कोविड-19: यूएन का स्पष्ट संदेश - टेस्ट टेस्ट टेस्ट

16 मार्च 2020

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोनावायरस यानी कोविड-19 के संकट से निपटने के सभी देशों के लिए ज़रूरी है कि हर संदिग्ध मामले का टेस्ट किया जाए क्योंकि यही तरीक़ा इस बीमारी पर क़ाबू पाने का आधार है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख डॉक्टर टैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने स्पष्ट शब्दों मे कहा कि इस विश्वव्यापी महामारी को तब तक नियंत्रित नहीं किया जा सकता जब तक कि संक्रमितों के बारे में पूरी जानकारी ना मालूम हो जाए.

यूएन एजेंसी के महानिदेशक डॉक्टर ट्रैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने सोमवार को जिनीवा में कहा, “हमारा सभी देशों के लिए सरल संदेश है: परीक्षण, परीक्षण, परीक्षण. कोविड-19 के हर संदिग्ध संक्रमण मामले की जांच कीजिए. अगर किसी का टेस्ट पॉज़िटिव आता है तो उन्हें अलग रखिए और लक्षण दिखाई देने से पहले उनके संपर्क में आए लोगों का भी पता लगाकर उनकी जांच कीजिए.”  

“संक्रमण रोकने और ज़िंदगियों की रक्षा करने का सबसे असरदार उपाय कोविड-19 संक्रमण के फैलाव की कड़ी को तोड़ना है. इसके लिए परीक्षण करना और संक्रमितों को अलग रखना अति आवश्यक है.”

पिछले सप्ताह कोविड-19 संक्रमितों की संख्या में तेज़ बढ़ोत्तरी देखी गई है और चीन के बाद ईरान, स्पेन और इटली सहित अन्य देशों में अब नए मामलों और मौतों की संख्या बढ़ रही है.

स्वास्थ्य संगठन प्रमुख ने कोविड-19 को मौजूदा जीवन काल में अभूतपूर्व वैश्विक स्वास्थ्य आपदा क़रार देते हुए कहा कि आने वाले दिन, हफ़्ते और महीने हमारे संकल्प, विज्ञान में हमारे भरोसे और हमारी एकजुटता की परीक्षा का समय है.

उन्होंने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि आंखों पर पट्टी बांधकर आग पर क़ाबू नहीं पाया जा सकता, और इस विश्वव्यापी महामारी पर भी तब तक नियंत्रण नहीं हो सकता जब तक पता ना लगा लिया जाए कि कौन संक्रमित है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए हर दिन ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में टेस्ट किट तैयार किए जा रहे हैं.

विश्व संगठन ने 120 देशों में 15 लाख टेस्ट किट भेजे हैं और ज़रूरतमंद देशों में उनकी उपलब्धता बढ़ाने के लिए कंपनियों से भी बात चल रही है.

मानवीय एकजुटता

महानिदेशक घेबरेयेसस ने कहा कि लोग अपने घरों से ताली बजाकर स्वास्थ्यकर्मियों को धन्यवाद दे रहे हैं, और अपने समुदायों में वृद्धजनों के लिए ख़रीदारी करने में मदद कर रहे हैं. 

यूएन एजेंसी प्रमुख ने मानवीय एकजुटता की इस भावना को कोरोनावायरस से कहीं ज़्यादा फैलने वाली बताते हुए कहा कि इस कठिन दौर में दूर रहकर भी लोग एक दूसरे के कहीं ज़्यादा पास आ गए हैं. 

उन्होंने ध्यान दिलाया कि अच्छे ढंग से हाथ धोने और अपनी खाँसी या छींक को बाँह मोड़कर ढक लेने का ध्यान रखकर संक्रमण से अपने और अन्य लोगों के लिए जोखिम कम कर सकते हैं.

साथ ही यूएन एजेंसी ने लोगो से अपील की है कि एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए उन्हें ज़रूरी वस्तुओं और दवाइयों की जमाखोरी से बचना होगा.

यूएन एजेंसी ने इस बीमारी से निपटने के उपायों के तौर पर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जिनमें बताया गया है कि बच्चों, वृद्धजनों व गर्भवती महिलाओं की देखभाल किस तरह की जानी चाहिए.  

“सामाजिक दूरी बनाए रखने के प्रयासों में स्कूलों को बंद करने के अलावा खेल-कूद आयोजनों व अन्य समारोंहों को तो स्थगित किया गया है. लेकिन वैसी आवश्यक तेज़ी परीक्षणों, संक्रमितों को अलग रखे जाने और उनके संपर्कों का पता लगाने में नहीं देखी गई है जबकि कोविड-19 से निपटने का आधार वही है.”

सामाजिक दूरी बरतने से सामुदायिक स्तर पर संक्रमणों के मामलों को घटाने में मदद मिलती है और स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए निपटना आसान होता है.

एकजुटता फ़ंड

कोविड-19 से निपटने के प्रयासों के तहत शुक्रवार को एकजुटता फ़ंड शुरू किया गया है जिसके ज़रिए अब तक एक करोड़ 90 लाख डॉलर की धनराशि एकत्र की जा चुकी है. एक लाख 10 हज़ार व्यक्ति अब तक अपना योगदान दे चुके हैं. 

इस मुहिम के ज़रिए एकत्रित धनराशि का उपयोग स्वास्थ्यकर्मियों के लिए मास्क, दस्ताने, गाउन और सुरक्षा प्रदान करने वाले चश्मे ख़रीदने में किया जाएगा.

साथ ही संक्रमण का पता लगाने वाली परीक्षण किटें ख़रीदने, निगरानी क्षमता बढ़ाने और रीसर्च में निवेश करने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

कुछ देशों में संक्रमितों की संख्या तेज़ी से बढ़ने के कारण मामूली लक्षणों वाले मरीज़ों की देखभाल के लिए स्टेडियम और ऐसे ही अन्य स्थानों में व्यवस्था की गई है जबकि गंभीर रूप से बीमारों का इलाज अस्पतालों मे किया जा रहा है. 

डॉक्टर टैड्रोस ने कहा कि यह एक गंभीर बीमारी है और आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों वाले देश भी इससे जूझ रहे हैं. 

कोरोनावायरस के मामले जैसे-जैसे निर्धन देशों में सामने आ रहे हैं, स्वास्थ्य संगठन की चिंता बढ़ती जा रही है क्योंकि इन्हीं देशों में बड़ी संख्या में एचआईवी संक्रमित मरीज़ और कुपोषण का शिकार बच्चे हैं. 

अभी तक के ऑंकड़े यह ज़रूर दर्शाते हैं कि 60 वर्ष से ज़्यादा उम्र के लोगों के लिए इससे ज़्यादा ख़तरा है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि कोविड-19 से बच्चों सहित युवाओं की मौत के मामले सामने नहीं आए हैं. 

 

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