वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

टीबी

विश्व भर में, 2022 में 75 लाख लोगों में टीबी संक्रमण की पुष्टि हुई.
UN Photo/Loey Felipe

टीबी का 'अन्तिम अध्याय' लिखने के लिए अतिरिक्त प्रयासों की दरकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में तपेदिक (टीबी) के निदान और उपचार सेवाओं का स्तर बढ़ाने के प्रय में काफ़ी हद तक बेहतरी दर्ज की गई है. वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण टीबी सेवाओं पर नकारात्मक असर हुआ था, मगर अब स्थिति में सुधार नज़र आने लगा है. इसके बावजूद, टीबी का उन्मूलन करने के लिए अभी और क़दम उठाए जाने होंगे. 

कोलम्बिया में एक टीबी संक्रमित मरीज़ का घर पर ही इलाज हो रहा है.
© PAHO/Joshua Cogan

2030 तक, टीबी उन्मूलन के लिए वैश्विक कार्रवाई का नया संकल्प

विश्व नेताओं, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों ने तपेदिक (टीबी) रोग के उन्मूलन पर लक्षित एक राजनैतिक घोषणापत्र को शुक्रवार को यूएन मुख्यालय में एक बैठक के दौरान पारित किया है.

© WFP/Mohammed Nasher

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलेटिन, 21 जुलाई 2023

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ.

  • यूक्रेनी बन्दरगाहों पर रूसी हमले, 'वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा प्रहार'
  • एक बहुध्रुवीय जगत में, वैश्विक शान्ति व सुरक्षा के लिए नई दूरदृष्टि
  • दुनिया की अधिकतम महिलाएँ हैं, विशाल लैंगिक खाई वाले देशों में
  • 2022 में, सर्वोच्च त्याग करने वाले 77 यूएन कर्मचारियों के सम्मान में स्मृति समारोह
  • टीबी रोकथाम उपायों में विफल रहने से, 2035 तक 10 लाख मौतों की आशंका
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भारत के मुम्बई शहर में स्थित एक अस्पताल में एक डॉक्टर, टीबी मरीज़ की जाँच कर रहा है.
© WHO/David Rochkind

टीबी रोकथाम उपायों में विफल रहने से, 2035 तक 10 लाख मौतों की आशंका

महामारियों का समाधान ढूंढने पर केन्द्रित यूएन एजेंसी (Unitaid) ने बुधवार को चेतावनी जारी की है कि तपेदिक यानि टीबी संक्रमितों के सम्पर्क में आने वाले व्यक्तियों का पता लगाने (contact tracing) और रोग की रोकथाम के लिए उपायों को लागू करने में विफलता, वर्ष 2035 तक लगभग दस लाख मौतों की वजह बन सकती है.

यह परियोजना, समुदाय की रक्षा करने एवं टीबी को ख़त्म करने के लिए, सक्रिय केस-फाइंडिंग, स्क्रीनिंग, निदान, उपचार व देखभाल और सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है.
WHO India/Sanchita Sharma

भारत: चेन्नई में टीबी की बीमारी ख़त्म करने के लिए बहुआयामी कार्रवाई

भारत के दक्षिणी प्रदेश तमिलनाडु के चेन्नई शहर में, तपेदिक यानि टीबी की बीमारी को ख़त्म करने के लिए, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से, बहुआयामी कार्रवाई चल रही है. इसके तहत, रोग की पहचान, चिकित्सा व सचल चिकित्सा इकाइयों के ज़रिए निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है, जिससे लोगों को सुविधानुसार जाँच व निदान करवाने में मदद मिल रही है.

पेरू के लीमा में टीबी का इलाज करवाता एक मरीज़.
PAHO/Joshua Cogan

विश्व तपेदिक दिवस: जानलेवा बीमारी के उन्मूलन पर केन्द्रित पहल को मज़बूती

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गुरूवार को आगाह किया है कि वर्ष 2022 में, एक दशक से ज़्यादा समय में पहली बार, तपेदिक (टीबी) से होने वाली मौतों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है, जिसकी वजह, कोविड-19 महामारी के कारण उपजे व्यवधान, हिंसक संघर्ष और अन्य संकट हैं.

भारत में एक डॉक्टर अपने मरीज़ के एक्स-रे की जाँच कर रहा है, ताकि टीबी का पता लगाया जा सके.
© ILO/Vijay Kuty

टीबी वैक्सीन विकास पर केन्द्रित नई परिषद, लाखों ज़िन्दगियों की रक्षा की आशा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने तपेदिक (टीबी) के विरुद्ध कारगर, नई तरह के टीकों (novel vaccines) के लिए लाइसेंस और उनके प्रयोग की प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए अपनी योजना पेश की है. यूएन एजेंसी ने आशा व्यक्त की है कि ‘टीबी वैक्सीन ऐक्सीलरेटर’ परिषद' नामक इस पहल के ज़रिये, बड़ी संख्या में तपेदिक मामलों की रोकथाम और लोगों के जीवन की रक्षा कर पाना सम्भव होगा.

कोविड-19 महामारी के प्रभावों से, तपैदिक (TB) का मुक़ाबला करने के प्रयासों पर भी प्रतिकूल असर पड़ा और उनकी रफ़्तार धीमी हुई है.
© WHO/Hamad Darwish

कोविड महामारी के कारण, टीबी मौतों में भी बढ़ोत्तरी, WHO

संयुक्त राष्ट्र के विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गुरूवार को कहा है कि तपेदिक (Tuberculosis) से होने वाली मौतों की संख्या और संक्रमण के मामलों में कोविड-19 महामारी के दौरान बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है, क्योंकि महामारी के कारण उपचार और सहायक सेवाओं तक पहुँच बाधित हुई.

भारत में एक डॉक्टर अपने मरीज़ के एक्स-रे की जाँच कर रहा है, ताकि टीबी का पता लगाया जा सके.
© ILO/Vijay Kuty

टीबी के कारण प्रतिदिन चार हज़ार से अधिक मौतें, संसाधनों में निवेश की पुकार  

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने तपेदिक (टीबी) के विरुद्ध लड़ाई में दर्ज प्रगति की दिशा उलटने पर चिन्ता जताते हुए, संसाधन, समर्थन, देखभाल और जानकारी सुनिश्चित करने के लिये तत्काल निवेश की पुकार लगाई है. यूएन एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2000 के बाद से अब तक साढ़े छह करोड़ से अधिक ज़िन्दगियों की रक्षा करने में मदद मिली है, मगर कोविड-19 महामारी से उपजे व्यवधान के कारण जोखिम पैदा हो गया है. 

Photo: UNICEF/Giacomo Pirozzi

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलेटिन, 15 अक्टूबर 2021

इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...

  • कोविड-19 के मामलों में कमी, मगर वैक्सीन विषमता अब भी बरक़रार,
  • प्रदूषण रहित व टिकाऊ परिवहन की सुलभता पर एक विशेष सम्मेलन,
  • आलस और निष्क्रियता से बढ़ रही हैं बीमारियाँ, धनी देशों में हैं ज़्यादा लोग हैं आलसी,
  • भारत में शिक्षकों की महत्ता व स्थिति पर, यूनेस्को की एक ख़ास रिपोर्ट,
  • और, विश्व खाद्य दिवस के मौक़े पर, भारत में FAO की प्रतिनिधि शालिनी भूटानी के साथ एक इण्टरव्यू.
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