टिकाऊ विकास लक्ष्य हैं भविष्य के मार्गदर्शक - कार्रवाई की पुकार

18 सितम्बर 2020

वैश्विक लक्ष्य उन लाखों-करोड़ों लड़कियों, महिलाओं और युवाओं के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं जो शिक्षा पाने, समानता हासिल करने और साँस लेने के लिये स्वच्छ हवा के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र शान्ति दूत मलाला युसूफ़ज़ई ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सदस्य देशों को ध्यान दिलाया कि टिकाऊ विकास लक्ष्य के एजेण्डे पर हस्ताक्षरों के बावजूद कार्य अधूरा है जिसे जल्द पूरा किये जाने की ज़रूरत है.

टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर पहली बार एसडीजी लम्हा (SDG Moment) नामक एक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसका उद्देश्य आने वाले दशक में टिकाऊ विकास के 2030 एजेण्डा को स्फूर्ति प्रदान करना है.

यूएन शान्ति दूत मलाला युसूफ़ज़ई ने इस कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि पिछली बार अपने सम्बोधन के समय वह उच्च शिक्षा के लिये विश्वविद्यालय जाने की तैयारी कर रही थीं और भावी जीवन के लिये आशावाद से ओतप्रोत थीं.

“मेरा स्नातक (ग्रेजुएशन) जून में एक उठापठक भरी दुनिया के बीच पूरा हुआ – इसके बारे में हममें से बहुत से लोगों ने नहीं सोचा होगा.”

युवा नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला ने ध्यान दिलाया कि सदस्य देशों ने टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर सहमति तो बनाई है लेकिन उनके लिये काम जारी नहीं रखा है.

उन्होंने कहा कि कोविड-19 से इन सामूहिक लक्ष्यों की प्राप्ति में झटका ज़रूर लगा है लेकिन इसे काम नहीं करना का एक बहाना नहीं बनाया जा सकता.

यूएन शान्ति दूत ने स्पष्ट किया कि विश्व को आगे बढ़ाने के लिये पुराने ढर्रे पर नहीं लौटा जा सकता.

“हर बच्चे को 12 वर्ष के लिये गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करने के वास्ते निवेश करने का संकल्प आप कब लेंगे? आप कब शान्ति को प्राथमिकता और शरणार्थियों को संरक्षण देंगे? कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लिये आप नीतियाँ कब पारित करेंगे?”

मलाला युसूफ़ज़ई ने अपने सम्बोधन में नए, टिकाऊ, स्वस्थ, शिक्षित और समानता भरे युग के लिये मानक स्थापित किये जाने का आहवान किया है.

ऊँची उड़ान का संकल्प

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि वर्ष 2030 तक टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये कार्रवाई के दशक की दिशा में आगे बढ़ते हुए सभी के लिये गरिमामय और अवसरों से भरपूर, स्वस्थ दुनिया का निर्माण करना होगा.  

“मौजूदा संकट से आगे देखते हुए हमें अपनी नज़रें ऊपर उठानी होंगी... ताकि हम दिखा सकें कि कायापलट कर देने वाले बदलाव सम्भव हैं और अभी हो रहे हैं.”

महासचिव गुटेरेश ने माना कि कोविड-19 महामारी ने दुनिया को हिला कर रख दिया है – व्यापक पैमाने पर आर्थिक और सामाजिक जीवन प्रभावित हुआ, भुखमरी बढ़ रही है, क़र्ज़ बढ़ रहा है, वित्तीय संसाधन सिमट रहे हैं और बाल शिक्षा पर संकट है.

“हमें एक ऐसे मार्ग की ज़रूरत है जो सभी के लिये स्वास्थ्य लाए, अर्थव्यवस्थाओं को उबारे, समाज के हाशिये से लोगों की वापसी कराए और दीर्घकालीन सहनक्षमता, टिकाऊशीलता, अवसर व शान्ति का निर्माण करे.”

यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि टिकाऊ विकास के 2030 एजेण्डा के ज़रिये जिन चुनौतियों को दूर करने का प्रयास किया जाना था, कोविड-19 ने उन्हें और पैना किया है, जैसेकि ग़रीबी के अन्त और किसी को पीछे ना छूटने देना.

यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि अब देर करने के लिये समय नहीं है और इसलिये विकासशील देशों द्वारा झेली जा रही तात्कालिक, मध्यम-कालिक और दीर्घ-कालिक चुनौतियों से निपटना होगा.

साथ ही कोविड-19 से उबरने की योजनाओं को समावेशी और हरित बनाना होगा ताकि न्यायसंगत व टिकाऊ अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण, सुदृढ़ पुनर्बहाली के लिये करदाताओं के धन का इस्तेमाल, जीवाश्म ईंधन पर मिलने वाली सब्सिडी पर रोक और महिलाओं को बेहतर पुनर्निर्माण के प्रयासों के केन्द्र में रखा जा सके.

उन्होंने कहा कि दुनिया को महत्वाकाँक्षा और एकजुटता की आवश्यकता है ताकि कोविड-19 के ख़िलाफ़ असरदार वैक्सीन व उपचार के लिये अरबों डॉलर की रक़म की व्यवस्था की जा सके, कार्बन उत्सर्जन में कटौती की जा सके, जैवविविधिता संरक्षण और लैंगिक समानता सुनिश्चित किये जा सकें.

UN Photo/Eskinder Debebe
यूएन महासचिव टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए.

यूएन महासभा के नए अध्यक्ष वोल्कान बोज़किर ने अपने सम्बोधन में कहा कि दुनिया को सहयोग और सम्वाद की आवश्यकता है, और कोविड-19 महामारी के कारण जैसे हालात पैदा हुए हैं, वैसी चुनौतियों से निपटने के लिये यूएन की स्थापना हुई थी.

“कोविड-19 के फैलाव को रोकना और टिकाऊ विकास लक्ष्यों की दिशा में फिर प्रगति हासिल करना हमारी सामूहिक प्राथमिकता होनी चाहिये.”

उन्होंने माना कि यह आसान कार्य नहीं है लेकिन एसडीजी लक्ष्य स्वयँ बेहतर ढँग से पुनर्बहाली का वो ब्लूप्रिण्ट हैं जिसकी आज ज़रूरत है.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के प्रमुख एखिम श्टाइनर ने कहा कि 30 वर्षों में यह पहली बार है जब मानव विकास की दिशा में प्रगति पलट गई है और इसलिये प्रभावित समुदायों तक मदद पहुँचाने के लिये सामाजिक संरक्षा समाधान बेहद अहम हैं.

 

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