चीन किसी की 'धमकियों से नहीं डरेगा'

28 सितम्बर 2019

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने शुक्रवार को यूएन महासभा में अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि संरक्षणवाद की चुनौती का सामना करते हुए उनका देश ना तो धमकियों से डरेगा और ना ही किसी के दबाव में आएगा.
 

उन्होंने कहा कि व्यापार के मुद्दों पर चल रही तनातनी और मतभेद सुलझाने के लिए चीन संकल्पित है और इन मुद्दों को संयम, तर्कपूर्ण और सहयोगपूर्ण तरीके से सदभावना भरे माहौल में सुलझाने का प्रयास किया जाएगा.

मंगलवार को जनरल डिबेट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने यूएन महासभा को बताया था कि वह चीन के साथ एक बुरा व्यापारिक समझौता स्वीकार नहीं करेंगे और ना ही उन्हें किसी फ़ायदे वाले समझौते की आशा है.

अपने जवाब में वांग यी ने कहा कि अगर दूसरा पक्ष दुर्भावना से काम करता है तो फिर अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए ज़रूरी फ़ैसले लेने होंगे और अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था को सर्वोपरि रखना होगा.

2019 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ है जिसे रेखांकित करते हुए चीनी विदेश मंत्री ने बताया कि 85 करोड़ से ज़्यादा नागरिकों को ग़रीबी की गिरफ़्त से बाहर निकालने में सफलता मिली है और दसियों करोड़ लोग अब मध्य वर्ग का हिस्सा बन गए हैं.

चीन की कूटनीतिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि चीन ने अपने विकास के ज़रिए विश्व शांति और समृद्धि को बढ़ावा दिया है.

उन्होंने दोहराया कि चीन सार्वभौमिक समानता और दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप ना करने के बुनियादी सिद्धांतों के प्रति संकल्पित है. यही सिद्धांत यूएन चार्टर का अहम अंग हैं.

बढ़ते एकपक्षवाद पर चिंता जताते हुए उन्होंने विश्व से हाथ पर हाथ धर कर ना बैठने की अपील की.

वैश्विक रणनीतिक संतुलन और स्थिरता के लिए ‘इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फ़ोर्सेज़ संधि’ को अहम बताते हुए उन्होंने कहा कि एकतरफ़ा ढंग से इस संधि से हाथ खींचने के नकारात्मक परिणाम होंगे.

“चीन एशिया प्रशांत में मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों की तैनाती के ख़िलाफ़ है...चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियारों की दौड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रयास करता रहेगा.”

ईरान के परमाणु मुद्दे पर उन्होंने संयुक्त व्यापक कार्ययोजना पर लौटने की बात कही और खाड़ी देशों से अनुरोध किया कि संवाद और विचार विमर्श को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.

म्यांमार और बांग्लादेश के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि चीन द्वारा मध्यस्थता के ज़रिए दोनों देश रोहिंज्या शरणार्थियों के मामले में सहमति पर पहुंचे हैं.

 

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