कोविड-19: संकट काल में मानसिक स्वास्थ्य का ख़याल ज़रूरी

16 मार्च 2020

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जनवरी 2020 में नॉवल कोरोनावायरस (कोविड-19) को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य एमरजेंसी’ घोषित किया और फिर मार्च में इसे विश्वव्यापी महामारी के रूप में परिभाषित किया गया. लगातार फैलती बीमारी से दुनिया के माथे पर तनाव की लकीरें गहरी हुई हैं जिसका लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा की अहमियत को समझते हुए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं.
 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने 31 बिंदुओं में क्रमवार ढंग से आम लोगो के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मियों, स्वास्थ्य केंद्र के प्रबंधकों, बाल देखरेख सुविधा प्रदाताओं, वृद्धजनों, और पहले से बीमार चल रहे लोगों और एकांतवास में रखे गए मरीज़ों के लिए सलाह उपलब्ध कराई है.

यूएन एजेंसी ने रेखांकित किया है कि जो भी लोग इस बीमारी से संक्रमित हुए हैं, दोषारोपण या कलंकित करने के बजाय उनके साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार होना चाहिए.

साथ ही यह आवश्यक है कि विश्वसनीय स्रोतों से ही जानकारी हासिल की जाए और ऐसा दिन में पहले से निर्धारित समय पर एक या दो बार किया जाए.

“किसी महामारी के बारे में अचानक लगातार न्यूज़ रिपोर्टों की भरमार किसी की भी चिंता का कारण बन सकती है. तथ्यों के बारे में जानिए, लेकिन ग़लत सूचना या अफ़वाहों से बचें.”

भरोसेमंद वेबसाइटें और स्थानीय स्वास्थ्य प्रणालियों के प्लैटफ़ॉर्म की मदद से तथ्यों और क़यासबाज़ी के बीच के भेद को जानना संभव है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने कठिन समय में एक दूसरे की मदद करने के फ़ायदे भी गिनाए हैं – जैसे ज़रूरतमंद पड़ोसियों या स्थानीय समुदाय के लोगों को फ़ोन करके उनका हाल-चाल जानना.

“एक समुदाय के रूप में साथ मिलकर काम करने और एकजुटता से कोविड-19 का मुक़ाबला किया जा सकता है.”

स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सभी का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि ज़रूरतमंदों की देखभाल करने वालों और स्वास्थ्यकर्मियों का सम्मान किया जाना चाहिए. वे लोगों की ज़िंदगियाँ बचाने और प्रियजनों को सुरक्षित रखने के काम में एक अहम भूमिका निभा रहे हैं. 

साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों को यह भरोसा दिलाना होगा कि इस समय ख़ुद पर दबाव महसूस करना सामान्य बात है और इससे यह नहीं समझना चाहिए कि आप कमज़ोर हैं या अपना काम नहीं कर सकते.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वास्थ्यकर्मियों से पर्याप्त आराम करने, स्वस्थ भोजन करने, शारीरिक रूप से सक्रिय रहने और अपने मित्रों व परिवार के संपर्क में बने रहने का आग्रह किया है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि जो लोग इस बीमारी से निपटने में अग्रिम मोर्चे पर जुटे हैं उनकी लंबे तनाव और ख़राब मानसिक स्वास्थ्य से रक्षा की जानी चाहिए.

टीम की अगुवाई कर रहे लोगों को स्वास्थ्यकर्मियों का ख़याल रखना होगा तभी वे अपनी ज़िम्मेदारियाँ सही ढंग से पूरी कर पाएंगे. 

इसके लिए यह ज़रूरी है कि टीम लीडर अपने स्टाफ़ के साथ सटीक जानकारी साझा करें और गुणवत्तापरक संवाद बनाए रखें.

साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों को कम से ज़्यादा तनाव वाली ज़िम्मेदारियों को बारी-बारी देते रहना चाहिए और कम अनुभवी स्वास्थ्यर्मियों को अनुभवी स्टाफ़ के साथ काम करने का मौक़ा दिया जाना चाहिए ताकि उन्हें आश्वस्त किया जा सके. 

बच्चों व वृद्धजनों का ख़याल

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक बच्चों का ख़याल रखने के लिए यह ज़रूरी है कि उन्हें अपनी भय, विषाद जैसी भावनाओं को सकारात्मक ढंग से व्यक्त करने का मौक़ा दिया जाए. लेकिन अगर संक्रमण के कारण ऐसा ना हो सके तो दिन में दो बार फ़ोन या वीडियो कॉल के ज़रिए अभिभावकों से बातचीत कराई जानी चाहिए. 

“अगर बच्चों को अपनी भावनाएँ सुरक्षित और समर्थन भरे माहौल में व्यक्त करने और बताने का अवसर मिले तो उन्हें इत्मीनान महसूस होता है.”

अगर संभव हो तो बच्चों को उनके अभिभावकों और परिवार के नज़दीक ही रखा जाना चाहिए. 

यह देखा गया है कि वृद्धजन और पहले से बीमार चल रहे लोगों पर इस संक्रमण के ज़्यादा गंभीर असर करने की आशंका प्रबल है. और इसी वजह से महामारी फैलने के दौरान उनकी बेचैनी और भय को समझा जाना चाहिए. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक इस काम में उनके परिवार व दायरे के अन्य लोगों से सलाह-मशविरा किया जाना चाहिए ताकि रोकथाम के उपाय अमल में लाए जा सकें. 

एकांतवास में रखे जाने पर उनसे संपर्क रखना अहम है और उन्हें अफ़वाहों पर ध्यान ना देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.  

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि इस समूह में आने वाले व्यक्तियों को बीमारी से संबंधित जानकारी सरल भाषा में स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर तस्वीरों का भी सहारा लिया जाना चाहिए.

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने कहा है कि स्तनपान करा रही महिलाओं को बीमार पड़ने पर नवजात शिशुओं से अलग नहीं किया जाना चाहिए. 

यूएन एजेंसी के मुताबिक अभी इस बात के सबूत नहीं हैं कि मॉं के दूध से शिशुओं के संक्रमित होने का ख़तरा होता है लेकिन अपने बच्चे के पास जाते समय संक्रमण का शिकार महिलाओं को मास्क पहनने, हाथ धोने और स्तनपान कराने के बाद आस-पास रखे सामान को साफ़ करना चाहिए. 

बताया गया है कि संक्रमण से पीड़ित महिलाओं व उनके परिवारों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाना और मनोचिकित्सकीय मदद उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिये यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एण्ड्रॉयड