समुन्दर

मौसम संगठन की चेतावनी - अभूतपूर्व जोखिम की ज़द में हैं समुद्र

संयुक्त राष्ट्र के मौसम वैज्ञानिकों ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन ने दुनिया भर के समुद्रों को बहुत बुरी तरह प्रभावित किया है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवन रक्षक निगरानी प्रणालियों और पूर्व चेतावनी देने वाली सेवाओं में, कोविड-19 महामारी के कारण जो व्यवधान आया है, उन्हें फिर से मुस्तैद बनाए जाने की ज़रूरत है, ताकि तटवर्ती इलाक़ों में रहने वाले और जोखिम का सामना करने वाले समुदायों की रक्षा की जा सके.

शताब्दी के अन्त तक प्रवाल भित्तियों के विलुप्त होने की आशंका

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भारी कमी नहीं होती, तो सदी के अन्त तक दुनिया की सभी प्रवाल भित्तियाँ यानि कोरल रीफ़ ख़त्म हो जाएँगी. 

भुखमरी का ख़ात्मा करने के लिये, समुद्री खेती में गहरी डुबकी

वर्ष 2050 तक दुनिया की आबादी 9 अरब 70 करोड़ हो जाने का अनुमान है और ऐसे में इस आबादी की खाद्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिये खाद्य उत्पादन भी उसी रफ़्तार से बढ़ाना होगा. विशेषज्ञों का ख़याल है कि बढ़ती आबादी की खाद्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिये समुन्दर एक टिकाऊ समाधान मुहैया करा सकते हैं. 

सूनामी जागरूकता दिवस: 'असरदार आपदा जोखिम प्रबन्धन से ज़िन्दगियाँ बचती हैं'

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने दुनिया भर में तटीय इलाक़ों में रहने वाले समुदायों की हिफ़ाज़त सुनिश्चित करने के लिये तैयार रहने और लगातार जोखिम आकलन करते रहने की महत्ता रेखांकित की है. गुरूवार को विश्व सूनामी जागरूकता दिवस के मौक़े पर ये ध्यान दिलाया गया है.

समुद्री नाविकों को महामारी के दौरान 'अहम कामगार' घोषित करने की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने देशों की सरकारों से एक बार फिर अपील की है कि वो उन सैकड़ों-हज़ारों नाविकों और अन्य समुद्री कामगारों की मदद के लिये काम करें जो कोविड-19 महामारी के कारण महीनों से समुद्रों में फँसे हुए हैं. कुछ मामलों तो इन लोगों को समुद्रों में फँसे हुए साल भर से भी ज़्यादा हो गया है.