सीरिया

विश्व भर में क़रीब आठ करोड़ लोग जबरन विस्थापित

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) की नई रिपोर्ट दर्शाती है कि वर्ष 2019 में जबरन विस्थापन का शिकार लोगों की सँख्या बढ़कर सात करोड़ 95 लाख से भी ज़्यादा हो गई. युद्ध, हिंसा, यातना और आपात हालात के कारण पिछले एक दशक में यह सँख्या लगभग दोगुनी हो गई है. 20 जून को ‘विश्व शरणार्थी दिवस’ से ठीक पहले जारी इस रिपोर्ट में यूएन एजेंसी ने विस्थापितों की मदद के लिए सरकारों से पहले से कहीं ज़्यादा प्रयास करने का आहवान किया है.     

यूएन दूत की चेतावनी, सीरिया में समय किसी के पक्ष में भी नहीं

सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गेयर पेडरसन ने कहा है कि देश में आर्थिक हालात बदतर होते जा रहे हैं और इसलिए जल्द ही ऐसा रास्ता ढूँढा जाना होगा जिससे लोग अपनी पीड़ाओं से उबर सकें और अपने भविष्य को आकार दे सकें. 

भुखमरी को टालने की कोशिश

सीरिया में बड़ी संख्या में मौजूद शरणार्थियों के सामने कोविड-19 का मुक़ाबला करने के माहौल में खाने-पीने के सामान की भी क़िल्लत पैदा होने का डर है. ऐसे में विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) वहाँ खाद्य सामग्री वितरित करके भुखमरी को टालने की कोशिश कर रहा है...

सीरिया: 'भरोसे और विश्वास की पुनर्बहाली व सहयोग खोल सकते हैं प्रगति का रास्ता'

सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के दूत गियर ओ पैडरसन ने कहा है कि नए भरोसे, विश्वास और अन्तरराष्ट्रीय पक्षों व सीरियाई लोगों के बीच सहयोग से आख़िरकार प्रगति का रास्ता खोला जा सकता है जिससे देश एक टिकाऊ शान्ति की तरफ़ जाने वाले रास्ते पर अग्रसर हो सकता है. विशेष दूत ने सोमवार को एक खुली वीडियो कॉन्फ्रेन्सिन्ग के ज़रिए सुरक्षा परिषद के सामने ये बात रखी.

सीरिया में 'टाइम बम' जैसे हालात, 'और उपेक्षा ना करे दुनिया'

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) मिशेल बाशेलेट ने शुक्रवार को चिंता जताई है इस्लामिक स्टेट (दाएश) सहित हिंसा में शामिल कुछ पक्ष कोविड-19 महामारी का इस्तेमाल फिर से संगठित होने और आम आबादी को निशाना बनाने के लिए कर रहे हैं. सीरिया में हिंसा में हताहत होने वाले आम लोगों की बढ़ती संख्या और मानवाधिकार हनन के मामल निर्बाध गति से जारी रहने के बीच उन्होंने यह बात कही है.    

सीरिया: अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का पालन करने में विफल रहे युद्धरत पक्ष

सीरिया में दसवें साल में प्रवेश कर चुके बर्बर गृहयुद्ध में शामिल पक्ष अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के तहत तय दायित्वों को पूरा कर पाने में विफल रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को सीरिया में बोर्ड ऑफ़ इन्क्वायरी की रिपोर्ट के सारांश की जानकारी देते हुए बताया कि लड़ाई के दौरान अस्पतालों और नागरिक प्रतिष्ठानों को नहीं बख़्शा गया है. महासचिव ने बोर्ड ऑफ़ इन्क्वायरी द्वारा तैयार 185 पन्नों की एक रिपोर्ट का सारांश सुरक्षा परिषद को भेजा है.

सीरिया: मानवीय त्रासदी व बेइंतेहा तकलीफ़ों को रोकने की पुकार

सीरिया में मौजूदा गृहयुद्ध व ख़ून-ख़राबा दसवें वर्ष में दाख़िल हो चुका है और इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने इंसानों की भीषण तकलीफ़ों की तरफ़ ध्यान खींचते हुए कहा है कि इदलिब में हाल ही में दस लाख से भी ज़्यादा लोग विस्थापित हुए हैं और मानवीय त्रासदी और ज़्यादा गहराती जा रही है.

सीरिया में हिंसक संघर्ष को तत्काल रोके जाने की अपील

पश्चिमोत्तर सीरिया में हिंसक संघर्ष में तेज़ी आने से गहराती चिंता के बीच यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सभी पक्षों से भीषण लड़ाई के कगार से वापस लौट आने की पुरज़ोर अपील की है. सीरिया के इदलिब प्रांत में तुर्की और रुस का समर्थन प्राप्त सीरियाई सुरक्षा बलों में लड़ाई तेज़ होने से हालात ख़तरनाक मोड़ पर पहुंच गए हैं.

सीरिया में हिंसा और पीड़ा के दुष्चक्र पर तुरंत विराम ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सीरिया के पश्चिमोत्तर इलाक़ों में भीषण हिंसा में फंसे लाखों आम लोगों के हालात पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा है कि दुस्वपन बन चुकी इस हिंसा को तत्काल रोकना होगा. उधर मानवीय राहत मामलों में समन्वय के लिए यूएन कार्यालय के मुताबिक सर्दी से बचाव के लिए विस्थापन का शिकार लोग अपने कपड़े और सामान जलाने को मजबूर हैं, और जल्दही संघर्षविराम नहीं हुआ तो बड़े पैमाने पर ख़ूनख़राबा होने की भी आशंका है.

सीरिया: विस्थापितों की दर्दनाक स्थिति पर मानवाधिकार प्रमुख ने जताया क्षोभ

सीरिया के पश्चिमोत्तर इलाक़ों में कंपकंपा देने वाली सर्दी में लाखों लोगों को भारी बमबारी के बीच रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि सरकारी सुरक्षा बल जैसे-जैसे अपने सैन्य अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं, लोगों को मजबूरन सुरक्षित इलाक़ों में शरण लेनी पड़ रही है और ऐसे इलाक़ों का दायरा लगातार सिमट रहा है.