शिक्षा

एक डिजिटल घाटी: 1.3 अरब बच्चों के पास घर पर शिक्षा के लिये इण्टरनेट नहीं

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में स्कूल जाने की उम्र – 3 से 17 वर्ष - के बच्चों की लगभग दो तिहाई संख्या – यानि लगभग 1 अरब 30 करोड़ बच्चों के पास अपने घरों पर इण्टरनेट कनेक्शन नहीं है, जिसके कारण वो ऐसे महत्वपूर्ण कौशल सीखने से वंचित हो रहे हैं जिनकी आधुनिक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा के लिये ज़रूरत होती है.

विश्व बाल दिवस: हर बच्चे के लिये एक बेहतर भविष्य की कल्पना

शुक्रवार, 20 नवम्बर को ‘विश्व बाल दिवस’ के अवसर पर दुनिया भर में समाजों से हर बच्चे के लिये एक बेहतर भविष्य की फिर से कल्पना करने की पुकार लगाई गई है. वैश्विक समुदाय का आहवान किया गया है कि हर बच्चे के लिये ऐसी परिस्थितियों का निर्माण करना होगा जिसमें सभी बच्चे फल-फूल सकें. 

महामारी लम्बी खिंचने से एक पूरी पीढ़ी के भविष्य पर जोखिम

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनीसेफ़ ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से संक्रमित होने वाले बच्चों में लक्षण तो मामूली ही नज़र आ रहे हैं, लेकिन संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, साथ ही उनकी शिक्षा और पोषण पर भी दीर्घकालीन प्रभाव बढ़ रहा है, और युवाओं की एक पूरी पीढ़ी का स्वास्थ्य व रहन-सहन उनके पूरे जीवन को ही बदल देने वाला होने की आशंका है. 

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलेटिन 6 नवम्बर 2020

इस बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...

ऑडियो -
17'2"

क़रीब एक तिहाई बच्चे, स्कूलों में होते हैं - हिंसा व बदमाशी के शिकार

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दुनिया भर में बच्चों को स्कूलों में हिंसा और डराने-धमकाने यानि बदमाशी का सामना करना पड़ रहा है, हर तीन में से एक छात्र को कम से कम एक महीने में हमलों का निशाना बनाया जाता है, और 10 में से एक बच्चे को, साइबर बदमाशी का भी सामना करना पड़ता है.

संघर्षों में फँसे बच्चों और लोगों की सुरक्षा की सख़्त ज़रूरत

बच्चों और सशस्त्र संघर्ष मामलों के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत वर्जीनिया गाम्बा ने कहा है कि हथियारबन्द संघर्षों में शैक्षणिक और स्वास्थ्य ठिकानों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण बच्चों और मानवीय सहायता कर्मियों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है.

कोविड-19 दौरान शिक्षा - एक लड़की की नज़र से

कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों के तहत 194 देशों में राष्ट्रव्यापी तालाबन्दी में लगभग एक अरब 60 करोड़ बच्चों का जीवन भी प्रभावित हुआ है. दुनिया भर के लगभग 90 प्रतिशत छात्र अप्रैल के शुरू से ही स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. आशंका है कि बहुत सी लड़कियाँ शायद कभी भी स्कूली कक्षाओं में वापस नहीं जा पाएँगी, क्योंकि परिवार अपने आर्थिक बोझ कम करने के लिये उन्हें बाल विवाह या बाल श्रम के गर्त में धकेल सकते हैं. 

 

इस वीडियो में मेडागास्कर की 16 वर्षीया अंतासा कहती हैं, "लड़कियों को स्कूल नहीं भेजने का विचार, इन इलाक़ों में वास्तव में संस्कृति का हिस्सा बन गया है".
 

(यह वीडियो, लड़कियों ने ख़ुद बनाकर, अपने विचार, अपने शब्दों में व्यक्ति किये हैं). 

महामारी - एक लड़की की नज़र से

कोविड-19 महामारी से दुनिया भर में करोड़ों बच्चों पर असर पड़ा है. स्कूल बन्द होने और वायरस के प्रसार को रोकने के लिये अपनाए गए तालाबन्दी और अन्य उपायों ने लाखों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,महत्वपूर्ण टीकों और पौष्टिक आहार से दूर कर दिया है. ख़ासतौर पर, लड़कियों के लिये स्थिति और भी ज़्यादा ख़राब हो गई है. इस तरह की संकट स्थितियों के दौरान लिंग आधारित हिंसा और हानिकारक प्रथाओं का ख़तरा बढ़ जाता है – विशेषकर ग़रीब और कमज़ोर वर्ग की लड़कियों के लिये. अनुमानों के मुताबिक, स्कूल फिर से खुलने पर भी शायद बहुत सी लड़कियाँ फिर कभी भी वापस विद्यालय ना जा सकें या फिर हालात से मजबूर होकर बाल विवाह का शिकार हो जाएँ. 

यूएन न्यूज़ हिन्दी बुलेटिन 30 अक्टूबर 2020

 इस सप्ताह के बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
महिला सशक्तिकरण के लिये प्रस्ताव 1325 की 20वीं वर्षगाँठ, महिला नेतृत्व बढ़ाए जाने का आहवान.
फ्रांस में एक चर्च में हुए हमले की तीखी निन्दा, समुदायों के बीच भाईचारा व सम्मान क़ायम रखने की पुकार.

ऑडियो -
18'51"

कोविड-19 ने निर्धन देशों में बच्चों को किया चार महीने की स्कूली पढ़ाई से वंचित

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 ने निर्धनतम देशों में स्कूली बच्चों को लगभग चार महीने की पढ़ाई-लिखाई से वंचित कर दिया है जबकि उच्च आय वाले देशों में बच्चों की छह हफ़्ते की पढ़ाई पर ही असर पड़ा है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवँ सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) और विश्व बैंक (World Bank) की एक साझा रिपोर्ट में यह बात उजागर हुई है.