वन

जैव विविधता के संरक्षण की ख़ातिर, अल्पसंख्यकों के अधिकारों की अनदेखी ना हो

संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ मानवाधिकार विशेषज्ञ डेविड बोयड ने गुरूवार को कहा है कि पृथ्वी ग्रह की ज़मीन पर जैव विविधता और पानी की बचत करने के लिये चलाए जाने वाले वैश्विक कार्यक्रम को, दुनिया के निर्बल लोगों के लिये जोखिम उत्पन्न करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती है.

प्रकृति पर तीन बड़े ख़तरे - एक अरब हैक्टेयर क्षरित भूमि की बहाली पर बल

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन, प्रकृति क्षरण और प्रदूषण – तीन बड़े ख़तरों से निपटने के लिये, अगले एक दशक में चीन के आकार के बराबर क्षेत्र को बहाल किये जाने की आवश्यकता है. खाद्य एवँ कृषि संगठन (FAO) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने गुरुवार को एक नई रिपोर्ट जारी करते हुए सचेत किया है कि प्रकृति जितनी मात्रा में संसाधनों को टिकाऊ ढँग से प्रदान कर सकती है, मानवता उसका करीब डेढ़ गुना इस्तेमाल कर रही है.

वनों के लिये 'संभालें या बिगड़ने दें' लम्हा

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि प्राकृतिक दुनिया के साथ हमारे सम्बन्ध बहाल करने के प्रयासों में, वनों की केन्द्रीय भूमिका है. ये बात, उन्होंने सोमवार को, वनों पर संयुक्त राष्ट्र के फ़ोरम में कही.

मानवता, पृथ्वी व समृद्धि के लिये वन संरक्षण ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सरकारों और लोगों का आहवान किया है कि वनों की रक्षा करने और वन समुदायों को समर्थन देने के लिये प्रयास तेज़ किये जाने होंगे. यूएन प्रमुख ने, बुधवार, 3 मार्च, को विश्व वन्यजीवन दिवस (World Wildlife Day) के अवसर पर अपने सन्देश में, वन संसाधनों के अरक्षणीय प्रयोग और वन्यजीवों की तस्करी से उपजते ख़तरों के प्रति भी आगाह किया है.  

प्राकृतिक पर्यावरण को उठाना पड़ता है युद्ध का ख़ामियाज़ा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिकी तन्त्र का बेहतर प्रबन्धन किये जाने का आहवान करते हुए ध्यान दिलाया है कि ऐसा करने से युद्धग्रस्त समाजों में शान्ति स्थापना करने और संकट प्रभावित देशों में टिकाऊ विकास में जान फूँकने का रास्ता निकल सकता है.

वनों की बहाली के लिये प्रयास, यूएन की अग्रणी भूमिका

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवँ कृषि संगठन (FAO) अगले दशक के दौरान भूदृश्य (Landscapes) और वनों को बहाल करने के प्रयास आगे बढ़ाने में एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है. इन प्रयासों के तहत क्षरण का शिकार और वनों से वंचित 35 करोड़ हैक्टेयर भूमि को उबारने पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा – यह क्षेत्र भारत के क्षेत्रफल के आकार से भी बड़ा है. 

वनों की कटाई में कमी, लेकिन चिन्ता बरक़रार

खाद्य एवँ कृषि एजेंसी (FAO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि पिछले तीन दशकों में विश्व भर में 17 करोड़ हैक्टेयर से ज़्यादा क्षेत्र में फैले वन लुप्त हो गए हैं. लेकिन इसी अवधि में वनों की कटाई की रफ़्तार में गिरावट भी दर्ज की गई है. रिपोर्ट में टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने में वनों की अहमियत को रेखांकित करते हुए टिकाऊ वन प्रबन्धन पर भी ज़ोर दिया गया है.  

कृषि में परागण को बढ़ावा देने में वनों का महत्वपूर्ण योगदान

मधुमक्खियों, तितलियों और अन्य जीवों द्वारा परागण क्रिया को बढ़ावा देने में वनों और वृक्षों का अहम योगदान है. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में इन जीवों के पर्यावास क्षरण (Habitat degradation) को रोकने और जैवविविधता की रक्षा करने के लिए तत्काल उपायों की ज़रूरत रेखांकित की गई है. 

सिकुड़ते वनों में जैवविविधता संरक्षण के लिए निडर कार्रवाई की दरकार

वनों की कटाई और भूमि क्षरण की तेज़ होती रफ़्तार बढ़ती चिन्ता का सबब है. शुक्रवार को अन्तरराष्ट्रीय जैवविविधता दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में दुनिया भर के जंगलों में जैवविविधता के संरक्षण के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया गया है.

यूएन का नया वन प्रोजेक्ट जलवायु संकल्पों को पूरा करने में देशों की मदद करेगा

संयुक्त राष्ट्र ने बेहतर वन प्रबंधन पर एक ऐसा नया प्रोजेक्ट तैयार किया है जिसकी मदद से एशिया, अफ्रीका और लातीनी अमेरिका के देशों में जलवायु परिवर्तन का सामना करने में मदद मिलेगी. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफ़एओ) ने ये योजना तैयार की है जिसे सोमवार को जारी किया गया.