रोहिंज्या

कोविड-19: रोहिंज्या शरणार्थी शिविरों में घनी आबादी है चिन्ता का सबब

बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में घनी आबादी वाले रोहिंज्या शरणार्थी शिविरों में कोरोवनावायरस संक्रमण के फैलाव के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर चार हो गई है जिससे चिन्ताएँ बढ़ गई हैं. यूएन एजेंसियों ने आठ लाख 60 हज़ार से ज़्यादा रोहिंज्या शरणार्थियों को पनाह देने वाले इन शिविरों में कोविड-19 से बचाव के लिए स्वास्थ्य तैयारियाँ और बचाव उपाय तेज़ कर दिए हैं. 

रोहिंज्या पर समुद्री मुसीबत, हमदर्दी और दयालुता दिखाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी – UNHCR आश्रय स्थल के ज़रूरतमन्दों के प्रति हमदर्दी और दयालुता दिखाने की पुकार लगाई है. एजेंसी ने ये आहवान उस घटना के बाद किया है जिसमें म्याँमार से सुरक्षा के लिए निकले कम से कम 30 रोहिंज्या लोगों की बंगाल की खाड़ी में डूब जाने से मौत हो गई. ये लोग उस नाव में सवार थे जो लगभग दो महीने से समुद्र में ही ठहरी हुई थी क्योंकि उसे किसी देश में किनारे पर पहुँचने की इजाज़त नहीं मिली थी.

म्यांमार में लोकतंत्र है 'ढलान' पर, मानवाधिकार विशेषज्ञ की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ यैंगही ली ने कहा है कि म्यांमार में हर दिन हो रही लड़ाई, इंटरनेट पर नियंत्रण की घटनाएं और रिपोर्टिंग पर लगी पाबंदियां दर्शाती है कि देश में लोकतांत्रिक शासन ढलान के रास्ते पर है.  

'म्याँमार की तरफ़ से रोहिंज्या शरणार्थियों की वापसी के लिए समुचित प्रयास नहीं'

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैंडी ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों व साझेदार ग़ैर-सरकारी संगठनों ने रोहिंज्या मानवीय संकट से निपटने के प्रयासों के तहत वर्ष ‘2020 साझा कार्रवाई योजना’ (2020 ज्वाइंट रिस्पॉन्स प्लान) पेश किया है. इस अपील में 87 करोड़ डॉलर की रक़म जुटाने का लक्ष्य रखा गया है ताकि म्यांमार से आए आठ लाख 55 हज़ार से ज़्यादा रोहिंज्या शरणार्थियों और उन्हें शरण दे रहे बांग्लादेश में चार लाख स्थानीय लोगों की ज़रूरतें भी पूरी की जा सकें.

म्याँमार: रोहिंज्या व लोकतांत्रिक बदलावों के लिए उम्मीद बची है

संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ यैंगही ली ने कहा है कि म्याँमार को अलबत्ता संभवतः जनसंहार के अपराधों सहित अंतरराष्ट्रीय अपराधों के “गंभीर आरोपों” का समाधान निकालना है, फिर भी उन्होंने देश में लोकतांत्रिक परिवर्तन के लिए अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है. इन आरोपों में संभावित जनसंहार के आरोप भी शामिल हैं.  

म्याँमार: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की अपील

म्याँमार में संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत यंगी ली ने कहा है कि रोहिंज्या लोगों पर अत्याचारों के आरोप में हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में नवंबर में गांबिया द्वारा दाख़िल किए गए क़ानूनी मुक़दमे के बाद से ही मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ ऑनलाइन मंचों पर विद्वेष यानी शत्रुता का माहौल बढ़ गया है. यंगी ली ने म्याँमार सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों से सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कार्रवाई करने का आग्रह किया है.

 

रोहिंज्या के ख़िलाफ़ अपराधों की जाँच के लिए आईसीसी की हरी झंडी

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय आईसीसी ने रोहिंज्या समुदाय के लोगों के मामले में कथित तौर पर मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों की जाँच के लिए हरी झंडी दे दी है. इनमें मुख्य रूप से रोहिंज्या लोगों के विस्थापन का मामला है जिसकी वजह से 2016 से अब तक म्याँमार से लाखों रोहिंज्या लोग सुरक्षा की तलाश में पड़ोसी देश बांग्लादेश पहुँचे चुके हैं जो वहाँ शरणार्थी हैं. रोहिंज्या शरणार्थियों की संख्या छह से 10 लाख के बीच बताई जाती है.

गांबिया का रोहिंग्या मामले में म्याँमार पर जनसंहार का मुक़दमा

गांबिया ने म्याँमार पर जैनोसाइड कन्वेंशन यानी जनसंहार कन्वेंशन के प्रावधानों के तहत अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मुक़दमा दर्ज किया है. गांबिया का आरोप है कि म्याँमार ने रोहिंग्या समुदाय के लोगों के ख़िलाफ़ इस तरह की कार्रवाई की है और अन्य कार्रवाइयों को समर्थन भी दिया है जो जैनोसाइड कन्वेंशन का उल्लंघन हैं. 

म्याँमार में सेना द्वारा बंधक बनाए गए लोगों के उत्पीड़न पर चिंता

म्याँमार की सेना द्वारा एक बंदी शिविर में रखे गए राखीन प्रांत के लोगों के उत्पीड़न और फिर उनकी मौत के आरोपों के बाद संयुक्त राष्ट्र के तीन स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने ये उत्पीड़न तुरंत रोके जाने का आहवान किया है. इन विशेषज्ञों ने साथ ही इन आरापों की 'निष्पक्ष व भरोसेमंद' जाँच कराने का भी आहवान किया है.

म्यांमार की सेना पर सुनियोजित ढंग से यौन हिंसा और प्रताड़ना के आरोप

संयुक्त राष्ट्र के ‘इंडिपेंडेंट इंटरनेशनल फ़ैक्ट-फ़ाइंडिंग मिशन’ ने कहा है कि म्यांमार की सेना ने देश के जातीय अल्पसंख्यकों को आतंकित और दंडित करने के लिए यौन और लिंग आधारित हिंसा का सहारा लिया है जिसे रोका जाना होगा. अपनी नई रिपोर्ट में मिशन ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2017 में राखीन प्रांत में हिंसा का क्रूर स्वरूप दर्शाता है कि सेना की मंशा रोहिंज्या समुदाय को बर्बाद करने की थी.