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प्राकृतिक पर्यावरण को उठाना पड़ता है युद्ध का ख़ामियाज़ा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिकी तन्त्र का बेहतर प्रबन्धन किये जाने का आहवान करते हुए ध्यान दिलाया है कि ऐसा करने से युद्धग्रस्त समाजों में शान्ति स्थापना करने और संकट प्रभावित देशों में टिकाऊ विकास में जान फूँकने का रास्ता निकल सकता है.

वनों की बहाली के लिये प्रयास, यूएन की अग्रणी भूमिका

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवँ कृषि संगठन (FAO) अगले दशक के दौरान भूदृश्य (Landscapes) और वनों को बहाल करने के प्रयास आगे बढ़ाने में एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है. इन प्रयासों के तहत क्षरण का शिकार और वनों से वंचित 35 करोड़ हैक्टेयर भूमि को उबारने पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा – यह क्षेत्र भारत के क्षेत्रफल के आकार से भी बड़ा है. 

वनों की कटाई में कमी, लेकिन चिन्ता बरक़रार

खाद्य एवँ कृषि एजेंसी (FAO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि पिछले तीन दशकों में विश्व भर में 17 करोड़ हैक्टेयर से ज़्यादा क्षेत्र में फैले वन लुप्त हो गए हैं. लेकिन इसी अवधि में वनों की कटाई की रफ़्तार में गिरावट भी दर्ज की गई है. रिपोर्ट में टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने में वनों की अहमियत को रेखांकित करते हुए टिकाऊ वन प्रबन्धन पर भी ज़ोर दिया गया है.  

कृषि में परागण को बढ़ावा देने में वनों का महत्वपूर्ण योगदान

मधुमक्खियों, तितलियों और अन्य जीवों द्वारा परागण क्रिया को बढ़ावा देने में वनों और वृक्षों का अहम योगदान है. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में इन जीवों के पर्यावास क्षरण (Habitat degradation) को रोकने और जैवविविधता की रक्षा करने के लिए तत्काल उपायों की ज़रूरत रेखांकित की गई है. 

सिकुड़ते वनों में जैवविविधता संरक्षण के लिए निडर कार्रवाई की दरकार

वनों की कटाई और भूमि क्षरण की तेज़ होती रफ़्तार बढ़ती चिन्ता का सबब है. शुक्रवार को अन्तरराष्ट्रीय जैवविविधता दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में दुनिया भर के जंगलों में जैवविविधता के संरक्षण के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया गया है.