समानता

साक्षात्कार: समान और न्यायपूर्ण दुनिया ही वक़्त की ज़रूरत - यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने यूएन न्यूज़ के साथ एक ख़ास बातचीत में कोविड-19 के प्रसार पर चिन्ता जताई है और महामारी के बाद बेहतर पुनर्निर्माण, सतत पुनर्बहाली, समानता व बहुपक्षवाद बढ़ाने पर ज़ोर दिया है. संयुक्त राष्ट्र की 75वीं वर्षगाँठ और महासभा के 75वें सत्र के मौक़े पर दिये इस साक्षात्कार में महासचिव ने एक समान व न्यायपूर्ण व टिकाऊ दुनिया के निर्माण का आहवान किया है.

नेलसन मण्डेला की याद में...

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि नेलसन मण्डेला ने हमेशा मानवता व समानता के आदर्शों और सिद्धान्तों के लिए संकल्प दिखाया और वो कहा करते थे कि जब तक दुनिया में ग़रीबी और असमानता बरक़रार है, तब तक हमे आराम नहीं मिल सकता. 18 जुलाई को नेलसन मण्डेला अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर महासचिव का वीडियो सन्देश...

कोविड-19: वर्तमान स्थिति पर चिन्तन और भविष्य के आकलन का समय

जनसंख्या के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश भारत भी कोविड संकट से जूझ रहा है. अपनी विशिष्ट संस्कृति और जनसंख्या समूहों के कारण यहाँ की चुनौतियाँ भी अभूतपूर्व हैं. एक अरब 37 करोड़ की आबादी वाला ये देश दुनिया की सबसे युवा आबादी का भी प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे में, कोविड-19 के ख़त्म होने के बाद देश के सकारात्मक पहलुओं को समन्वित करके, किस तरह चुनौतियों से निपटा जाए – 11 जुलाई को 'विश्व जनसंख्या दिवस' पर इन्हीं मुद्दों पर प्रकाश डालता भारत में यूएनएफ़पीए की प्रतिनिधि, अर्जेंटीना मातावेल का ब्लॉग.

यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों की नस्लभेद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक पुकार

संयुक्त राष्ट्र के अफ्रीकी या अफ्रीकी मूल के लगभग 20 बहुत वरिष्ठ पदाधिकारियों के एक समूह ने एक ऐसे वक्तव्य पर अपनी निजी हैसियत में हस्ताक्षर किए हैं जिसमें लम्बे समय से और बहुत गहराई से जारी नस्लभेद पर अपनी हताशा ज़ाहिर करते हुए निन्दा करने से भर से कहीं आगे बढ़कर और ज़्यादा कार्रवाई किए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है. शुक्रवार को जारी इस वक्तव्य पर दस्तख़त करने वाले ये वरिष्ठ पदाधिकारी सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश को रिपोर्ट करते हैं.

'अमेरिका को गहरी जड़ जमाए नस्लवाद को ख़त्म करना होगा'

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि जो लोग अमेरिका में गहराई से जड़ जमाए और समाज के लिए एक बीमारी बन चुके ढाँचागत नस्लवाद को ख़त्म करने के लिए अपनी आवाज़ बुलन्द कर रहे हैं, उनकी आवाज़ों को सुना और समझा जाना होगा, ताकि देश नस्लवाद और हिन्सा के अपने पीड़ादायक इतिहास के चंगुल से बाहर निकल सके.