उत्तर मैसेडोनिया गणराज्य पर समझौता राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत

13 फ़रवरी 2019

संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में एथेंस और स्कोप्ये में नाम बदलने पर हुए समझौते के प्रभावी होने को ऐतिहासिक करार देते हुए महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि सभी सदस्य देशों को इसका समर्थन करना चाहिए. पूर्व यूगोस्लाविया के मैसेडोनिया गणराज्य को अब उत्तर मैसेडोनिया गणराज्य के नाम से जाना जाएगा. इसके साथ ही दशकों से चले आ रहे विवाद का निपटारा हो गया है. 

इस संबंध में हुआ प्रेस्पा समझौता मंगलवार को अमल में आ गया. महासचिव गुटेरेश ने एक बयान जारी कर इस संबंध में आधिकारिक सूचना मिलने की पुष्टि की है.

यूएन महासचिव ने दोनों पक्षों के प्रधानमंत्रियों, एलेक्सिस त्सिप्रास और ज़ोरान ज़ाएव को बधाई देते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने आगे बढ़ने की दूरदृष्टि दिखाते हुए बाल्कन क्षेत्र में सुलह कायम करने के प्रति संकल्प का प्रदर्शन किया है. 

प्रेस्पा समझौते पर हस्ताक्षर दोनों देशों ने पिछले साल 17 जून को किए थे और हाल ही में उनकी संसद में इस पर मुहर लगा दी गई. "ये समझौता दर्शाता है कि बेहद मुश्किल नज़र आने वाले मुद्दों को भी संवाद और राजनीतिक इच्छाशक्ति के ज़रिए सुलझाया जा सकता है."

नाम पर विवाद सुलझाने के लिए बातचीत 1993 में शुरू हुई थी और 1999 से संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष दूत मैथ्यू निमेत्ज़ इसमें अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं. इस मसले पर कूटनीतिक तनातनी 1991 में तब बढ़ी जब पूर्व यूगोस्लाविया के मैसेडोनिया गणराज्य ने यूगोस्लाविया से अपनी आज़ादी की घोषणा करते  हुए देश का नया नाम मैसेडोनिया रखने की इच्छा प्रकट की, 

लेकिन ग्रीस ने अपने पड़ोसी देश के नए नाम को मान्यता देने से मना कर दिया क्योंकि उसके उत्तरी प्रांत का नाम भी मैसेडोनिया है. ग्रीस ने दावा किया कि सिर्फ़ उसी के प्रांत को मैसेडोनिया नाम से बुलाया जाना चाहिए. साथ ही चिंता जताई कि पूर्व यूगोस्लाविया का गणराज्य अगर इस नाम का इस्तेमाल करता है तो यह ग्रीस की संप्रभुता को चुनौती देना होगा.  

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि वह सबसे लंबे समय तक संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत के रूप में काम करने वाले मैथ्यू निमेत्ज़ के भी शुक्रगुज़ार हैं जिन्हेोंने इस समझौते के लिए अविचल वचनबद्धता और समर्पण का परिचय दिया है.

 

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