शान्तिरक्षा

दूसरा मौक़ा - विवियाना की कहानी

अर्जेंटीना नेशनल जेण्डरमेरी UNVMC, कोलम्बिया की अन्तरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक सार्जेण्ट, विवियाना कैबरेरा लाइबेरिया में एक संयुक्त राष्ट्र मिशन पर काम कर रही थीं, जब उनके पति एक दुर्घटना का शिकार हो गए और उन्हें घर वापस जाना पड़ा. एक साल बाद, उन्हें फिर मिशन में शामिल होने का मौक़ा मिला. पति की यादों से मिले प्रोत्साहन और अपनी लगन से उन्होंने अपने सपने पूरे करने के लिये, एक बार फिर उड़ान भरी. इस वीडियो में देखिये - विवियाना की कहानी...

बाधाओं से परे: फ़ातिमा ख़ामिस का शान्ति मिशन

सूडानी मूल की फ़ातिमा ख़ामिस  मध्य अफ्रीकी गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र के मिशन में असाधारण योगदान कर रही हैं. कड़ी परम्पराओं वाले समाज में शिक्षा के लिये रास्ता बनाना और एक इजीनियर के रूप में काम करना फ़ातिमा ख़ामिस के लिये आसान नहीं रहा है, मगर उन्होंने बहुत सी बाधाएँ पार की हैं. उनकी कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी - शान्ति ही मेरा मिशन है - वीडियो श्रंखला में...

शान्ति की ख़ातिर ख़ास करने की चाह: हुमा ख़ान

दक्षिण सूडान में तैनात, UNMISS की वरिष्ठ महिला सुरक्षा सलाहकार, हुमा ख़ान ने विभिन्न देशों की नौ अन्य महिलाओं सहितत उस वीडियों श्रृंखला में जगह बनाई है, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘शान्ति ही मेरा मिशन है’ ’नामक अभियान के तहत जारी की गई है. 31 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 की 20वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में यह अभियान 1 अक्टूबर से शुरू किया गया. शान्तिरक्षक की भूमिका में हुमा ख़ान ने क्या-कुछ सीखा, क्या योगदान किया – देखिये उनकी ज़ुबानी...

महिलाएँ, शान्ति व सुरक्षा एजेण्डा को आगे बढ़ाने के लिये यूएन के अथक प्रयास

सशस्त्र हिंसक संघर्ष का महिलाओं व लड़कियों पर अनुपात से ज़्यादा असर होता है और इसके मद्देनज़र संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा अभियानों में महिलाओं की पूर्ण, समान व अर्थपूर्ण भागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है. यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने शान्तिरक्षा अभियानों में महिलाएँ, शान्ति व सुरक्षा के मुद्दे पर आयोजित एक गोलमेज़ चर्चा में यह बात कही है. 

शान्ति ही मेरा मिशन है: रागिनी कुमारी

संयुक्त राष्ट्र के शान्ति अभियानों और विशेष राजनैतिक मिशनों में महिलाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है. महिलाओं के योगदान को रेखांकित करती एक श्रृंखला जिसमें पहला वीडियो दक्षिण सूडान में तैनात, UNMISS की मूल्याँकन टीम लीडर, रागिनी कुमारी का... ‘शान्ति ही मेरा मिशन है’ ’नामक यह अभियान, 31 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 की 20वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में 1 अक्टूबर से शुरू किया गया है. देखिये, रागिनी कुमारी की कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी... (वीडियो)

‘दुनिया को बदलने से पहले ख़ुद को बदलें’

कैप्टन तन्वी शुक्ला काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य में यूएन मिशन (MONUSCO) में भारतीय दल की महिला टीम की कमाण्डर हैं. कैप्टन शुक्ला के मुताबिक शान्तिरक्षा मिशन का हिस्सा बनने पर उन्हें बहुत कुछ सीखने, विविध पृष्ठभूमियों से आए लोगों से मिलने-जुलने और स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित करने का अवसर मिला है. उनका कहना है कि हमें पहले ख़ुद में वो बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए जैसा कि हम दूसरों में देखना चाहते हैं. 

शान्तिरक्षा में महिलाओं का बढ़ता योगदान

संयुक्त राष्ट्र की शान्तिरक्षा सुरक्षा कार्यों की आधारशिला है और महिला शान्तिरक्षक इसकी सफलता की कुन्जी हैं. आज के दौर में संयुक्त राष्ट्र शान्तिरक्षा में नेतृत्व के पदों पर पहले से कहीं ज़्यादा महिलाएँ आसीन हैं. इसमें महिलाएँ सेना, पुलिस और नागरिक समाज का अंग बनकर संयुक्त राष्ट्र में कार्यरत हैं. संयुक्त राष्ट्र शान्ति व्यवस्था, “महिला, शान्ति और सुरक्षा” पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है. इसके तहत महिला अधिकारों को पूर्ण रूप से पाने के लिए महिलाओं को निर्णायक भूमिका में रहना होगा और अपने देशों में शान्तिरक्षकों की भूमिका भी निभानी होगी. निर्णय लेने में महिलाओं का सार्थक समावेश प्रभावशीलता को बढ़ाता है व नए दृष्टिकोण और समाधान उत्पन्न करता है, अधिक संसाधन पैदा करता है और हमारे प्रयासों को मज़बूत करता है.

 

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शान्तिरक्षा अभियानों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का आहवान

‘अन्तरराष्ट्रीय यूएन शान्तिरक्षक दिवस’ के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के उन सभी शान्तिरक्षकों को सम्मान के साथ याद किया जा रहा है जिन्होंने वर्ष 1948 से विश्व शान्ति व सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है. इस वर्ष यूएन शान्तिरक्षक दिवस पर शान्तिरक्षा अभियानों में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करते हुए उनकी भागीदारी बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है.