यूएनडीपी

यूएनडीपी के 21वीं सदी कौशल विकास कार्यक्रम में करियर मार्गदर्शन, परामर्श और नियुक्ति के बाद सहायता भी दी जाती है.
UNDP India

भारत: महिलाओं के लिये ‘21वीं सदी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम’

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP), भारत के पश्चिमी प्रदेश गुजरात में एक ऐसे कार्यक्रम को समर्थन दे रहा है, जिसके माध्यम से, ऐसे युवाओं, ख़ासतौर महिलाओं का कौशल विकास करके उन्हें भविष्य के लिये तैयार किया जा रहा है, जिन्हें रोज़गार की तलाश है.

प्रवाल भित्तियों में, किसी भी वैश्विक पारिस्थितिकी की सर्वोच्च जैव विविधता होती है.
Ocean Image Bank/Brook Peterson

अभूतपूर्व मौसमी व्यवधानों से उपजी चिन्ताओं के बीच, मिस्र में अहम जलवायु सम्मेलन की तैयारी

वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (COP27) के मेज़बान देश, मिस्र में, क्षेत्रीय प्रशासन देश की पर्यावरणीय साख में सुधार करने और कम कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव को गति देने पर केन्द्रित योजनाओं को तेज़ी से लागू करने में जुटा है. यह सम्मेलन, मिस्र के शहर, शर्म अल-शेख में 4 नवम्बर को आरम्भ होगा.

स्वास्थ्यकर्मी, बेबी दाभोधिया, पूरे दिन कोविड-19 के ख़िलाफ़ लोगों का टीकाकरण करने में व्यस्त रहती हैं.
© UNICEF/Sandeep Biswas

कोविड-19: भारत में दो अरब टीके दिये जाने का आँकड़ा पार

भारत में संयुक्त राष्ट्र ने, देश में कोविड-19 टीकाकरण मुहिम के तहत, लोगों को दो अरब वैक्सीन ख़ुराकें दिये जाने का आँकड़ा पार होने पर बधाई दी है. भारत में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेण्ट कोऑर्डिनेटर, शॉम्बी शार्प ने कोविड-19 के विरुद्ध लड़ाई में इसे एक अहम पड़ाव मानते हुए बड़ी कामयाबी क़रार दिया है. 

भूमि उपयोग में तेज़ बदलाव से ऊँचाई पर स्थित कई आर्द्रभूमियों को ख़तरा पैदा हो गया है.
UNDP India/Siddharth Nair

"आर्द्रभूमि हमें सभी कुछ देती है" - महत्वपूर्ण पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा की मुहिम

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP), भारत सरकार के साथ मिलकर ‘SECURE Himalaya’ नामक एक पहल पर काम कर रहा है, जिसके तहत पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिये बेहद अहम, ऊँचे इलाक़ों में स्थित आर्द्रभूमि के संरक्षण हेतु, हिमालयी क्षेत्रों के स्थानीय समुदायों को प्रशिक्षण दिया जाता है. 

भारत के ओडिशा राज्य में प्राकृतिक झरने से बहता पानी.
UNDP India

‘हज़ार झरनों वाली पहल’ - ओडिशा के स्थानीय समुदायों के लिये वरदान

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और भारत सरकार ने देश के पूर्वी प्रदेश ओडिशा में ‘1000 स्प्रिंग्स पहल’ नामक एक योजना शुरू की है, जिसके तहत स्थानीय झरनों का संरक्षण करके, जल की समस्या वाले दुर्गम पहाड़ी इलाक़ों में स्थानीय समुदायों को चौबीसों घण्टे पीने का स्वच्छ पानी मिल रहा है.

