बांग्लादेश में चुनौतियों के बावजूद विकास के मोर्चे पर ‘चमत्कार’

28 सितम्बर 2019

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने शुक्रवार को यूएन महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक व्यवधानों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद दुनिया मानती है कि उनके देश को विकास के मोर्चे पर चमत्कारिक नतीजे हासिल हुए हैं. 

प्रधानमंत्री हसीना ने कहा, “पिछले 10 सालों में 26 देशों की सूची में बांग्लादेश ने सबसे ज़्यादा आर्थिक वृद्धि हासिल की है.” देश के सकल घरेलू उत्पाद में 188 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है और वर्ष 2009 में 102 अरब डॉलर से बढ़कर अब यह 302 अरब डॉलर हो गया है. 

ग़रीबी और असमानता को विकास पथ में दो बड़े अवरोध बताते हुए उन्होंने कहा कि विकास रणनीति के केंद्र मे ग़रीबी उन्मूलन, टिकाऊ आर्थिक वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और मानव संसाधन को रखा गया है. 

“बांग्लादेश ने विश्व में ग़रीबी घटाने की सबसे तेज़ दरें हासिल की हैं.” उन्होंने बताया कि पिछले 10 सालों में उनके देश ने प्रगतिशील और सामयिक नीतियाँ अपनाई हैं जिनमें ग़रीबी और असमानता से निपटने के लिए सामाजिक सुरक्षा, अच्छे एवं उपयुक्त रोज़गार और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया गया है.

उन्होंने कहा कि लैंगिग बराबरी सुनिश्चित करने के प्रयासों के बाद उनका ध्यान अब गुणवत्तापरक शिक्षा पर है जिसमें ई-लर्निंग को बढ़ावा और शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा. 

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में स्कूली पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों का हिस्सा 50 फ़ीसदी से घटकर 18 फ़ीसदी पर आ गया है. साथ ही 18 हज़ार से ज़्यादा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और क्लीनीक के ज़रिए सर्वजन के लिए स्वास्थ्य कवरेज उपलब्ध कराई गई है. 

“इन केंद्रों पर विभिन्न प्रकार की 30 दवाईयां निशुल्क मुहैया कराई जाती हैं और ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मुफ़्त उपलब्ध हैं.”

इन योजनाओं का 80 फ़ीसदी से ज़्यादा लाभ महिलाओं एवं बच्चों को मिल रहा है.

ब्लू इकॉनॉमी को उन्होंने बांग्लादेश की नई प्राथमिकताओं में शामिल बताया जिसके ज़रिए समुद्री जैवविविधता के संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है. 

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश उन 10 देशों में शामिल है जिन पर जलवायु परिवर्तन का सबसे ज़्यादा असर होगा. इस चुनौती से निपटने के लिए जलवायु सहनशीलता और अनुकूलन के लिए प्रयास हो रहे हैं और ऐसी तकनीकें अपनाई जा रही हैं जिनसे प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुक़सान को कम किया जा सके. 

रोहिंज्या शरणार्थियों के मुद्दे पर उन्होंने भरोसा दिलाया कि सुरक्षा और आवाजाही की आज़ादी के अभाव में एक भी शरणार्थी म्यांमार वापस नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि यह स्थिति इस तरह से जारी नहीं रह सकती और इसे सुलझाने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी भूमिका है. 

 

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