टीकाकरण

बेहतर टीकाकरण और निगरानी से पोलियो पर कसी लगाम

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि पिछले दो वर्षों के दौरान तीन अफ़्रीकी देशों में पोलियो के नए मामले सामने आने के बाद वहां स्थिति पर क़ाबू पा लिया गया है जिससे इन देशों को फिर पोलियो मुक्त होने का दर्जा प्राप्त हो गया है. यूएन एजेंसी ने उम्मीद जताई है कि अब अफ़्रीका के अन्य क्षेत्रों में पोलियो की रोकथाम की जा सकेगी.

ख़सरा के बढ़ते मामलों से बढ़ती चिंता

विश्व भर में ख़सरा के कारण वर्ष 2018 में एक लाख 40 हज़ार से ज़्यादा मौतें हुई हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आशंका जताई है कि 2019 में इस बीमारी से होने वाली मौतों और संक्रमण के मामले पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक हो सकते हैं. यूएन एजेंसी के मुताबिक़ विश्व की जनसंख्या में वैक्सीन कवरेज 95 फ़ीसदी से कम रहने पर बीमारी के व्यापक रूप से फैलने का जोखिम बना रहेगा.  

किसी भी अन्य बीमारी की तुलना में न्यूमोनिया है सबसे ज़्यादा घातक

न्यूमोनिया एक ऐसी बीमारी है जिसकी आसानी से रोकथाम की जा सकती है. इसके बावजूद विश्व में किसी अन्य बीमारी की तुलना में बच्चों की सबसे ज़्यादा मौतें इसी बीमारी से हो रही हैं – हर 39 सेकेंड में एक मौत. संयुक्त राष्ट्र और साझेदार संगठनों ने मंगलवार को ‘विश्व न्यूमोनिया दिवस’ पर चेतावनी जारी की है कि इन सर्वविदित तथ्यों के बावजूद बच्चों के जीवन की रक्षा के लिए पर्याप्त धनराशि का अभाव है.

पोलियो को जड़ से मिटाने के बेहद क़रीब पहुंची दुनिया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने घातक पोलियो बीमारी के तीन में दो प्रकार के वायरस के उन्मूलन को मानवता के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि क़रार दिया है. गुरुवार, 24 अक्टूबर, को विश्व पोलियो दिवस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक समूह ने बीमारी के टाइप-3 वायरस (WPV3) के पूर्ण उन्मूलन की पुष्टि की है.

वैक्सीन में भरोसा बहाल करने के लिए फ़ेसबुक की नई पहल

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘फ़ेसबुक’ की उस पहल का स्वागत किया है जिसके ज़रिए वैक्सीन से जुड़ी भ्रांतियों और ग़लत जानकारियों के बजाय तथ्य आधारिक सूचना उपलब्ध कराई जाएगी. इसके तहत फ़ेसबुक सर्च परिणामों, ग्रुप, पेज और फॉरम पर सही जानकारी तक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी.

इबोला संक्रमण के लगातार फैलने से सुरक्षा परिषद चिंतित

कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला बीमारी के नए मामले लगातार सामने आने पर शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गहरी चिंता ज़ाहिर की है. सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों ने व्यापक रूप से बीमारी से निपटने के लिए समन्वित और तत्काल प्रयासों पर ज़ोर देते हुए कहा है कि अगर इस पर क़ाबू नहीं पाया गया तो पड़ोसी देशों में संक्रमण फैलने के गंभीर मानवीय नतीजे होंगे जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर भी प्रभाव पड़ेगा.

इबोला बीमारी से प्रभावी ढंग से निपटने पर चर्चा

कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला बीमारी के नए मामले सामने आने पर चिंताएं बढ़ रही हैं. अगस्त 2018 में नए सिरे से बीमारी फैलने के बाद से अब तक 1,650 लोगों की मौत हो चुकी है और हर दिन लगभग 12 नए मामलों का पता चल रहे हैं. जिनीवा में सोमवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में सरकार के साथ मिलकर इस घातक बीमारी पर क़ाबू पाने के प्रयासों पर चर्चा हुई.

टीकाकरण से तैयार हो सकता है - ख़सरा जैसे रोग के प्रकोप से ‘प्रतिरक्षा का कवच’

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) ने बुधवार को कहा कि वर्ष 2010 और 2017 के बीच औसतन दो करोड़ 11 लाख करोड़ बच्चों को ख़सरा का पहला टीका नहीं लगा. संगठन ने इस टीके का महत्व बताते हुए कहा कि इससे ख़सरा जैसे रोग से ‘प्रतिरक्षा का कवच’ तैयार हो सकता है. 

ख़सरा के मामले एक साल में हुए दोगुना

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि दुनिया भर में ख़सरा के मामलों में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है जो चिंता का कारण है. शुरुआती आंकड़े दिखाते हैं कि 2017 की तुलना में 2018 में ख़सरा के दोगुने मामले सामने आए हैं. इनसे निपटने के लिए टीकाकरण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया जा रहा है.