लीज़ा प्लास्टिक कचरा संग्रहण के लिये वाहन संचालक का काम करती हैं.
UNDP India

भारत: कोविड-19 की जवाबी कार्रवाई में 'थर्ड जैण्डर' समावेश

कोविड-19 के प्रसार से ट्रान्सजैण्डर व्यक्तियों को आजीविका के संकट का सामना करना पड़ा. समारोहों व आवाजाही पर प्रतिबन्धों के कारण, 'थर्ड जैण्डर' लोगों को भुखमरी का सामना करना पड़ा. ऐसे में, भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने प्लास्टिक कचरा प्रबन्धन कार्यक्रम में ट्रान्सजैण्डरों को शामिल करके, इस संकट के समय में उन्हें जीवन की एक नई राह दिखाई.

कृष्णादत्तपुर गाँव में महिलाओं के नेतृत्व वाला किसान उत्पादक समूह.
UNDP India

भारत: खेत से बाज़ार तक, महिला किसानों का नेतृत्व

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने वर्ष 2020 में, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के साथ साझेदारी में, कृषक परिवारों की महिलाओं को अपनी फ़सलें, खेत से बाज़ार तक पहुँचाने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिये, एक परियोजना शुरू की थी. परिणामस्वरूप, ये ग्रामीण महिलाएँ, आज न केवल रूढ़ियाँ तोड़कर कृषि आपूर्ति श्रृँखला में बढ़-चढ़कर आगे आई हैं, बल्कि इससे उनकी आमदनी भी बढ़ी है.

नागालैण्ड के एक स्कूल में कोविड के टीके की पहली ख़ुराक़ प्राप्त करने के बाद, 15 साल की यिमा ने बताया कि वो सुरक्षित महसूस कर रही है.
© UNICEF/Jamir

भारत: कोविड-19 टीकाकरण अभियान के लिये यूएन सहयोग

संयुक्त राष्ट्र ने भारत में कोविड-19 वैक्सीन के टीकाकरण अभियान के लिये हरसम्भव सहायता सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है. भारत सरकार का कहना है कि 30 जनवरी, 2022 को देश की 75 प्रतिशत वयस्क आबादी को कोविड-19 टीकों की दो ख़ुराक़ें दिये जाने, यानि उनके पूर्ण टीकाकरण का कार्य पूरा कर लिया गया है. यूएन एजेंसियों और भारत सरकार के साझा प्रयासों से जुड़ी अहम जानकारी...

भारत के गुवाहाटी शहर में एक स्वास्थ्यकर्मी ऑक्सीजन सिलेण्डर ले जाता हुआ.
© UNICEF/Biju Boro

भारत में ऑक्सीजन संकट के दीर्घकालीन हल की मुहिम

भारत में, 2021 के दौरान, अस्पतालों में भर्ती हुए कोविड-19 रोगियों की ख़ातिर ऑक्सीजन खोजने की पुरज़ोर कोशिश कर रहे रिश्तेदारों के मार्मिक दृश्यों ने, दुनिया को इस गम्भीर व घातक बीमारी की भयावहता से रूबरू कराया. लेकिन यह पहली बार नहीं था जब देश के अस्पतालों ने इस जीवन-रक्षक गैस की कमी की समस्या का सामना किया हो. तो सवाल यह उठता है कि अगला बड़ा स्वास्थ्य संकट आने पर, क्या पर्याप्त आपूर्ति हो सकेगी.

अफ़ग़ानिस्तान के परवान प्रान्त में एक स्वास्थ्यकर्मी एक बच्चे की स्वास्थ्य जाँच करते हुए. (नवम्बर 2020)
© WFP/Massoud Hossaini

अफ़ग़ान स्वास्थ्यकर्मियों को वेतन मिलने से भरोसे का पैग़ाम

अफ़ग़ानिस्तान में इस वर्ष जब अगस्त के मध्य में तालेबान में सत्ता पर नियंत्रण कर लिया था तो देश के लगभग केन्द्र में स्थित, 35 हज़ार की आबादी वाले शहर मैदान शर के मुख्य अस्पताल के ज़्यादातर कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला था. दवाइयों और खाद्य सामग्री जैसी ज़रूरी चीज़ों की भी कमी थी और वो बहुत जल्दी से ख़त्म होने के कगार पर थीं.