शांति

2020 में सहायता के ज़रूरतमंदों की होगी रिकॉर्ड संख्या

संयुक्त राष्ट्र की आपदा राहत एजेंसी के प्रमुख ने कहा है कि वर्ष 2020 में दुनिया भर में लगभग 16 करोड़ 80 लाख लोगों को मदद की ज़रूरत होगी और ये लोग 50 से भी अधिक देशों में मौजूद होंगे. एजेंसी के प्रमुख मार्क लोकॉक ने इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मदद ज़रूरतों को पूरा करने के लिए 29 अरब डॉलर की मानवीय सहायता रक़म जुटाने का आहवान किया है.

यमन में राजनैतिक समाधान के लिए उम्मीदें नज़र आईं

यमन में जारी संकट का राजनैतिक समाधान निकालने के लिए प्रयासों ने गति पकड़ी है और संघर्षरत पक्षों के बीच अनेक मुद्दों पर समझौते होने के आसार नज़र आ रहे हैं. यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद को ताज़ा हालात की जानकारी देते हुए ये बात कही है. 

लीबिया में अब भी मानवाधिकार उल्लंघन, हिंसा और अत्याचारों का सिलसिला जारी

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने सुरक्षा परिषद को बताया है कि लीबिया में क़रीब एक दशक पहले जब से न्यायालय ने काम शुरू किया है तब से अभी तक हिंसा के दौर, अत्याचार और क़ानून की बेपरवाही का माहौल ज्यों का त्यों बना हुआ है. अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की मुख्य अभियोजक फ़तू बेनसूदा ने बुधवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट सुरक्षा परिषद में पेश करते हुए कहा कि “लीबिया में हिंसा में बढ़ोत्तरी हुई है.”

यूएन वार्षिक सर्वश्रेष्ठ महिला पुलिस अधिकारी सम्मान - सेनेगल अधिकारी को

महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को रोकने के प्रयासों के लिए 2019 की संयुक्त राष्ट्र सर्वश्रेष्ठ महिला पुलिस अधिकारी का पुरस्कार मेजर सेयनाबोऊ डीयूफ़ को मिलने पर शीर्ष पुलिस सलाहकार लुइ कार्रिल्हो का कहना था – वो हम सभी के लिए एक प्रेरणा हैं. इस पुरस्कार के विजेताओं की घोषणा शुक्रवार, 1 नवंबर को की गई जिसमें मेजर सेयनाबोऊ डीयूफ़ विजेता रहीं.

हज़ारों सीरियाई लोग असुरक्षा के बीच इराक़ पहुँचने को मजबूर

संयुक्त राष्ट्र ने शुक्रवार को बताया है कि तुर्की की सेनाओं और सीरिया समर्थित कुर्दिश मिलिटरी के बीच युद्धक गतिविधियाँ रोकने का समझौता होने के बावजूद - सीरिया के उत्तरी हिस्से में तुर्की की सीमा से सटे इलाक़ों में बमबारी और युद्धक झड़पें जारी हैं जिनकी वजह से हज़ारों लोग शांति व सुरक्षा की तलाश में वहाँ से जा रहे हैं.

दुनिया भर में बिगड़ रही है मानवाधिकारों की स्थिति: मानवाधिकार उच्चायुक्त

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को बताया है कि दुनिया भर में बहुपक्षवाद के लिए चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं जिन्हें नकारा नहीं जा सकता, अलबत्ता मानवाधिकारों के सार्वभौमिक घोषणा-पत्र में हुई ऐतिहासिक सहमतियों को मज़बूत करने के लिए सदस्य देशों के साथ मिल-जुलकर काम किया जा सकता है. संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष मानवाधिकार पदाधिकारी मिशेल बाशेलेट ने मंगलवार को महासभा की तीसरी कमेटी के सामने वार्षिक रिपोर्ट पेश करते हुए ये बात कही. इस कमेटी पर दुनिया भर में सामाजिक, मानवीय और सांस्कृतिक मुद्दों से निपटने की ज़िम्मेदारी है.

सीरिया में सैन्य तनाव बढ़ने पर आम लोगों की सुरक्षा की चिंता

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) ने गुरूवार को कहा है कि सीरिया के पूर्वोत्तर इलाक़े में हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव के कारण लाखों लोगों को सुरक्षा की ख़ातिर वो इलाक़ा छोड़ना पड़ा है. इससे एक दिन पहले यानी बुधवार को ही तुर्की ने सीरिया में कुछ हवाई औरर ज़मीनी हमले किए थे.

अहिंसा दिवस पर महात्मा गाँधी के शांति संदेश की गूंज

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार को 'अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस' के अवसर पर अपने संदेश में कहा है कि महात्मा गांधी का जीवन दर्शन आज भी विश्व में प्रासंगिक बना हुआ है और यह संयुक्त राष्ट्र के कामकाज में भी परिलक्षित होता है – आपसी समझ, टिकाऊ विकास, युवाओं के सशक्तिकरण और विवादों के शांतिपूर्ण ढंग से निपटारे के लिए किए जाने वाले प्रयासों में.

लैफ़्टिनेंट जनरल अभिजीत गुहा हुदायदाह समझौते के मिशन प्रमुख नियुक्त

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने भारतीय मूल के सैन्य अधिकारी लैफ़्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) अभिजीत गुहा को यमन में हुदायदाह समझौते को सहायता देने वाले संयुक्त राष्ट्र के मिशन के प्रमुख नियुक्त किया है. उनकी नियुक्ति संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 2452 (2019) और 2481 (2019) के तहत की गई है. लैफ़्टिनेंट जनरल अभिजीत गुहा को री-डेप्लॉयमेंट कॉर्डिनेशन कमेटी (आरसीसी) का अध्यक्ष भी बनाया गया है.

 

महात्मा गांधी का पथप्रदर्शक संदेश आज भी प्रकाशमान है - उपमहासचिव

"एक शांतिपूर्ण और टिकाऊ विश्व के लिए महात्मा गाँधी का चिरमय व पथप्रदर्शक संदेश आज भी प्रकाशमान है. उनका जीवन अहिंसक और सामाजिक सौहार्द्र के समय में नैतिक साहस की प्रेरणा देता है और हमें याद दिलाता है कि प्रभावशाली लोगों की गतिविधियाँ और आंदोलन किस तरह सामाजिक बदलावों के लिए प्रेरणास्रोत हो सकते हैं."