समानता

करोड़ों महिलाएँ अन्य लोगों द्वारा नियंत्रित जीवन जीने को विवश

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 57 देशों में, तकरीबन आधी महिलाओं को, अपनी स्वास्थ्य देखभाल, गर्भ निरोधक प्रयोग करने या नहीं करने, या यौन जीवन के बारे में अपनी पसन्द से फ़ैसले करने की शक्ति हासिल नहीं है. 

ऑटिज़्म: महामारी से उबरने के प्रयास, समावेश बढ़ाने का एक मौक़ा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार, 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस पर कहा है कि ऐसे में जबकि तमाम देश कोविड-19 महामारी से बाहर आने के लिये जद्दोजहद कर रहे हैं तो, एक ऐसी समावेशी व सभी के लिये सुलभ दुनिया बनाना बहुत अहम है जिसमें तमाम लोगों के योगदान को पहचान व मान्यता मिले, जिनमें विकलांगता वाले लोगों को पहचान भी शामिल हो.

कोविड-19: महिलाओं पर दोहरी गाज, अग्रिम मोर्चों पर मुस्तैद मगर निर्णय-प्रक्रिया से बाहर

महिला अधिकारों व सशक्तिकरण के लिये काम करने वाले यूएन संगठन – यूएन वीमैन की अध्यक्षा ने कहा है कि निसन्देह दुनिया भर में, स्वास्थ्यकर्मियों में 70 प्रतिशत संख्या महिलाओं की है, और कोविड-19 महामारी से सबसे ज़्यादा और बुरी तरह महिलाएँ ही प्रभावित हुई हैं, फिर भी, महामारी का मुक़ाबला करने से सम्बन्धित निर्णय प्रक्रिया से, महिलाओं को ही, व्यवस्थागत तरीक़े से बाहर रखा जा रहा है. इनमें दुनिया भर में, सरकारों द्वारा संचालित कार्यबल (टास्क फ़ोर्स) भी हैं.

दुनिया, 2030 एजेण्डा के मार्ग में, अहम पड़ाव पर, यूएन उप प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि दुनिया इस समय टिकाऊ विकास एजेण्डा 2030 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के मार्ग पर, बहुत अहम पड़ाव पर खड़ी है. यूएन उप प्रमुख ने ये बात योरोपीय संसद की उपाध्यक्ष हाएदी हउतला के साथ एक वर्चुअल वार्ता के दौरान, बुधवार को कही.

एशिया-प्रशान्त: प्रवासियों की अहम भूमिका की ओर ध्यान

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने एशिया और प्रशान्त क्षेत्र में, अर्थव्यवस्थाओं और समाजों में, प्रवासियों के योगदान को रेखांकित करते हुए, देशों का आहवान किया है कि उन्हें अपनी सीमाओं के भीतर रहने वाले प्रवासियों के लिये भी ये सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें भी कोरोनावायरस से निपटने के राष्ट्रीय कार्यक्रमों में जगह मिले.

विश्व ब्रेल दिवस: सुलभ जानकारी की महत्ता पर ज़ोर

संयुक्त राष्ट्र ने, सोमवार, 4 जनवरी को, विश्व ब्रेल लिपि दिवस पर नेत्रविकारों वाले व्यक्तियों और आंशिक रूप से दृष्टिबाधित लोगों के मानवाधिकारों का पूर्ण सम्मान करने के वाली, वैश्विक स्पर्शनीय संचार प्रणाली की महत्ता पर विशेष ज़ोर दिया है.