यूनिसेफ़

यूरी प्राइमरी स्कूल, डेल्टा स्टेट, नाइजीरिया में पढ़ने वाले स्कूली बच्चे.
© UNICEF/Apochi Owoicho

यूनीसेफ़: अत्यन्त निर्धन शिक्षार्थियों को सार्वजनिक शिक्षा ख़र्च का न्यूनतम लाभ

यूनीसेफ़ की एक नई रिपोर्ट के अनुसार देशों की सरकारें, उन बच्चों में पर्याप्त संसाधन निवेश नहीं कर रही हैं जिन्हें शिक्षा की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है. निर्धन बच्चों का सार्वजनिक शिक्षा ख़र्च अधिक प्राप्त करने वाली उच्च शिक्षा में भी, निर्धन बच्चों का प्रतिनिधित्व कम है. आँकड़ों से पता चला है कि सबसे ग़रीब शिक्षार्थियों की तुलना में, सबसे धनी परिवारों के बच्चों को सार्वजनिक शिक्षा निधि की राशि का छह गुना अधिक लाभ मिलता है. इस रिपोर्ट में प्रत्येक शिक्षार्थी तक शिक्षा संसाधनों की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई का आहवान किया गया है. (वीडियो फ़ीचर)

दक्षिण सूडान के जुबा में अल सब्बाह चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में अफरा, उसकी मां थेरेसी द्वारा आयोजित कुपोषण के लिए जाँच की जा रही है
© UNICEF/Ilvy Njiokiktjien

वैश्विक खाद्य संकट के कारण लाखों बच्चों का जीवन ख़तरे में

संयुक्त राष्ट्र की पाँच एजेंसियों ने 15 देशों में रह रहे लाखों कुपोषित बच्चों की रक्षा की ख़ातिर, तत्काल कारवाई की पुकार लगाई है. ये बच्चे अभूतपूर्व खाद्य और पोषण संकट का सामना कर रहे हैं.

इथियोपिया के सोमाली क्षेत्र में, 6 बच्चों की माँ, इस महिला को आगामी कुछ महीनों में सूखे के कारण, अपने पशुधन को खो देने का डर है.
© UNICEF/Mulugaeta Ayene

अफ़्रीका सूखा: यूनीसेफ़ की चेतावनी - कुछ बच्चे 'विनाश से केवल एक बीमारी दूर'

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष - UNICEF ने मंगलवार को चेतावनी दी कि हॉर्न ऑफ अफ्ऱीका और विशाल साहेल क्षेत्र में तत्काल हस्तक्षेप और समर्थन के अभाव में "भारी संख्या में बच्चों की मौत हो सकती है". पिछले पाँच महीनों में, इथियोपिया, केनया और सोमालिया में सुरक्षित पानी तक विश्वसनीय पहुँच के अभाव का सामना करने वाले लोगों की संख्या, 90 लाख से बढ़कर एक करोड़ 62 लाख हो गई है.

नए साल के पहले दिन तीन लाख 92 हज़ार बच्चों का जन्म होगा.
©UNICEF/Ilvy Njiokiktjien

नए साल के पहले दिन जन्मेंगे क़रीब चार लाख बच्चे

वैसे तो जनवरी का पहला दिन नए साल का आग़ाज़ है, इसी दिन दुनिया भर में लगभग तीन लाख 92 हज़ार बच्चे अपने जीवन की शुरुआत करेंगे.  संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने विश्व नेताओं से स्वास्थ्य सेवाओं और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण में निवेश की पुकार लगाई है ताकि हर नवजात शिशु को बचाया जा सके.

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के उत्तरी तरफ़ स्थित बाग़ीचे में यूनीसेफ़ का बैगपैक अभियान, जो 2018 में युद्धों में मारे गए बच्चों की गंभीर स्थिति को दर्शाता है. (8 सितंबर 2019)
© UNICEF/Farber/Getty

युद्धों में मारे गए बच्चों की याद में यूनीसेफ़ की संवेदनशील पहल

ऐसे में जबकि दुनिया भर के कई हिस्सों में बच्चों ने वार्षिक छुट्टियों के बाद फिर से स्कूल जाना शुरू कर दिया है तो संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) ने संघर्षरत इलाक़ों में रहने वाले बच्चों की दयनीय स्थिति को दर्शाने और बेहतर सुरक्षा की पुकार लगाते हुए एक अनोखा अभियान शुरू किया.

तीन दशकों से चले आ रहे संघर्ष से अफ़ग़ानिस्तान की शिक्षा प्रणाली तबाह हो गई है.
UNICEF/UN0212108/Mohammadi

अफ़ग़ानिस्तान: स्कूलों पर हमलों में तीन गुना बढ़ोत्तरी बनी चिंता का कारण

अफ़ग़ानिस्तान में स्कूलों पर किए जाने वाले हमलों में एक साल के भीतर तीन गुना बढ़ोत्तरी देखने को मिली है जिस पर चिंता ज़ाहिर करते हुए संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का अनुरोध किया है. यूनिसेफ़ की यह अपील ऐसे समय में जारी की गई है जब स्पेन के मयोरका शहर में सुरक्षित स्कूलों पर तीसरा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हो रहा है.

छह वर्षीय मुस्तफ़ा बग़दाद के औद्योगिक इलाक़े में अपने पिता के साथ काम करता है.
Photo: UNICEF/Wathiq Khuzaie

दो तिहाई बच्चे कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित

दुनिया में हर 10 में से छह बच्चों को सामाजिक सुरक्षा प्राप्त नहीं है जिससे उनके ग़रीबी का शिकार होने की आशंका बढ़ जाती है. संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक नई रिपोर्ट में सचेत किया है कि कुछ सरकारें आर्थिक अनिश्चितता के चलते लाभकारी योजनाओं में कटौती कर रही हैं जिससे स्थिति और ख़राब हो सकती है.

पेरु के एक अस्पताल में अपने नवजात शिशु को गोद में संभालती एक महिला.
UNICEF/Ilvy Njiokiktjien

साल के पहले दिन पैदा होंगे तीन लाख से ज़्यादा बच्चे: यूनिसेफ़

​संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ़) के एक अनुमान के अनुसार साल 2019 के पहले दिन दुनिया में 395,072 बच्चों को जन्म होगा. इनमें से एक करीब एक-चौथाई बच्चे दक्षिण एशिया में पैदा होंगे. पैदा होने के तुरंत बाद  होने वाली मौतें चिंता का कारण बनी हुई हैं जिसके प्रति यूनिसेफ़ ने आगाह किया है.