समुद्र

टोंगा: समुद्री ज्वालामुखी विस्फोट से उपजे हालात में, 3 लोगों की मौत की पुष्टि

प्रशान्त द्वीप टोंगा में, बीते सप्ताहान्त विशाल व भयावह समुद्री ज्वालामुखी विस्फोट और उससे भड़के समुद्री तूफ़ान - सूनामी में अभी तक तीन लोगों की मृत्यु होने की ख़बरें मिली हैं. पूरे द्वीपीय क्षेत्र में, घरों और इमारतों को भी व्यापक क्षति हुई है.

टोंगा: समुद्री ज्वालामुखी फटने के बाद, सूनामी व राख के तूफ़ान में मदद के लिये, यूएन मुस्तैद

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने प्रशान्त देश टोंगा के निकट समुद्र के भीतर ज्वालामुखी फटने के बाद, समुद्री तूफ़ान – सूनामी और राख की आन्धी की ख़बरों पर गम्भीर चिन्ता व्यक्त की है जिससे टोंगा प्रभावित हुआ है.

जलवायु परिवर्तन: ग्रीनलैण्ड की हिम चादरों का पिघलना, लगातार 25वें वर्ष भी जारी रहा

संयुक्त राष्ट्र द्वारा अनुमोदित शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 लगातार ऐसा 25वाँ वर्ष रहा जिस दौरान ग्रीनलैण्ड की महत्वपूर्ण हिम चादर को, पिघलाव के मौसम के दौरान और ज़्यादा नुक़सान हुआ, हालाँकि, उसके बाद सर्दियों के मौसम में कुछ बेहतरी भी हुई.

जैव-विविधता संरक्षण की ख़ातिर, यूनेस्को की eDNA परियोजना

यूनेस्को ने, दुनिया भर में स्थित, तमाम वैश्विक समुद्री विरासत स्थलों की जैव-विविधता सम्बन्धी प्रचुर समृद्धि को समझने के लिये, जैव-विविधता को सहेजने और उसकी हिफ़ाज़त करने के लक्ष्य से, सोमवार को एक परियोजना शुरू की है जो पर्यावरणीय डीएनए (eDNA) के अध्ययन पर आधारित है.

समुद्री सुरक्षा के सामने पेश ख़तरों से निपटने के लिये वैश्विक कार्रवाई की दरकार

संयुक्त राष्ट्र की एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को, सुरक्षा परिषद को बताया है कि कोविड-19 के कारण, वर्ष 2020 की पहली छमाही में, कुल मिलाकर समुद्री यातायात में तो कमी दर्ज की गई है, मगर चोरी-चकारी व सशस्त्र लूटपाट के मामलों में लगभग 20 प्रतिशत का इज़ाफ़ा देखा गया है.

सुरक्षा परिषद: भारत ने क्षेत्रीय व समुद्री सुरक्षा पर दिया ज़ोर

भारत ने, अगस्त महीने के लिये सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता सम्भालते हुए कहा है कि जम्मू कश्मीर से सम्बन्धित तमाम मुद्दों का समाधान ऐसे माहौल में तलाश किया जाना चाहिये जो आतंक, शत्रुता और हिंसा से मुक्त हो. 

मौसम संगठन की चेतावनी - अभूतपूर्व जोखिम की ज़द में हैं समुद्र

संयुक्त राष्ट्र के मौसम वैज्ञानिकों ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन ने दुनिया भर के समुद्रों को बहुत बुरी तरह प्रभावित किया है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवन रक्षक निगरानी प्रणालियों और पूर्व चेतावनी देने वाली सेवाओं में, कोविड-19 महामारी के कारण जो व्यवधान आया है, उन्हें फिर से मुस्तैद बनाए जाने की ज़रूरत है, ताकि तटवर्ती इलाक़ों में रहने वाले और जोखिम का सामना करने वाले समुदायों की रक्षा की जा सके.

भुखमरी का ख़ात्मा करने के लिये, समुद्री खेती में गहरी डुबकी

वर्ष 2050 तक दुनिया की आबादी 9 अरब 70 करोड़ हो जाने का अनुमान है और ऐसे में इस आबादी की खाद्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिये खाद्य उत्पादन भी उसी रफ़्तार से बढ़ाना होगा. विशेषज्ञों का ख़याल है कि बढ़ती आबादी की खाद्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिये समुन्दर एक टिकाऊ समाधान मुहैया करा सकते हैं. 

समुद्री नाविकों को महामारी के दौरान 'अहम कामगार' घोषित करने की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने देशों की सरकारों से एक बार फिर अपील की है कि वो उन सैकड़ों-हज़ारों नाविकों और अन्य समुद्री कामगारों की मदद के लिये काम करें जो कोविड-19 महामारी के कारण महीनों से समुद्रों में फँसे हुए हैं. कुछ मामलों तो इन लोगों को समुद्रों में फँसे हुए साल भर से भी ज़्यादा हो गया है.

मछली खपत में इज़ाफ़ा, टिकाऊ प्रबन्धन की सख़्त ज़रूरत

दुनिया भर में इन्सानों के भोजन में मछलियों की खपत वर्ष 2018 में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गई थी और आने वाले दशक के दौरान इसमें और भी ज़्यादा वृद्धि होने का अनुमान है. खाद्य और कृषि संगठन ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में ये तथ्य पेश करते हुए टिकाई मत्स्य प्रबन्धन की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है. इसे सोफ़िया रिपोर्ट कहा जाता है.