टिकाऊ विकास लक्ष्य

महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहिष्णुता की पुकार

महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहिष्णुता के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार को अपने संदेश में कहा कि जननांग विकृति मानवाधिकार हनन का एक ऐसा घिनौना रूप है जिससे दुनिया भर में लड़कियां और महिलाएं पीड़ित हैं.

टिकाऊ विकास लक्ष्यों के रास्ते में बाधाओं से जल्द निपटना ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशलेट ने कहा है कि अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करने और उन्हें बढ़ावा देने में  कईं देश विफल हो रहे हैं. 2016 में सभी देशों ने बेहतरी के प्रयास का संकल्प लिया था लेकिन अभी प्रगति बहुत धीमी है जिसे तेज़ किए जाने की आवश्यकता है.

'वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए तेज़ गति से प्रयास करने होंगे'

संयुक्त राष्ट्र महासभा में सदस्य देशों को अपने संबोधन में महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने  21वीं शताब्दी की तीन मुख्य चुनौतियों - जलवायु परिवर्तन, टिकाऊ विकास, और नई तकनीक का प्रसार - से निपटने के लिए नई ऊर्जा के साथ प्रयास करने पर बल देते हुए कहा कि यूएन बेहतर तरीक़ों से लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है.

बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने पर ही आधारित है यूएन का काम

संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष मारिया फ़र्नान्डो एस्पिनोसा ने कहा है कि दुनिया में बहुपक्षीय और क़ानून आधारित व्यवस्था तभी मज़बूत बन सकती है जब यूएन में नई ऊर्जा का संचार किया जाए. सदस्य देशों को अपनी प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कि यही उनकी पहली प्राथमिकता है.

बच्चों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने से 'दूर है' दुनिया

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशलेट ने कहा है कि कुछ सदस्य देश बच्चों को बेहतर भविष्य देने में अब भी पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं. ऐसे देशों में बच्चों की समय से पहले मौतें हो रही हैं या फिर वे ग़रीबी का शिकार हो रहे हैं. 

टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर भारत का आश्वासन

भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि उनका देश टिकाऊ विकास लक्ष्य 2030 तक हासिल करने के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है. शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र को सम्बोधित करते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत समय से पहले ही ये लक्ष्य हासिल कर लेगा और संयुक्त राष्ट्र को निराश नहीं करेगा.

बहुपक्षवाद का बोलबाला

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें सत्र के दूसरे दिन विभिन्न वक्ताओं ने व्यापार से लेकर जलवायु परिवर्तन तक और विकास से लेकर बीमारियों का मुक़ाबला करने के मुद्दों का जिक्र करने के साथ साथ Multilateralism यानी बहुपक्षवाद पर भी ख़ास ज़ोर दिया.