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विस्फोटक हथियार

यूक्रेन के चरेनिहीफ़ में एक लड़का बमबारी में ध्वस्त हो चुके अपने घर के नज़दीक से गुज़र रहा है.
© UNICEF/Ashley Gilbertson

हिंसक टकराव में विस्फोटक हथियारों से आम लोगों की रक्षा: पाँच अहम बातें

हिंसक संघर्ष के दौरान विस्फोटक हथियारों के प्रयोग के कारण हताहत होने वालों में औसतन 90 फ़ीसदी, रिहायशी इलाक़ों में रहने वाले आम नागरिक होते हैं. इन हथियारों के इस्तेमाल से शहरों, क़स्बों और गाँवों में मानव कल्याण को होने वाली क्षति से बचाव के इरादे से जताई गई राजनैतिक प्रतिबद्धता, लड़ाई में फँसे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा क़दम हो सकता है.

यमन के अल धलए में विस्थापितों के लिये बनाए गए शिविर में एक परिवार.
YPN for UNOCHA

रिहायशी इलाक़ों में विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल, आमजन की रक्षा पर बल

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शहरों व नगरों में आबादी वाले इलाक़ों में विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल से आमजन की रक्षा के इरादे से, एक राजनैतिक घोषणापत्र तैयार करने की दिशा में हो रहे प्रयासों का स्वागत किया है. स्विट्ज़रलैण्ड के जिनीवा शहर में अगले सप्ताह इस विषय पर 6 से 8 अप्रैल तक बैठक आयोजित की जाएगी. 

 

फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा में, इसराइल के हवाई हमलों के बाद ध्वसित हुई इमारतों का दृश्य
© UNOCHA/Mohammad Libed

नगरीय इलाक़ों में हिंसक संघर्षों से, 5 करोड़ से भी ज़्यादा प्रभावित

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शहरी इलाक़ों में हिंसक संघर्ष से आमजन व नागरिक प्रतिष्ठानों को होने वाली त्रासदीपूर्ण हानि की रोकथाम के लिये, हरसम्भव उपाय किये जाने का आग्रह किया है. यूएन के मुताबिक़, आबादी वाले इलाक़ों में भारी विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल से, हर संसाधन और बुनियादी ढाँचे को क्षति पहुँचती है और आम नागरिक हताहत होते हैं.