ण रूप से लागू किए जाने की अपील की है.
‘ख़तरे का अन्त’
लाखों बारूदी सुरंगें नष्ट की गई हैं और हज़ारों वर्ग किलोमीटर की भूमि को सुरक्षित बनाया गया है, मगर अभी लाखों सुरंगे बिछी हैं और अब भी एक ख़तरा हैं.
कोलम्बिया, लाओस, लीबिया, और युद्ध के इन जानलेवा अवशेषों से ग्रस्त अनेक अन्य देशों में.
यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने कहा कि इस अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर, “आइए, हम मौत के इन उपकरणों के ख़तरों का अन्त करने के लिए क़दम उठाएँ, उबरते हुए समुदायों को समर्थन दें, और लोगों को वापिस लौटने व सुरक्षा व सलामती के बीच अपने जीवन को फिर से खड़ा करने में मदद करें.”
शान्ति अभियान के लिए अवर महासचिव ज्याँ-पियेर लाक्रोआ ने इस अपील को अपना समर्थन दिया है. “वैश्विक चुनौतियों के मद्देनज़र, बारूदी सुरंग पर कार्रावई पहले से कहीं ज़्यादा आवश्यक है.”
उन्होंने कहा कि इन विस्फोटकों से उपजने वाले ख़तरों की वजह से मानवीय संकट फैलते जाते हैं और कारगर शान्ति अभियानों व जवाबी कार्रवाई में अवरोध पैदा करते हैं.