वैश्विक अर्थव्यवस्था

विश्व अर्थव्यवस्था गहरी मन्दी में, मगर असर की गम्भीरता कम होने का अनुमान

दुनिया पर विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 की छाया और उसके असर के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था का वर्ष 2020 में गहरी आर्थिक मन्दी के दौर से गुज़रना जारी रहेगा लेकिन यह मन्दी पहले की अपेक्षा थोड़ा कम गम्भीर होने की सम्भावना है. अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने मंगलवार को वैश्विक अर्थव्यवस्था पर जारी अपनी नई रिपोर्ट में यह ताज़ा जानकारी जारी की है. 

कोविड-19: विश्व अर्थव्यवस्था के एक फ़ीसदी तक सिकुड़ने की आशंका

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण विश्व अर्थव्यवस्था इस साल एक फ़ीसदी तक सिकुड़ सकती है. संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग (UNDESA) का एक नया विश्लेषण दर्शाता है कि अगर लोगों की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों पर पाबंदियों की मियाद बढ़ती है और पर्याप्त वित्तीय उपाय नहीं किए गए तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कोरोनावायरस का असर और भी ज़्यादा व्यापक हो सकता है. 

कोविड-19 के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी चपत लगने की आशंका

विश्व भर में कोरोनावायरस (कोविड-19) महामारी का फैलना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए त्रासदीपूर्ण नतीजों का सबब रहा है, लेकिन इसकी एक बड़ी आर्थिक क़ीमत भी चुकानी पड़ सकती है. यूएन की व्यापार और विकास मामलों की एजेंसी (UNCTAD) ने आशंका जताई है कि कोविड-19 की वजह से कुछ देशों को मंदी का सामना करना पड़ेगा और वार्षिक वैश्विक वृद्धि दर 2.5 फ़ीसदी से भी नीचे रहने की आशंका है.

वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्त पड़ती रफ़्तार टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिए ख़तरा

अनसुलझे व्यापारिक तनावों, अंतरराष्ट्रीय नीतिगत अनिश्चितता और कमज़ोर होते व्यापारिक भरोसे के बीच विश्वव्यापी अर्थव्यवस्था व्यापक मंदी का सामना कर रही है. संयुक्त राष्ट्र ‘विश्व आर्थिक स्थिति एवं संभावना’ 2019 की मध्यावधि रिपोर्ट में आशंका ज़ाहिर की गई है कि धीमी पड़ती वैश्विक अर्थव्यवस्था के चलते टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयासों पर संकट मंडरा रहा हैं.

वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार के बावजूद जोख़िम बरक़रार

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के अनुसार 2019 और 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की दर तीन प्रतिशत रहने का अनुमान है. रिपोर्ट दुनिया के कई देशों में मंडराते उन ख़तरों के प्रति भी आगाह करती है जो आर्थिक गतिविधियों को अस्त व्यस्त करने के साथ साथ दीर्घकालीन विकास की संभावनाओं को भी क्षति पहुंचा सकते हैं.