तालेबान

अफ़ग़ानिस्तान: महिलाओं व लड़कियों को 'अदृश्य' बनाने वाले क़दमों की आलोचना

संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के एक समूह ने आगाह किया है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान नेतृत्व, महिलाओं व लड़कियों के विरुद्ध व्यापक पैमाने पर व्यवस्थागत ढंग से लिंग-आधारित भेदभाव व हिंसा को संस्थागत रूप दे रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान: मानवीय संकट गहराने से रोकने के लिये तत्काल कार्रवाई की माँग   

संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से अफ़ग़ानिस्तान में ज़रूरतमन्दों तक मानवीय राहत पहुँचाने का मार्ग स्पष्ट करने के लिये, हरसम्भव उपाय किये जाने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा है कि सर्दी के मौसम के दौरान, मानवीय आपदा के गहराने का ख़तरा है और इसकी रोकथाम करनी होगी.

ज़रूरतमन्द अफ़ग़ानों तक राहत पहुँचाने के लिये, सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पारित

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बुधवार को सर्वमत से एक प्रस्ताव पारित करते हुए, बेहद कठिन हालात में गुज़र-बसर कर रहे अफ़ग़ान नागरिकों तक बुनियादी सहायता पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है. इस प्रस्ताव के तहत, राहत आवश्यकताओं को पूरा करना सम्भव होगा और सहायता धनराशि को तालेबान के हाथों में जाने से रोका जा सकेगा. 

अफ़ग़ानिस्तान: संकटग्रस्त देश में, जच्चा-बच्चा के लिये जीवनरक्षक सहायता

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल का मलालाई मातृत्व अस्पताल, देश के व्यस्ततम अस्पतालों में से एक है जो हर दिन, इस दुनिया में क़रीब 85 नवजात शिशुओं का स्वागत करता है. इनमें लगभग 20 बच्चे ऑपरेशन के ज़रिये पैदा होते हैं. मगर देश में मौजूदा संकट, मरीज़ों की देखभाल करने की चिकित्सा स्टाफ़ की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है.

इण्टरव्यू: अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय संकट ने छीना बच्चों का बचपन 

70 वर्षों से अधिक समय से, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने अफ़ग़ानिस्तान में अपनी मौजूदगी बनाए रखी है, और अगस्त 2021 में देश की सत्ता पर तालेबान का वर्चस्व होने के बाद उपजे कठिन माहौल में भी, स्थानीय बच्चों की देखभाल सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं. 

अफ़ग़ानिस्तान: सूखा-पीड़ित किसानों व पशुपालकों के समक्ष एक विशाल संकट

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी जारी की है कि अफ़ग़ानिस्तान में किसानों और पशुपालकों पर विनाशकारी और अकाल जैसी परिस्थितियाँ का संकट मंडरा रहा है और सर्दी के मौसम की शुरुआत के बाद हालात और भी बदतर हो सकते हैं. 

'अफ़ग़ान जनता से मुँह मोड़ने का समय नहीं', सहायता प्रयासों की पुकार

अफ़ग़ानिस्तान में हालात पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष प्रतिनिधि डेबराह लियोन्स ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान पर तालेबान के वर्चस्व के बाद, स्थानीय आबादी को महसूस हो रहा है कि उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है, और उन्हें ऐसे हालात का दण्ड मिल रहा है, जिनमें उनका कोई दोष नहीं है. 

अफ़ग़ान स्वास्थ्यकर्मियों को वेतन मिलने से भरोसे का पैग़ाम

अफ़ग़ानिस्तान में इस वर्ष जब अगस्त के मध्य में तालेबान में सत्ता पर नियंत्रण कर लिया था तो देश के लगभग केन्द्र में स्थित, 35 हज़ार की आबादी वाले शहर मैदान शर के मुख्य अस्पताल के ज़्यादातर कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला था. दवाइयों और खाद्य सामग्री जैसी ज़रूरी चीज़ों की भी कमी थी और वो बहुत जल्दी से ख़त्म होने के कगार पर थीं.

अफ़ग़ानिस्तान: आधी से अधिक आबादी के लिये ‘संकट’ या ‘आपात’ स्तर की खाद्य असुरक्षा  

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान में दो करोड़ 30 लाख लोग, यानि अफ़ग़ान आबादी का क़रीब 55 फ़ीसदी हिस्सा, अभी से लेकर अगले वर्ष मार्च तक, संकटपूर्ण या फिर आपातकालीन स्तर की खाद्य असुरक्षा का सामना करने के लिये मजबूर है.
 

अफ़ग़ानिस्तान: 'टूट व बिखर चुके लोगों को मदद की तत्काल ज़रूरत'

संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी (IOM) के प्रमुख एंतोनियो वितोरिनो ने, अफ़ग़ानिस्तान में आम लोगों के हालात के बारे में गुरूवार को बेबाक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वर्षों से जारी संघर्ष व अशान्ति, दमनात्मक निर्धनता और जलवायु सम्बन्धी आपदाओं ने, देश को पतन के किनारे पर पहुँचा दिया है.