तपेदिक

भारत में एक डॉक्टर अपने मरीज़ के एक्स-रे की जाँच कर रहा है, ताकि टीबी का पता लगाया जा सके.
© ILO/Vijay Kuty

टीबी के कारण प्रतिदिन चार हज़ार से अधिक मौतें, संसाधनों में निवेश की पुकार  

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने तपेदिक (टीबी) के विरुद्ध लड़ाई में दर्ज प्रगति की दिशा उलटने पर चिन्ता जताते हुए, संसाधन, समर्थन, देखभाल और जानकारी सुनिश्चित करने के लिये तत्काल निवेश की पुकार लगाई है. यूएन एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2000 के बाद से अब तक साढ़े छह करोड़ से अधिक ज़िन्दगियों की रक्षा करने में मदद मिली है, मगर कोविड-19 महामारी से उपजे व्यवधान के कारण जोखिम पैदा हो गया है. 

भारत में टीबी से पीड़ित लोगों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है.
ILO Photo/Vijay Kutty

कोविड-19 के कारण, टीबी से होने वाली मौतों में, एक दशक में पहली बार वृद्धि

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण तपेदिक (टीबी) के ख़िलाफ़ लड़ाई में, वर्षों से दर्ज की जा रही प्रगति को एक बड़ा झटका लगा है. एक दशक से ज़्यादा समय में पहली बार टीबी से होने वाली मौतों की संख्या में वृद्धि हुई है. 

भारत में एक डॉक्टर फेफड़ों में संक्रमण की शिनाख़्त के लिये मरीज़ की छाती के एक्सरे की जाँच कर रहा है.
© UNICEF/Vinay Panjwani

WHO: टीबी के ख़िलाफ़ लड़ाई में प्रगति पर ख़तरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि तपेदिक (टीबी) बीमारी के ख़िलाफ़ वैश्विक लड़ाई में प्रगति को बरक़रार रखने के लिये वित्तीय संसाधनों और कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने बुधवार को अपनी नई रिपोर्ट के साथ एक चेतावनी जारी करते हुए आगाह किया है कि समुचित उपायों के अभाव में टीबी की रोकथाम व उपचार के लिये निर्धारित लक्ष्यों को पाने में विफलता हाथ लगने की आशंका है.  

जिबूती में टीबी से संक्रमित एक सोमाली महिला अपने एक्स-रे के साथ.
UNDP/Aurélia Rusek

विश्व तपेदिक दिवस: टीबी पर कार्रवाई का समय 'यही है'

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंगलवार, 24 मार्च, को 'विश्व तपेदिक दिवस' पर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं जिनका लक्ष्य टीबी संक्रमितों को बीमार होने से बचाने के लिए रोकथाम व इलाज जल्द से जल्द सुनिश्चित करना है. टीबी दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारी है और हर दिन इसके कारण चार हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत होती है.     

तुवालु में टीबी से पीड़ित एक महिला का घर पर इलाज किया जा रहा है.
UNDP Tuvalu/Aurélia Rusek

टीबी संक्रमण में कमी, मगर बीमारी का विकराल रूप बरक़रार

संयुक्त राष्ट्र विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि वर्ष 2018 में तपेदिक (टीबी) बीमारी के कारण 15 लाख लोगों की मौत हुई जो दर्शाता है कि इस बीमारी से निपटना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. यूएन एजेंसी ने अपनी नई रिपोर्ट में इस बीमारी के उन्मूलन के लिए ज़्यादा संसाधन निवेश किए जाने और राजनैतिक समर्थन की आवश्यकता को रेखांकित किया है.

पाकिस्तान में टीबी से पीड़ित एक महिला को बीमारी का समय से पता नहीं चला क्योंकि उसके पास अस्पताल जाने के लिए पैसे नहीं थे.
OCHA/Zinnia Bukhari

टीबी की बीमारी का 'अंत करने का समय'

रविवार को 'विश्व तपेदिक दिवस' पर संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि संक्रामक रोगों से होने वाली मौतों में टीबी या तपेदिक दुनिया में सबसे ऊपर है, साथ ही एचआईवी और सूक्ष्मजीव रोधी प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रज़िस्टेंस) से होने वाली मौतों के लिए भी ज़िम्मेदार है. ऐसे में इस बीमारी से निपटने के लिए वैश्विक प्रयासों में व्यापक स्तर पर तेज़ी लाने की अपील की गई है. 

NASA

अब तक का चौथा सबसे गर्म साल रहा 2018

  • चढ़ते पारे ने बढ़ाई चिंता, 2018 साबित हुआ चौथा सबसे गर्म साल
  • टीबी के ख़िलाफ़ लड़ाई में अहम प्रगति, पिछले साल साढ़े चार लाख नए मरीज़ों की पहचान 
  • महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहिष्णुता दिवस पर इस प्रथा का अंत किए जाने की पुकार
ऑडियो
7'22"
टीबी के ख़िलाफ़ मुख्य रूप से उपयोग में लाया जाने वाला बीसीजी टीका.
UNICEF/Ilvy Njiokiktjien

टीबी के ख़िलाफ़ लड़ाई में ठोस प्रगति

टीबी से पीड़ित लेकिन अपनी बीमारी से अनजान 15 लाख मरीज़ों का इस साल के आख़िर तक पता लगाने और उनका इलाज करने की एक संयुक्त पहल के ठोस परिणाम सामने आए हैं. तपेदिक की बीमारी का बोझ झेल रहे भारत सहित छह एशियाई देशों ने सिर्फ़ पिछले साल टीबी के साढ़े चार लाख नए मामलों का पता लगाया है.