स्कूल

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलेटिन 5 मार्च 2021

इस बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...

ऑडियो -
24'20"

यूनीसेफ़: क़रीब 17 करोड़ बच्चे, एक साल तक स्कूली शिक्षा से रह गए वंचित

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने कहा है कि कोविड-19 महामारी का विकराल रूप शुरू हुए, जैसे-जैसे एक वर्ष पूरा हो रहा है, हमें, स्वतः यह ध्यान आ रहा है कि दुनिया भर में तालाबन्दियों और पाबन्दियों ने कितना बड़ा और गम्भीर शिक्षा संकट उत्पन्न कर दिया है. 

नाइजीरिया: स्कूल पर हमले के बाद सैकड़ों लड़कियाँ लापता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने नाइजीरिया के पश्चिमी इलाक़े में, एक माध्यमिक स्कूल पर, शुक्रवार को हुए हमले की पुरज़ोर निन्दा की है. इस हमले के बाद 300 से ज़्यादा लड़कियाँ लापता बताई गई हैं. 

मातृ भाषा दिवस: समावेशी भावना के जश्न का अवसर

संयुक्त राष्ट्र की शैक्षिक और सांस्कृतिक एजेंसी – यूनेस्को ने दुनिया भर में लोगों को, विश्व भर में, स्कूलों में, और दैनिक जीवन में, बहुभाषावाद को समर्थन देकर, विविधता को बढ़ावा देने के लिये प्रोत्साहित किया है. यही विषय, रविवार, 21 फ़रवरी को मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस की मुख्य थीम है.

नेपाल: रेडियो के ज़रिये लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने की मुहिम

कोविड-19 महामारी के कारण दुनिया भर में शिक्षा प्रभावित हुई है,  विशेष रूप से कमज़ोर वर्ग की लड़कियों के स्कूल छोड़ने और उनकी शिक्षा में व्यवधान आने का बड़ा ख़तरा पैदा हो गया है. नेपाल में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ, हाशियेकरण के शिकार समुदायों में, लड़कियों की शिक्षा के बारे में जागरूकता व चेतना जगाने के लिये, साथ मिलकर एक रेडियो कार्यक्रम के ज़रिये प्रयासों में जुटी हैं.

बांग्लादेश में निर्धन बच्चों और युवाओं को शिक्षा व कौशल प्रशिक्षण

बांग्लादेश सरकार ने विश्व बैंक के साथ 60 लाख 50 हज़ार डॉलर केएक वित्तपोषण समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं, जिसके तहत निर्धन बस्तियों में रहने वाले लगभग 39 हज़ार बच्चों को प्राथमिक शिक्षा पूरी करने और कॉक्सेस बाज़ार के पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले 8 हज़ार 500 युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा.

अन्तिम उपाय के तौर पर ही हो स्कूलों में तालाबन्दी - यूनीसेफ़

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने मंगलवार को ज़ोर देकर कहा है कि बच्चों की स्कूली शिक्षा जारी रखने के लिये कोई भी कसर नहीं छोड़ी जानी चाहिये. ग़ौरतलब है कि कोरोनावायरस संकट के कारण अनेक देशों में ऐहतियाती उपायों के तौर पर स्कूलों को बन्द किया है जिससे करोड़ों बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर असर हुआ है. 

एक ऐसा वायरस जिसने विश्व को घुटनों पर ला दिया: शिक्षा का संकट

वर्ष 2020 के दौरान, कोविड-19 महामारी से निपटने के उपायों के तहत, दुनिया भर में अनेक स्थानों पर स्कूल भी बन्द करने पड़े हैं, जिसके कारण विश्व भर में बच्चों की शिक्षा में व्यवधान पैदा हुआ. स्कूल खुल और बन्द हो रहे हैं, अलबत्ता कुछ बच्चों को अपनी शिक्षा जारी रखने के लिये ऑनलाइन माध्यम भी उपलब्ध हैं, जबकि बहुत से बच्चे इससे वंचित हैं. मगर, निस्सन्देह, कमज़ोर हालात वाले बच्चे, तालाबन्दी उपायों से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं. इस लेख में, शिक्षा क्षेत्र पर कोविड-19 महामारी के असर के बारे में एक नज़र...

वर्ष 2020: जिसे कोविड-19 ने बिल्कुल उलट-पलट कर दिया...

स्कूलों में बदमाशी के ख़िलाफ़ एकजुटता की ज़रूरत

स्कूलों में बढ़ती बदमाशी, साथियों को तंग करने व हिंसा जैसे मामलों की रोकथाम के लिये ठोस क़दम उठाना ज़रूरी हो गया है. बच्चों को शिक्षा का ऐसा सुरक्षित वातावरण मिलना बेहद आवश्यक है, जिससे वो अपने अनुभव साझा करने और आवश्यकता पड़ने पर मदद लेने में न हिचकिचाएँ. भारत में यूनेस्को के निदेशक, एरिक फॉल्ट और भारत की राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद -  NCERT के प्रोफ़ेसर हृषिकेश सेनापति का संयुक्त ब्लॉग.

स्कूल बन्द करना, कोविड-19 के ख़िलाफ़ रणनीति में ग़लत क़दम, यूनीसेफ़

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने कहा है कि जो देश कोरोनावायरस महामारी का मुक़ाबला कर रहे हैं, वो इन प्रयासों के तहत राष्ट्रीय स्तर पर या बड़े पैमाने पर स्कूल बन्द करने का रास्ता ना अपनाएँ क्योंकि ये महामारी से लड़ने का ग़लत तरीक़ा है और इसके सामाजिक स्तर पर बहुत गम्भीर नुक़सान हैं.