शरणार्थी

विश्व शरणार्थी फ़ोरम: मदद व्यवस्था में जान फूँकने की पुकार

विश्व को शरणार्थियों की परिस्थितियों का सामना करने के तरीक़ों में बदलाव लाने की ज़रूरत है और उन देशों की मदद करने के लिए ज़्यादा क़दम उठाने होंगे जो अपने यहाँ शरणार्थियों को पनाह देते हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जिनीवा में विश्व शरणार्थी मंच में मंगलवार को ये पुकार लगाई.

तीसरी कमेटी: मानवाधिकार संरक्षण की ज़िम्मेदारी

मादक पदार्थों पर नियंत्रण से लेकर, इंडीजिनस यानी आदिवासी लोगों के अधिकारों और आतंकवाद निरोधक उपायों तक, इन सभी हालात में मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी है - संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति पर. तीसरी समिति को सामाजिक, मानवीय सहायता और सांस्कृतिक मामलों की समिति भी कहा जाता है. इसके सामने जटिल समस्याओं और चुनौतियों की एक लंबी सूची है जिन पर ये समिति नीतियाँ व कार्यक्रम बनाती है.  हर साल सितंबर में जब विश्व नेता यूएन मुख्यालय में एकत्र होते हैं तो उनके विचारों और संकल्पों को हक़ीक़त में बदलने के लिए क्या-क्या किया जाता है, इस बारे में हमारी श्रंखला की अगली कड़ी में प्रस्तुत है महासभा की तीसरी समिति के बारे में... 

2020 में सहायता के ज़रूरतमंदों की होगी रिकॉर्ड संख्या

संयुक्त राष्ट्र की आपदा राहत एजेंसी के प्रमुख ने कहा है कि वर्ष 2020 में दुनिया भर में लगभग 16 करोड़ 80 लाख लोगों को मदद की ज़रूरत होगी और ये लोग 50 से भी अधिक देशों में मौजूद होंगे. एजेंसी के प्रमुख मार्क लोकॉक ने इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मदद ज़रूरतों को पूरा करने के लिए 29 अरब डॉलर की मानवीय सहायता रक़म जुटाने का आहवान किया है.

हज़ारों सीरियाई लोग असुरक्षा के बीच इराक़ पहुँचने को मजबूर

संयुक्त राष्ट्र ने शुक्रवार को बताया है कि तुर्की की सेनाओं और सीरिया समर्थित कुर्दिश मिलिटरी के बीच युद्धक गतिविधियाँ रोकने का समझौता होने के बावजूद - सीरिया के उत्तरी हिस्से में तुर्की की सीमा से सटे इलाक़ों में बमबारी और युद्धक झड़पें जारी हैं जिनकी वजह से हज़ारों लोग शांति व सुरक्षा की तलाश में वहाँ से जा रहे हैं.

राष्ट्रविहीनों का सहारा बनने वाला

राष्ट्रविहीनता के शिकार लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे किर्गिस्तान के एक वकील अज़ीज़बेक अशुरोफ़ को संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के ‘2019 नेन्सेन रैफ़्यूजी अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है. अशुरोफ़ ने पूर्व सोवियत संघ के विघटन के बाद 10 हज़ार राष्ट्रविहीन लोगों को किर्गिस्तान की नागरिकता दिलाने में मदद की है.

ग्रीस के द्वीपों पर शरणार्थियों की संख्या बढ़ने से चिंता

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने कहा है कि ग्रीस के द्वीपों पर शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए बनाए गए केंद्रों पर ज़बरदस्त भीड़ है जिससे वहां हालात बिगड़ने का ख़तरा पैदा हो गया है. इन हालात के मद्देनज़र यूएन एजेंसी ने ग्रीस सरकार से अपील की है कि शरण मांग रहे लोगों की जल्द सुनवाई करते हुए उन्हें उन द्वीपों से तत्काल देश के अन्य हिस्सों में भेजा जाना चाहिए.

लीबिया: भूमध्य सागर में फँसे लोगों के लिए अहम यूरोपीय समझौता

संयुक्त राष्ट्र की दो प्रमुख एजेंसियों के अध्यक्षों ने लीबिया में शरणार्थियों और प्रवासियों को मनमाने तरीक़े से बंदी बनाए जाने पर तुरंत रोक लगाने का आहवान किया है. भूमध्य सागर के रास्ते बेहतर मंज़िल की तलाश में निकलने वाले लोगों को एक नई वितरण प्रणाली के ज़रिए सुरक्षित विकल्प मुहैया कराने के वास्ते यूरोपीय संघ के देशों के बीच हुए एक समझौते के बाद ये आहवान किया गया है.

कॉक्सेस बाज़ार में घातक होते मॉनसून से निपटने की मुस्तैदी

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने कहा है कि बांग्लादेश में चार जुलाई से लगातार हो रही बारिश की वजह से कॉक्सेस बाज़ार का शरणार्थी शिविर बुरी तरह प्रभावित हुआ है जिससे भारी ढाँचागत नुक़सान होने के साथ-साथ अनेक लोग हताहत भी हुए हैं. बहुत नाज़ुक हालात का सामना कर रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है जो शिविरों में ही नई ज़मीन पर बनाए गए हैं.

भारी बारिश और बाढ़ से रोहिंज्या शरणार्थियों की मुश्किलें बढ़ीं

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) ने कहा है कि बांग्लादेश के कॉक्सेज़ बाज़ार शरणार्थी शिविर में रह रहे रोहिंज्या शरणार्थियों के सामने भारी बारिश के बाद बाढ़ का ख़तरा पैदा हो गया है और वहाँ बने हुए स्कूलों और शिक्षा केंद्रों को नुक़सान पहुँचने से हज़ारों बच्चों की शिक्षा भी बाधित हो गई है.

फ़लस्तीनी शरणार्थी एजेंसी की उपलब्धियां 'हमारी साझा सफलता'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाना ज़रूरी है कि फ़लस्तीनी शरणार्थियों को राहत पहुंचाने में जुटी यूएन एजेंसी (UNRWA) को अपना काम लगातार जारी रखने के लिए मदद मिलती रहे. उन्होंने कहा कि एजेंसी के प्रयासों को सभी के लिए साझा दायित्व और साझा सफलता के तौर पर देखा जाना चाहिए.