सूखा

अफ़ग़ानिस्तान: सूखा-पीड़ित किसानों व पशुपालकों के समक्ष एक विशाल संकट

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी जारी की है कि अफ़ग़ानिस्तान में किसानों और पशुपालकों पर विनाशकारी और अकाल जैसी परिस्थितियाँ का संकट मंडरा रहा है और सर्दी के मौसम की शुरुआत के बाद हालात और भी बदतर हो सकते हैं. 

आधी अफ़ग़ान आबादी के समक्ष भुखमरी का संकट - तत्काल सहायता की पुकार

संयुक्त राष्ट्र का एक नया विश्लेषण दर्शाता है कि अफ़ग़ानिस्तान में सूखे, हिंसक संघर्ष व अस्थिरता, कोविड-19 और आर्थिक संकट के कारण, देश की आधी से अधिक आबादी के पास खाने के लिये पर्याप्त भोजन उपलब्ध नहीं है, जिससे उनके जीवन के लिये ख़तरा पैदा हो रहा है. 

अफ़ग़ान लोगों को आर्थिक संकट से उबारने के लिये 'जन अर्थव्यवस्था' कोष

संयुक्त राष्ट्र ने गुरूवार को कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान की अर्थव्यवस्था बिखर जाने के कगार पर पहुँच गई है और आने वाले महीनों में, केवल तीन प्रतिशत घरों को छोड़कर, बाक़ी पूरी आबादी के, ग़रीबी की रेखा से नीचे चले जाने की आशंका प्रबल है.

बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के कारण मंडराता जल संकट – WMO की चेतावनी

जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, सूखा सहित अन्य जल-सम्बन्धी जोखिमों में वृद्धि हो रही है और आबादी के साथ माँग बढ़ने व जल उपलब्धता में कमी से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ने की आशंका है. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने अपनी एक नई रिपोर्ट में दुनिया पर मंडराते जल संकट पर चेतावनी जारी की है. 

पाँच दशकों में आपदाओं में पाँच गुना वृद्धि, बेहतर चेतावनी प्रणालियों से जीवनरक्षा सम्भव

पिछले 50 वर्षों में जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम की घटनाओं से विश्व भर में प्राकृतिक आपदाओं की संख्या बढ़ रही है, जिसका निर्धन देशों पर विषमतापूर्ण असर हुआ है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिये यूएन कार्यालय (UNDRR) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बावजूद, बेहतर अग्रिम चेतावनी प्रणालियों से मृतक संख्या में कमी लाने में सफलता मिली है.

हिंसा, आर्थिक बदहाली, विस्थापन, महामारी – अफ़ग़ानिस्तान में 'अविश्वसनीय' संकट

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए आगाह किया है कि अफ़ग़ानिस्तान में हिंसक संघर्ष, सूखे और कोविड-19 महामारी से अविश्वसनीय स्तर पर एक संकट आकार ले रहा है, जो स्थानीय समुदायों को मानवीय विनाश की ओर धकेल रहा है.  

मरुस्थलीकरण और सूखा – मानव कल्याण के लिये ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चिन्ता जताई है कि मानवता ने प्रकृति के विरुद्ध एक आत्मघाती, निर्मम युद्ध छेड़ा हुआ है जिसे रोका जाना होगा. उन्होंने गुरुवार, 17 जून, को मरुस्थलीकरण व सूखा का सामना करने के लिए मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर आगाह किया कि जलवायु परिवर्तन के कारण हुए भूमि क्षरण और कृषि, शहरों व बुनियादी ढाँचे के विस्तार से, तीन अरब से अधिक लोगों के जीवन व आजीविका के लिये चुनौती खड़ी हो गई है. 

गहन प्राकृतिक आपदाओं में तेज़ी - कृषि क्षेत्र पर सर्वाधिक असर

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवँ कृषि संगठन (UNFAO) का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के नए और अभूतपूर्व रूपों का, कृषि उद्योग पर भीषण असर हुआ है. यूएन कृषि एजेंसी ने गुरुवार को जारी अपनी एक नई रिपोर्ट में यह बात कही है.   
 

मेडागास्कर में सूखा के कारण, लोग कीड़े-मकौड़े खाने तक को मजबूर

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने शुक्रवार को कहा है कि मेडागास्कर के दक्षिणी हिस्से में कई वर्षों से सूखा पड़ने के कारण भुखमरी लगातार बढ़ रही है, जिससे क्षेत्र की लगभग आधी आबादी यानि लगभग 15 लाख लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इन हालात ने बहुत परिवारों को कीड़े-मकौड़े तक खाने को विवश कर दिया है.

मरुस्थलीकरण व सूखा विरोधी दिवस

मानव गतिविधियों के कारण पृथ्वी का स्वास्थ्य भी ख़राब चल रहा है और जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी की तकलीफ़ों में और इज़ाफ़ा हुआ है. मरुस्थलीकरण व सूखा का सामना करने के लिए मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर महासचिव का वीडियो सन्देश...