समुद्र

भुखमरी का ख़ात्मा करने के लिये, समुद्री खेती में गहरी डुबकी

वर्ष 2050 तक दुनिया की आबादी 9 अरब 70 करोड़ हो जाने का अनुमान है और ऐसे में इस आबादी की खाद्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिये खाद्य उत्पादन भी उसी रफ़्तार से बढ़ाना होगा. विशेषज्ञों का ख़याल है कि बढ़ती आबादी की खाद्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिये समुन्दर एक टिकाऊ समाधान मुहैया करा सकते हैं. 

समुद्री नाविकों को महामारी के दौरान 'अहम कामगार' घोषित करने की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने देशों की सरकारों से एक बार फिर अपील की है कि वो उन सैकड़ों-हज़ारों नाविकों और अन्य समुद्री कामगारों की मदद के लिये काम करें जो कोविड-19 महामारी के कारण महीनों से समुद्रों में फँसे हुए हैं. कुछ मामलों तो इन लोगों को समुद्रों में फँसे हुए साल भर से भी ज़्यादा हो गया है.

मछली खपत में इज़ाफ़ा, टिकाऊ प्रबन्धन की सख़्त ज़रूरत

दुनिया भर में इन्सानों के भोजन में मछलियों की खपत वर्ष 2018 में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गई थी और आने वाले दशक के दौरान इसमें और भी ज़्यादा वृद्धि होने का अनुमान है. खाद्य और कृषि संगठन ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में ये तथ्य पेश करते हुए टिकाई मत्स्य प्रबन्धन की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है. इसे सोफ़िया रिपोर्ट कहा जाता है.

महासागर संरक्षण के लिए ज़रूरत है फ़ौलादी इरादों की

दुनिया जब कोविड-19 महामारी की चपेट में नज़र आ रही है तो महासागरों की हिफ़ाज़त करने के लिए फ़ौलादी इरादे वाले व्यवहारवाद की आवश्यकता है. ये कहना है महासागरों के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के विशेष दूत पीटर थॉम्पसन का, जिन्होंने 8 जून को मनाए जाने वाले विश्व महासागर दिवस के मौक़े पर ये बात कही है. 

एशिया-प्रशान्त के महासागरों की पुनर्बहाली की उम्मीद

हाल के वर्षों में समुद्री प्रदूषण, अत्यधिक मत्स्य-पालन और तेज़ी से बढ़ते जलवायु परिवर्तन के कारण एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के महासागरों की हालत बद से बदतर होती जा रही है. लेकिन एशिया और प्रशान्त के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) द्वारा बुधवार को जारी एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि कोविड -19 महामारी के कारण इन्सानी गतिविधियों, मानवीय गतिशीलता और संसाधनों की माँग अस्थायी रूप से बन्द होने से समुद्री पर्यावरण को राहत मिली है. 

विश्व तापमान वृद्धि की चुनौती

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा व व्यापक जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन पर्यावरण के सभी पहलुओं पर बहुत बड़ा असर डाल रहा है, साथ ही जलवायु संकट दुनिया भर की आबादी के स्वास्थ्य और रहन-सहन को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रहा है. भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान के महानिदेशक डॉक्टर मृत्युंजय मोहापात्रा के साथ विशेष बातचीत... 

हर मिनट एक ट्रक प्लास्टिक समुद्र में फेंक दिया जाता है

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने कहा है कि हर साल लगभग 80 लाख टन प्लास्टिक कूड़ा-कचरा समुद्रों में फेंका जाता है - इसका मतलब इस तरह भी समझा जा सकता है कि एक बड़े ट्रक में समाने वाले कूड़े-कचरे के बराबर ये हर मिनट समुद्र में फेंका जाता है.

समुद्रों को सहेजकर रखने के लिए समझौते की कोशिश

समुंदरों में ज़ाहिरा तौर पर तो लगभग दो लाख प्रजातियों की मौजदूगी के बारे में जानकारी उपलब्ध है मगर असल में ये संख्या लाखों में होने के अनुमान व्यक्त किए गए हैं. चिंता की बात ये है कि ये समुद्री प्रजातियाँ जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और दोहर के ख़तरों का सामना कर रही हैं.