सुरक्षा परिषद

म्याँमार: सेना की पूरी कोशिश, 'दुनिया के सामने सच्चाई ना आए'

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर सयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपोर्टेयर टॉम एण्ड्रयूज़ ने यूएन न्यूज़ के साथ एक ख़ास इण्टरव्यू में बताया है कि सैन्य नेतृत्व पूरी कोशिश कर रहा है कि देश से सच को बाहर जाने से रोका जा सके. उनके मुताबिक़ सेना नहीं चाहती है कि म्याँमार में हालात के बारे में, दुनिया को सही जानकारी मिल सके. यूएन विशेषज्ञ ने उन उपायों का इस्तेमाल किये जाने की सिफ़ारिश की है कि जोकि अतीत में सफल साबित हो चुके हैं.  

माली: राजनैतिक, सुरक्षा, मानवाधिकार व मानवीय चुनौतियों की भयावहता का शिकार

संयुक्त राष्ट्र के शान्तिरक्षा मामलों के प्रमुख ज्याँ पियर लैक्रोआ ने सुरक्षा परिषद को बताया है कि माली के मध्य और उत्तरी इलाक़ों में सुरक्षा स्थिति तेज़ी से ख़राब हो रही है. ऐसे में, संयुक्त राष्ट्र के शान्तिरक्षकों, माली की रक्षा सेनाओं व सुरक्षा बलों को लगातार हमलों का सामना करना पड़ रहा है जिससे उन्हें भारी नुक़सान भी उठाना पड़ रहा है. कुछ बड़े क़स्बे भी, सशस्त्र गुटों से लगातार ख़तरों के साए में रहने को मजबूर हैं.

सीरिया: ‘मृत्यु, विनाश, विस्थापन, बीमारी, क्रूरता और निराशा’ का दशक

संयुक्त राष्ट्र के आपातकालीन राहत समन्वयक ने सुरक्षा परिषद को बताया है कि यह वक़्त, सीरिया के लिये मानवीय सहायता में कमी करने का नहीं है. देश में, 10 साल के संघर्ष व भीषण तबाही के बाद, भविष्य में हालात अधिक "नाटकीय और व्यापक" रूप से बदतर होने से बचाने के लिये, अधिक योगदान की आवश्यकता है.

म्याँमार की सेना, देश के भविष्य के लिये ख़तरा - यूएन दूत की चेतावनी

म्याँमार के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेनर बर्गनर ने कहा है कि देश की सेना अपने ही नागरिकों के ख़िलाफ़ खड़ी हो गई है, जिससे देश के भविष्य पर जोखिम मंडरा रहा है. विशेष दूत ने म्याँमार में वार्षिक 'सैन्य बल दिवस' की पूर्व संध्या पर, शुक्रवार को जारी अपने बयान में म्याँमार मे हालात पर चिन्ता जताई है.  

अफ़ग़ानिस्तान: हिंसा पर विराम, समावेशी शान्ति प्रक्रिया की दरकार

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि डेबराह लियोन्स ने कहा है कि अफ़ग़ान जनता की पीड़ा, विस्थापन और मौतों के सिलसिले पर अब विराम लगाया जाना होगा. उन्होंने मंगलवार को सुरक्षा परिषद में सदस्य देशों को देश में मौजूदा हालात से अवगत कराते हुए कहा कि यह समय परिस्थितियों की समीक्षा करने और शान्ति मार्ग पर आगे बढ़ने के लिये ज़रूरी प्रयासों को समर्थन दिये जाने का है.

लीबिया में हथियार प्रतिबन्ध बिल्कुल बेअसर - यूएन विशेषज्ञ पैनल

संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ पैनल ने कहा है कि वर्ष 2011 में, लीबिया पर, सुरक्षा परिषद द्वारा लगाए गए हथियार प्रतिबन्ध पूर्ण रूप से बेअसर साबित हुए हैं. विशेषज्ञ समूह के अनुसार प्रवासियों व शरणार्थियों सहित आम लोगों को व्यापक स्तर पर मानवाधिकार हनन व दुर्व्यवहारों का सामना करना पड़ रहा है. 

सीरिया: अकल्पनीय हिंसा, पीड़ा और सहनक्षमता के 10 साल 

सीरिया के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गेयर पैडरसन ने सोमवार को सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश में हालात को, हालिया इतिहास के बेहद स्याह अध्यायों में शामिल किया जाएगा. उन्होंने दुख ज़ाहिर करते हुए कहा कि गृहयुद्ध का एक दशक पूरा होना, सीरिया के लिये एक गम्भीर पड़ाव है और वहाँ के लोग इस सदी के सबसे ज़्यादा पीड़ितों में हैं. 

म्याँमार: ‘क्रूर’ कार्रवाई में लोगों की मौत की निन्दा, लोकतन्त्र बहाली की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने म्याँमार में, सप्ताहान्त के दौरान, देश की सेना द्वारा, अनेक प्रदर्शनकारियों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए, लोकतन्त्र की बहाली की पुकार लगाई है. म्याँमार के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत, क्रिस्टीन श्रेनर बर्गनर ने भी देश में ‘जारी रक्तपात’ की कड़े शब्दों में निन्दा की है. 

म्याँमार: शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसा की कड़े शब्दों में निन्दा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने म्याँमार में शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध हिंसा की कठोर शब्दों में निन्दा की है और चिकित्साकर्मियों, नागरिक समाज, श्रम संगठनों व पत्रकारों पर लगाई गई पाबन्दियों पर गहरी चिन्ता जताई है. फ़रवरी महीने में सेना द्वारा सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाने के बाद से ही म्याँमार में व्यापक स्तर पर देश के अनेक शहरों में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं.

सीरिया: हिंसक संघर्ष, दस वर्ष बाद भी एक भयावह सपना

 संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गेटरेश ने सीरिया में गृहयुद्ध के राजनैतिक हल की तलाश के लिये, यूएन के दृढ़ संकल्प को रेखांकित किया है. उन्होंने, बुधवार को, यूएन के न्यूयॉर्क स्थित मुख्यालय में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक से जारी हिंसक संघर्ष, स्थानीय आबादी के लिये एक “जीवित दुस्वप्न” बनकर रह गया है.