शरणार्थी

वैश्विक संकट से उबरने के लिये ज़्यादा समानता बहुत ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाशेलेट ने कहा है कि पार-अटलाण्टिक दास व्यापार के प्रभावों की स्वीकार्यता, लोगों को दास बनाए जाने के चलन व उपनिवेशवाद की समीक्षा और मूल्याँकन के सन्दर्भ में बात करें तो नस्लवाद, पूर्वाग्रह व नफ़रत और असहिष्णुता के ख़िलाफ़ लड़ाई में वर्ष 2001 में हुआ डर्बन विश्व सम्मेलन एक मील का पत्थर साबित हुआ है.

बुर्किना फ़ासो में विस्थापितों के क़ाफ़िले पर वीभत्स जानलेवा हमले की तीखी भर्त्सना

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने बुर्किना फ़ासो में देश के भीतर ही विस्थापित लोगों के एक काफ़िले पर हुए हमले की तीखी भर्त्सना की है. 4 अक्टूबर की रात को हुए इस हमले में 25 लोगों की मौत हो गई.

2020 का नेनसेन शरणार्थी पुरस्कार कोलम्बिया की मानवाधिकार कार्यकर्ता को

कोलम्बिया में शरणार्थियों की भलाई के लिये काम करने और बच्चों व किशोरों को यौन शोषण से बचाने में, दो दशक तक असाधारण काम करने के लिये मेयर्लिन वरगारा पेरेज़ को नेनसेन शरणार्थी पुरस्कार के लिये चुना गया है.

ग्रीस द्वीप में नई आग लगने से बचे-कुछे आवास भी नष्ट, हज़ारों लोग बेघर

ग्रीस के एक द्वीपीय केन्द्र लेसबॉस में नए सिरे से लगी आग ने वहाँ ठहराए गए हज़ारों शरणार्थियों व प्रसावियों के लिये आवासों को नष्ट कर दिया है. इससे पहले मंगलवार शाम को भी वहाँ आग लग चुकी है जिसमें बड़ी संख्या में इन शरणार्थियों व प्रवासियों के आवासों को नुक़सान पहुँचा था.

कोविड-19: शरणार्थी बच्चों की शिक्षा पर विनाशकारी प्रभाव

शरणार्थी मामलों की संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) ने अपनी एक नई रिपोर्ट ‘Coming Together for Refugee Education’ में आशंका जताई है कि स्कूल बन्द होने, ज़्यादा फ़ीस होने या दूरस्थ शिक्षा के लिए तकनीक तक पहुँच ना होने के कारण बड़ी संख्या में शरणार्थी बच्चे अपनी पढ़ाई जारी रखने में असमर्थ होंगे. एक वीडियो रिपोर्ट...
 

यूएन रेडियो हिन्दी बुलेटिन 4 सितम्बर 2020

4 सितम्बर 2020 के साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
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म्याँमार: आगामी चुनाव समावेशी व लोकतान्त्रिक रास्ता अपनाने का एक अवसर

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने कहा है कि म्याँमार की सरकार को नवम्बर में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों को एक ऐसे अवसर के रूप में इस्तेमाल करना चाहिये जिससे एक पूर्ण समावेशी लोकतान्त्रिक मार्ग प्रशस्त हो, और जातीय अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे तकलीफ़देह बर्ताव और उनके मानवाधिकार उल्लंघन के मूलभूत कारणों का हल निकाला जा सके.

रोहिंज्या शरणार्थी संकट के मूलभूत कारणों का हल निकालना होगा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रोहिंज्या शरणार्थी संकट की तरफ़ ज़्यादा ध्यान दिये जाने का आहवान करते हुए कहा है कि इस संकट की जड़ में बैठे कारणों का हल निकाले की ज़रूरत है. ध्यान रहे कि रोहिंज्या शरणार्थी संकट अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है. 

रोहिंज्या शरणार्थी, 3 साल बाद, पहले से कहीं ज़्यादा असहाय

संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों का कहना है कि तीन साल पहले म्याँमार में रहने वाले रोहिंज्या लोगों को उनके घरों से बाहर निकाल दिया गया था जिसके बाद उन्हें सीमा पार बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी थी. रोहिंज्या शरणार्थी संकट के तीन वर्ष गुज़र जाने के बाद भी बेघर रोहिंज्या महिलाएँ, पुरुष और बच्चे पहले से कहीं ज़्यादा असहाय हालात में हैं.

लेबनान: जीवितों की तलाश के बीच विशाल ज़रूरतों की चेतावनी 

लेबनान के बेरूत शहर में भारी तबाही का सबब बनने वाले भीषण विस्फोट के बाद यूएन एजेंसियों ने शुक्रवार को कहा है कि मौजूदा हालात में ज़रूरतों का दायरा और स्तर बहुत व्यापक हैं और तत्काल व्यापक सहायता उपलब्ध करानी होगी. इस विस्फोट में अब तक 150 से ज़्यादा लोगों के मौत हो चुकी है और हज़ारों लोग घायल व बेघर हुए हैं. राहत और बचाव अभियान के बीच हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.