शिशु

माँ के दूध के अनगिनत फ़ायदे, फिर भी बेपरवाही

इसमें ज़रा भी शक़ नहीं है कि माँ का दूध बच्चों के लिए बहुत से फ़ायदों वाला यानी अमृत समान होता है मगर दुनिया भर में माँ बनने वाली महिलाओं को नर्सिंग की समुचित सुविधाएँ मुहैया कराने वाली नीतियाँ मौजूद नहीं हैं, विशेष रूप में कामकाज के स्थानों पर. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) की अध्यक्ष हेनरिएटा फ़ोर ने बुधवार को कही.

नौनिहालों और माता-पिता को बेहतर माहौल मिलना ज़रूरी

कामकाज और पारिवारिक जीवन के बीच स्वस्थ संतुलन क़ायम करने और दोनों स्थानों पर आनंदपूर्वक जीवन जीने में सहायक नीतियाँ बनाने में अनेक विकसित और धनी देश बहुत पीछे हैं. जबकि स्वीडन, नॉर्वे, आइसलैंड, एस्तोनिया और पुर्तगाल ऐसे देश हैं जहाँ कामकाजी जीवन के साथ परिवारिक जीवन जीने और माता-पिता के लिए छोटे बच्चों के साथ ज़्यादा समय बिताना आसान होता है.

भारी-भरकम ख़र्च से जच्चा-बच्चा को है गंभीर ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने कहा है कि बहुत महंगी स्वास्थ्य सेवाओं और देखभाल की वजह से बहुत सी महिलाओं को बच्चे को जन्म देने से पहले और बाद में अक्सर जच्चा-बच्चा दोनों का ही जीवन ख़तरे में डालना पड़ता है. यूनीसेफ़ ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी है जिसमें बताया गया है कि बहुत सी गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता पड़ने पर ना तो कोई डॉक्टर मिलता है और ना ही कोई नर्स या दाई उपलब्ध होती है.

शिशु विकास के लिए माता-पिता की देखभाल ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने दुनिया भर के नेताओं का आहवान किया है कि वो पारिवारिक जीवन को आसान और बेहतर बनाने वाली नीतियाँ बनाएँ ताकि माता-पिता और अभिभावकों को अपने बच्चों को जीवन की अच्छी शुरूआत देने में मदद मिल सके. इस बारे में और ज़्यादा जागरूकता बढ़ाने के लिए यूनीसेफ़ ने जून महीने को माता-पिता व अभिभावक महीना घोषित किया है.