कैंसर से लड़ने वाली अभूतपूर्व दवाएं आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल

10 जुलाई 2019

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आवश्यक दवाओं की सूची में अनेक नई दवाओं को शामिल करने की घोषणा की है – जिसके बाद ये दवाएं हर देश में उपलब्ध होनी चाहिए. इस सूची में नए कैंसर उपचार भी शामिल हैं जिन्हें इंजेक्शन के ज़रिए लेने की बजाय आसानी से गोली के रूप में निगला जा सकता है.

150 से अधिक देश संयुक्त राष्ट्र की आवश्यक दवाओं की सूची का उपयोग करते हैं जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य ज़रूरतों के लिए महत्वपूर्ण लगभग 460 दवाएं शामिल हैं.

नवीनतम सूची में वयस्कों के लिए 28 और बच्चों के लिए 23 दवाएँ शामिल किया गया है. साथ ही पहले से सूचीबद्ध 26 दवाइयों को उनके मूल्य, सेहत पर असर और तथ्यों के आधार पर नए तरीक़े से उपयोग में लाए जाने का सुझाव है.

कैंसर और गठिया से लेकर रक्तस्राव तक

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सूची में जोड़ी गई पांच दवाइयों को विशेष रूप से त्वचा के कैंसर (मेलेनोमा), फेफड़े, रक्त और प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.

इनमें हाल ही में विकसित इम्यूनोथेरपी के दो तरीक़ों – निवोलुमाब (nivolumab) और प्रेम्बोलाईजुमाब (pembrolizumab) भी शामिल हैं  जिनसे बुरी तरह फैल गए मेलेनोमा यानि त्वचा कैंसर के उपचार में 50 प्रतिशत बचाव दर होने की उम्मीद जागी है – कैंसर के इस चरण में पहुंचने को पहले लाइलाज माना जाता था.  

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा, "इन नवीनतम और सबसे उन्नत कैंसर दवाओं का इस सूची में शामिल होना अपने आप में एक मज़बूत संदेश है कि इन जीवन रक्षक दवाओं पर केवल धनी लोगों का नहीं बल्कि हर किसी का हक़ है."

सूची में शामिल अन्य दवाओं में स्ट्रोक (आघात) रोकने के लिए निगले जाने वाली दवा शामिल है जिसे नसों में खून का थक्का जमने के लिए ली जाने वाली वारफ़ेरिन दवा के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा सकेगा. 

संगठन के मुताबिक़ कम आय वाले देशों के लिए ये "विशेष रूप से लाभप्रद" हैं  क्योंकि वारफ़ेरिन की तुलना में इसके लिए नियमित निग़रानी की ज़रूरत नहीं पड़ती.

इसके अलावा एजेंसी की समिति ने सलाह दी है कि सभी देश गठिया और आंतों में सूजन जैसी बीमारियों के इलाज के लिए भी नई दवाइयों की आपूर्ति करें.

इस साल की आवश्यक दवाओं की सूची के ज़रिए बच्चे के जन्म के बाद होने वाले ख़तरनाक रक्तस्राव की समस्या से भी निपटने का प्रयास किया गया है. नए प्रस्ताव के तहत फ़िलहाल इस्तेमाल की जाने वाली ऑक्सीटोसिन की जगह कार्बेटोसिन नामक दवा उपयोग में लाई जानी चाहिए.

यूएन एजेंसी के बयान के अनुसार "ये नया नुस्ख़ा ऑक्सीटोसिन जैसे ही असर करता है लेकिन इसे ठंडक में रखने की ज़रूरत नहीं है जो गर्म जलवायु वाले देशों के लिए ख़ासतौर पर लाभकारी है."

नाज़़ुक रोगों की निदान प्रक्रिया में सुधार

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने अपनी आवश्यक निदान सूची में भी बदलाव किए हैं ताकि समय रहते यह पता लगाया जा सके मरीज़ को क्या परेशानी है.

पिछले साल जारी की गई पहली सूची में सीमित संख्या में एचआईवी, मलेरिया, तपेदिक और हेपेटाइटिस जैसी प्राथमिकता वाली बीमारियों पर ध्यान केंद्रित किया गया था.

इस वर्ष की सूची में अधिक संख्या में संक्रामक और ग़ैर-संक्रामक रोग शामिल किए गए हैं.

स्वास्थ्य संगठन ने अपनी सूची में 12 परीक्षणों को शामिल किया है ताकि कोलोरेक्टल, लीवर, सर्वाइकल, प्रोस्टेट, स्तन जैसे ठोस ट्यूमर और रोगाणु कोशिका कैंसर के साथ- साथ ल्यूकेमिया और लिंफोमा का भी पता लगाया जा सके.

इस सूची में कम और मध्यम आय वाले देशों में फैलने वाली हैज़ा जैसी संक्रामक बीमारियों और डेंगू और ज़ीका जैसे उपेक्षित रोगों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है.

कई प्रकार के रोगों के निदान के लिए सामान्य परीक्षणों को सूची में शामिल कर उसका विस्तार किया गया है.

इसमें एनीमिया के लिए यानि ख़ून में लौह तत्व की कमी की जांच, थायराइड के सही ढंग से काम न करने और सिकल सेल एनीमिया के निदानकारी परीक्षण शामिल हैं जो सब-सहारा अफ़्रीका में व्यापक रूप से फैलती है.

 

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