समानता

कोविड-19: वर्तमान स्थिति पर चिन्तन और भविष्य के आकलन का समय

जनसंख्या के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश भारत भी कोविड संकट से जूझ रहा है. अपनी विशिष्ट संस्कृति और जनसंख्या समूहों के कारण यहाँ की चुनौतियाँ भी अभूतपूर्व हैं. एक अरब 37 करोड़ की आबादी वाला ये देश दुनिया की सबसे युवा आबादी का भी प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे में, कोविड-19 के ख़त्म होने के बाद देश के सकारात्मक पहलुओं को समन्वित करके, किस तरह चुनौतियों से निपटा जाए – 11 जुलाई को 'विश्व जनसंख्या दिवस' पर इन्हीं मुद्दों पर प्रकाश डालता भारत में यूएनएफ़पीए की प्रतिनिधि, अर्जेंटीना मातावेल का ब्लॉग.

यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों की नस्लभेद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक पुकार

संयुक्त राष्ट्र के अफ्रीकी या अफ्रीकी मूल के लगभग 20 बहुत वरिष्ठ पदाधिकारियों के एक समूह ने एक ऐसे वक्तव्य पर अपनी निजी हैसियत में हस्ताक्षर किए हैं जिसमें लम्बे समय से और बहुत गहराई से जारी नस्लभेद पर अपनी हताशा ज़ाहिर करते हुए निन्दा करने से भर से कहीं आगे बढ़कर और ज़्यादा कार्रवाई किए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है. शुक्रवार को जारी इस वक्तव्य पर दस्तख़त करने वाले ये वरिष्ठ पदाधिकारी सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश को रिपोर्ट करते हैं.

'अमेरिका को गहरी जड़ जमाए नस्लवाद को ख़त्म करना होगा'

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि जो लोग अमेरिका में गहराई से जड़ जमाए और समाज के लिए एक बीमारी बन चुके ढाँचागत नस्लवाद को ख़त्म करने के लिए अपनी आवाज़ बुलन्द कर रहे हैं, उनकी आवाज़ों को सुना और समझा जाना होगा, ताकि देश नस्लवाद और हिन्सा के अपने पीड़ादायक इतिहास के चंगुल से बाहर निकल सके.

दुनिया भर में बिगड़ रही है मानवाधिकारों की स्थिति: मानवाधिकार उच्चायुक्त

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को बताया है कि दुनिया भर में बहुपक्षवाद के लिए चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं जिन्हें नकारा नहीं जा सकता, अलबत्ता मानवाधिकारों के सार्वभौमिक घोषणा-पत्र में हुई ऐतिहासिक सहमतियों को मज़बूत करने के लिए सदस्य देशों के साथ मिल-जुलकर काम किया जा सकता है. संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष मानवाधिकार पदाधिकारी मिशेल बाशेलेट ने मंगलवार को महासभा की तीसरी कमेटी के सामने वार्षिक रिपोर्ट पेश करते हुए ये बात कही. इस कमेटी पर दुनिया भर में सामाजिक, मानवीय और सांस्कृतिक मुद्दों से निपटने की ज़िम्मेदारी है.

अफ़ग़ान शांति में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने रविवार को एक  ज़ोरदारअपील जारी करते हुए कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में सभी पक्षों को अतीत की तकलीफ़ों और मतभेदों को भुलाकर सुलह करनी चाहिए और देश में शांति स्थापना के प्रयासों में महिलाओं को भी अहम भूमिका देनी चाहिए. आमिना मोहम्मद ने संक्षिप्त अफ़ग़ान यात्रा के दौरान रविवार को ये भी कहा कि एक ऐसी राजनैतिक प्रक्रिया क़ायम की जाए जिसमें सभी की भागीदारी हो, ख़ासतौर से महिलाओं की आवाज़ को वास्तविक रूप में प्रमुख जगह मिले.

गरिमा और मानवाधिकार के पलड़े में सभी मनुष्य ‘स्वतंत्र और बराबर'

"सभी लोग स्वतंत्र और समान हैं और उन्हें गरिमा और मानव अधिकारों के साथ जीने का अधिकार है” – न्यूयॉर्क की विश्व प्राइड परेड में भाग लेने वाले संयुक्त राष्ट्र-ग्लोब (GLOBE) के सदस्यों ने रविवार को मानव अधिकारों के सार्वभौमिक घोषणापत्र (UDHR) के इस सशक्त संदेश को एक बार फिर दोहराया. 

ब्रेल दिवस पर नेत्रहीनों के मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता पर ज़ोर

दृष्टिबाधिता से पीड़ित लोगो के मानवाधिकारों और ब्रेल लिपि के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र आधिकारिक रूप से पहली बार विश्व ब्रेल दिवस मना रहा है. दुनिया भर में एक अरब से ज़्यादा लोग नेत्रहीनता या मंददृष्टि से पीड़ित हैं. अब से हर बार यह दिवस 4 जनवरी को मनाया जाएगा.

बहुपक्षवाद का बोलबाला

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें सत्र के दूसरे दिन विभिन्न वक्ताओं ने व्यापार से लेकर जलवायु परिवर्तन तक और विकास से लेकर बीमारियों का मुक़ाबला करने के मुद्दों का जिक्र करने के साथ साथ Multilateralism यानी बहुपक्षवाद पर भी ख़ास ज़ोर दिया.