बाल यौन शोषण पर 'गोपनीयता का पर्दा' हटाए जाने का स्वागत

19 दिसम्बर 2019

संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कहा है कि वेटिकन स्थित चर्च मुख्यालय को उन लोगों को न्याय दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई करनी होगी जो अपने बचपन के दौरान चर्च पादरियों द्वारा यौन शोषण का शिकार हुए.

बाल बिक्री और यौन शोषण पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष रैपोर्टेयर माउद डी बोएर बुक़ीचियो ने गुरूवार को पोप फ्रांसिस की इस घोषणा का स्वागत करते हुए ये बात कही कि रोमन कैथोलिक चर्च की वो नीति समाप्त की जा रही है जिसमें यौन शोषण के मामलों में गोपनीयता बरते जाने की बात कही गई थी.

विशेष रैपोर्टेयर ने कहा, “जिस गोपनीयता के पर्दे ने इन भीषण अपराधों को छुपा रखा था और जिस पर्दे ने यौन शोषण के शिकार लोगों को न्याय और राहत दिलाने के रास्ते में रोड़े अटकाए थे, अब वो पर्दा उठा लिया गया है.”

विशेष रैपोर्टेयर बुक़ीचियो की नियुक्ति संयुक्त राष्ट्र की जिनीवा स्थित मानवाधिकार परिषद से हुई है.

त्वरित और व्यापक जाँच

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार विशेषज्ञ बुक़ीचियो का कहना था कि हालाँकि गोपनीयता का पर्दा हटाया जाना एक लंबी प्रक्रिया में पहला क़दम है.

उन्होंने कहा, “वेटिकन को अब ये सुनिश्चित करना चाहिए कि यौन शोषण का शिकार हुए तमाम लोगों को न्याय और राहत मिल सके और ये त्वरित और व्यापक जाँच सुनिश्चित करके हो सकता है. इस जाँच को भी सार्वजनिक निगरानी में रखना होगा. ज़िम्मेदार लोगों पर मुक़दमा चले.”

“ऐसे जघन्य अपराधों की जानकारी रखने वाले तमाम पादरियों व कर्मचारियों को रिपोर्ट करने के लिए अनिवार्य किया जाए.”

मानवाधिकार विशेषज्ञ का कहना है, “चर्च को अपनी निगरानी वाली सभी संस्थाओं में बाल यौन शोषण पर ज़ीरो टॉलरेंस यानी शून्य सहनशीलता की नीति लागू करनी चाहिए. ये भी सुनिश्चित करना होगा कि जिसने भी बच्चों का यौन शोषण किया होगा उन्हें तुरंत बर्ख़ास्त किया जाए.”

माऊद डी बाएर बुक़ीचियो ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि कई दशकों तक इन अपराधों की अनदेखी होती रही है, उनका खंडन होता रहा है और एक ऐसे पाप के रूप में पेश किए जाते रहे हैं कि अगर उनके लिए माफ़ी माँगी जाए तो दोषमुक्ति हो सकती है.

उनका कहना था कि सभी पीड़ितों को उनके नुक़सान को देखते हुए मुआवज़ा मिलना चाहिए और उनके पुनर्वास की भी व्यवस्था होनी चाहिए. साथ ही चर्च को उन पीड़ितों के लिए तुरंत सामाजिक सहायता और मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन यानी काउंसलिंग का इंतज़ाम करना चाहिए.

उन्होंने देशों की सरकारों का आहवान किया कि वो भी अपनी भूमिका निभाएँ और इन उपायों में बच्चों को आगे इस तरह के शोषण से सुरक्षित रखना भी शामिल हो.

मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कहा, “इस दहला देने वाले मुद्दे पर बोलने का साहस करने वाले पीड़ितों को हम शाबाशी देते हैं, लेकिन इस बुराई को समाप्त करने की ज़िम्मेदारी केवल पीड़ितों पर ही नहीं ठहर सकती."

"इस अभिशाप को समाप्त करने के लिए दुनिया देशों और चर्च की तरफ़ उनकी ज़िम्मेदारी निभाने के लिए टकटकी लगाए हुए देख रही है. शब्दों पर कार्रवाई के रूप में अमल होते नज़र आना चाहिए.”

 

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