रोज़गार

भारत: अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को शिक्षा व कामकाज से जोड़ने का प्रयास

भारत में विश्व बैंक की मदद से ‘नई मंज़िल’ नामक एक कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत अल्पसंख्यक समुदाय के ऐसे युवाओं को, कौशल प्रशिक्षण के ज़रिये आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है जो शिक्षा से वंचित रह जाते हैं. ‘नई मंज़िल’ योजना पर विश्व बैंक के शिक्षा विशेषज्ञ, मेघना शर्मा, प्रद्युम्न भट्टाचार्जी और मार्गुराइट क्लार्क का संयुक्त ब्लॉग...

विषमतापूर्ण हालात में जीवन गुज़ारते विकलांगजन: कुछ अहम जानकारी

एक अनुमान के अनुसार, विश्व आबादी का क़रीब 15 प्रतिशत, यानि एक अरब से अधिक लोग विकलांग हैं, यह दुनिया का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है. आमजन की तुलना में विकलांग व्यक्तियों के लिये जीवन चुनौतियों भरा है, और उन्हें स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं, कार्यस्थलों, मनोरंजन गतिविधियों, खेलकूद सहित, जीवन के हर क्षेत्र में अनेक अवरोधों का सामना करना पड़ता है. एक नज़र कुछ अहम तथ्यों व आँकड़ों पर...

कोविड-19: महामारी के कारण, अनुमान से अधिक रोज़गारों का नुक़सान

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के एक नए विश्लेषण के अनुसार, कोरोनावायरस संकट की वजह से, वर्ष 2021 के दौरान कामकाजी घण्टों में हुआ नुक़सान, पहले जताए गए अनुमानों से कहीं अधिक है. रिपोर्ट में सचेत किया गया है कि विकसित और विकासशील देशों में पुनर्बहाली, दो अलग-अलग रास्तों व रफ़्तार पर आगे बढ़ रही हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिये जोखिम पैदा हो रहा है. 

भारत में कोविड-19 और महिलाएँ – कुछ अहम प्रश्नों के उत्तर 

भारत में हाल के महीनों के दौरान, कोविड-19 महामारी के फैलाव की दूसरी लहर अपने साथ अभूतपूर्व बर्बादी लेकर आई है. महिलाओं और लड़कियों सहित, देश के निर्धनतम और निर्बलतम समुदायों को, आर्थिक चुनौतियों पर पार पाने और स्वास्थ्य संकट के दंश को कम करने में अपार मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. 

कोविड से पुनर्बहाली के दौरान, कम ही महिलाएँ लौट पाएंगी रोज़गार में

संयुक्त राष्ट्र की श्रम एजेंसी – ILO की सोमवार को जारी एक नई अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान जो रोज़गार व आमदनी वाले कामकाज ख़त्म हो गए, संकट से उबरने यानि पुनर्बहाली के प्रयासों के दौरान फिर से रोज़गार व आमदनी वाले कामकाज हासिल करने वाली महिलाओं की संख्या, पुरुषों की तुलना में कम होगी. 

कोरोनावायरस संकट: घरेलू कर्मचारियों के लिये कठिन हुए हालात

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने कहा है कि  कोविड-19 के कारण, दुनिया भर में घरेलू कर्मचारियो पर गहरा असर हुआ है. उनके रोज़गार ख़त्म हो गए हैं और अन्य सैक्टरों की तुलना में कामकाजी घण्टों में भी ज़्यादा गिरावट दर्ज की गई है.

कोविड-19 के दौर में कामकाजी सुरक्षा का मुद्दा

कोविड-19 महामारी के कारण, दुनिया भर में, अपने घरों से ही काम करने वालों की संख्या बेतहाशा बढ़ी है, जिसने रोज़गार देने वालों के लिये इस ज़रूरत पर ध्यान केन्द्रित कर दिया है कि वो कर्मचारियों व कामगारों के लिये सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करें. 28 अप्रैल को, कार्यस्थलों पर सुरक्षा व स्वास्थ्य के लिये विश्व दिवस के अवसर पर, यहाँ प्रस्तुत है एक आकलन कि संयुक्त राष्ट्र, लोगों को, उनके कामकाज के दौरान समुचित सुरक्षा सुनिश्चित करने में, रोज़गार देने वालों और सरकारों की, किस तरह मदद कर रहा है...

एशिया-प्रशान्त: प्रवासियों की अहम भूमिका की ओर ध्यान

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने एशिया और प्रशान्त क्षेत्र में, अर्थव्यवस्थाओं और समाजों में, प्रवासियों के योगदान को रेखांकित करते हुए, देशों का आहवान किया है कि उन्हें अपनी सीमाओं के भीतर रहने वाले प्रवासियों के लिये भी ये सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें भी कोरोनावायरस से निपटने के राष्ट्रीय कार्यक्रमों में जगह मिले.

डिजिटल प्रवासन: शरणार्थियों व प्रवासियों के लिये आर्थिक जीवनरेखा

कोविड-19 महामारी के कारण, एक तरफ़ तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को भीषण झटका लगा है, वहीं ऑनलाइन वाणिज्य में कुछ उछाल देखा गया है. संयुक्त राष्ट्र के समर्थन से, दुनिया भर में एक ऐसा ऑनलाइन कार्यक्रम चलाया गया है जिसमें, शरणार्थियों और प्रवासियों को ऐसे उपकरण और ग्राहक मुहैया कराने में मदद की जा रही है जिनकी उन्हें, अपने कारोबार शुरू करने और अपनी आजीविकाएँ बेहतर बनाने के लिये, ज़रूरत है.

भारत: जम्मू कश्मीर में बदलावों से 'अल्पसंख्यकों के अधिकार कमज़ोर होने का जोखिम'

संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चिन्ता जताई है कि भारत के जम्मू कश्मीर राज्य की स्वायत्तता समाप्त किये जाने और नए क़ानून लागू किये जाने से मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यक समूहों की राजनैतिक भागीदारी का स्तर घटने की आशंका है. मानवाधिकार विशेषज्ञों ने गुरूवार को जारी अपने वक्तव्य में, भारत सरकार से राज्य की जनता के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है.