यमन की पीड़ा को बयाँ करते चेहरे

सात वर्षीय अब्दुल्लाह, यमन में पिछले पाँच वर्षों से चल रहे हिंसक संघर्ष के कारण विस्थापित के तौर पर रहने के लिये मजबूर है.
© UNOCHA/Giles Clarke
सात वर्षीय अब्दुल्लाह, यमन में पिछले पाँच वर्षों से चल रहे हिंसक संघर्ष के कारण विस्थापित के तौर पर रहने के लिये मजबूर है.
दस वर्षीय हेन्द, भविष्य में एक डॉक्टर बनना चाहती है.
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11 वर्षीय हाला, एक विस्थापित परिवार में, पाँच बहनों में सबसे बड़ी हैं.
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सात वर्षीय अन्गम, अपने परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण स्कूल जाने में सक्षम नहीं हैं.
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यमन के हुदायदाह शहर में 35 वर्षीय कमाल का घर बमबारी की चपेट में आ गया, जिसमें उनके पिता की मौत हो गई.
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45 वर्षीय फ़ातिमा को तीन वर्ष पहले अपना घर छोड़कर, सुरक्षित स्थान की शरण लेनी पड़ी.
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फ़ातही अब्बास, बुरी तरह चोटिल होने के बाद अब कामकाज करने में सक्षम नहीं हैं.
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