तापमान

2019 रिकॉर्ड पर दूसरा सर्वाधिक गर्म वर्ष: यूएन की पुष्टि

संयुक्त राष्ट्र के मौसम संगठन ने बुधवार को पुष्टि की है कि 2019 रिकॉर्ड पर दूसरा सबसे ज़्यादा गर्म वर्ष दर्ज किया गया है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुमान के मुताबिक़ वर्ष 2019 में वार्षिक वैश्विक वृद्धि 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज की गई. ये 1850-1900 के दौर से भी गर्म था. इस दौर को पूर्व आद्योगिक काल कहा जाता है.

दिल दहला देने वाली है जलवायु की स्थिति

अत्यधिक गर्म हवाओं, सूखा, चक्रवाती तूफ़ानों, बाढ़ों और जंगलों में लगी भीषण आग जैसी विशाल प्रभावों वाली घटनाओं ने सभी महाद्वीपों को प्रभावित किया है. करोड़ों लोगों को गर्म हवाओं और वायु प्रदूषण का सामना करना पड़ा है. चौंकाने वाली है जलवायु स्थिति. एक झलक...

इंटरव्यू: यूएन छत पर सोलर पैनल

जलवायु आपदा का सामना करने के प्रयासों के तहत संयुक्त राष्ट्र में कान्फ्रेंस इमारत की छत पर सोलर पैनल और हरी घास लगए गए हैं. ये काम मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र के संचालन विभाग के अवर महासचिव अतुल खरे की देखरेख में हुआ है. उनके साथ ख़ास बातचीत.

जलवायु परिवर्तन का असर बहुत तेज़ और गहरा - सम्मेलन से पहले विशेषज्ञों की चेतावनी

शीर्ष वैज्ञानिकों ने रविवार को एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान समद्रों का बढ़ता जल स्तर, गरम होती ज़मीन, सिकुड़ती बर्फ़ चादरें और कार्बन प्रदूषण ने विश्व के राजनैतिक नेताओं से जलवायु कार्रवाई की पुकार को और ज़्यादा ज़ोरदार बना दिया है.

तत्काल जलवायु कार्रवाई की ज़रूरत को रेखांकित करते नए आंकड़े

संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान संस्था (WMO) की ओर से जारी नए आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले चार साल आधिकारिक रूप से अब तक के सबसे गर्म साल रहे हैं. इस जानकारी के सामने आने के बाद यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जलवायु कार्रवाई के लिए प्रयास तेज़ करने और महत्वाकांक्षा बढ़ाने की ओर ध्यान आकृष्ट किया है. सितंबर में वह इसी सिलसिले में जलवायु शिखर वार्ता भी आयोजित कर रहे हैं. 

ग्रीनहाउस गैसों का स्तर रिकॉर्ड ऊँचाई पर

वातावरण में तापमान बढ़ाने वाली ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़कर एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है. संयुक्त राष्ट्र के मौसम विज्ञान संस्थान ने गुरूवार को एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस चलन में कमी आने के कोई संकेत नज़र नहीं आ रहे हैं. इसी कारण से जलवायु परिवर्तन हो रहा है, समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, महासागरों का अम्लीकरण हो रहा है और मौसम का मिज़ाज प्रतिकूल हो रहा है.