सशस्त्र गुट

माली में विस्थापितों के लिए बनाए गए एक शिविर में बच्चों को सदमे से उबारने के लिए समर्थन प्रदान किया जा रहा है.
© UNICEF/Tiécoura N’Daou

मध्य सहेल: हिंसक टकराव में फँसे एक करोड़ बच्चों की ज़िन्दगियों पर जोखिम

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने शुक्रवार को आगाह किया है कि मध्य सहेल क्षेत्र में, ‘बर्बर’ हिंसक टकराव के कारण तीन देशों - बुर्कीना फ़ासो, माली और निजेर में एक करोड़ बच्चों को तत्काल, मानवीय सहायता की आवश्यकता है. यूनीसेफ़ के अनुसार, जलवायु व्यवधान से प्रभावित इस क्षेत्र में सशस्त्र संघर्षों में फँसे ज़रूरतमन्द बच्चों की यह संख्या, वर्ष 2020 की तुलना में दोगुने से भी अधिक है.

 

यूक्रेन में युद्ध के कारण बड़ी संख्या में बच्चों और उनके परिजनों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.
© UNICEF/Aleksey Filippov

हिंसक टकराव में फँसे बच्चों के लिए बेहतर संरक्षण उपायों की मांग

बच्चों और सशस्त्र संघर्षों पर यूएन महासचिव की विशेष प्रतिनिधि वर्जीनिया गाम्बा ने सोमवार को सुरक्षा परिषद में बताया कि युद्ध व हिंसक संघर्ष से प्रभावित बच्चों के अधिकार हनन की रोकथाम के लिए जल्द से जल्द कारगर उपाय अपनाने होंगे.

यूक्रेन में बच्चों के एक अस्पताल में भर्ती एक लड़की, जोकि बमबारी में घायल हुई थी.
© UNICEF/Tetiana Bundzilo

युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में बाल अधिकार हनन के हर दिन, औसतन 71 मामले 

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की एक नई रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि विश्व भर में, हिंसक संघर्ष व टकराव से प्रभावित इलाक़ों में युद्धरत पक्षों द्वारा बच्चों के विरुद्ध, हर दिन अधिकार हनन के औसतन 71 गम्भीर मामले घटित हो रहे हैं.

दक्षिण सूडान में, बच्चों को सशस्त्र समूहों के चंगुल से छुड़ाने के लिये हुए एक समारोह के दौरान, एक बाल सैनिक, लकड़ी के एक गट्ठे पर बैठा हुआ (2018). कोविड-19 महामारी के कारण सशस्त्र गुटों द्वारा बच्चों की भर्ती किये जाने का जोखिम और भी ज़्यादा बढ़ गया है
UNICEF/Sebastian Rich

कोविड के कारण, बच्चों को संघर्षों में इस्तेमाल करने के ख़तरे को मिला ईंधन

संयुक्त राष्ट्र और योरोपीय संघ के वरिष्ठ अधिकारियों ने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा है कि बच्चों के कोरोनावायरस महामारी के प्रभाव के कारण, सशस्त्र गुटों और सशस्त्र बलों के हत्थे चढ़ जाने का जोखिम और भी ज़्यादा बढ़ गया है. शुक्रवार, 12 फ़रवरी को मनाए जाने वाले, 'बाल सैनिकों के इस्तेमाल के विरुद्ध अन्तरराष्ट्रीय दिवस' पर, ये चिन्ता व्यक्त की गई है.