रोहिंज्या

राहत का अभाव 'घातक' साबित हुआ - समुद्र में फँसे अनेक रोहिंज्या शरणार्थियों की मौत

अंडमान सागर में छह महीने से ज़्यादा समय तक फँसे रहने के बाद तीस से ज़्यादा रोहिंज्या शरणार्थियों की मौत होने की आशंका जताई गई है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने कहा है मुश्किल हालात से जूझ रहे लोगों को शरण देने के लिये देशों की सामूहिक अनिच्छा के परिणामस्वरूप यह घटना हुई है. 

यूएन रेडियो हिन्दी बुलेटिन 28 अगस्त 2020

28 अगस्त 2020 के इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...
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स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत निभा सकता है अहम भूमिका, महासचिव का जीवाश्म ईंधन के बजाय स्वच्छ ऊर्जा में निवेश का आहवान.

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म्याँमार: आगामी चुनाव समावेशी व लोकतान्त्रिक रास्ता अपनाने का एक अवसर

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने कहा है कि म्याँमार की सरकार को नवम्बर में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों को एक ऐसे अवसर के रूप में इस्तेमाल करना चाहिये जिससे एक पूर्ण समावेशी लोकतान्त्रिक मार्ग प्रशस्त हो, और जातीय अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे तकलीफ़देह बर्ताव और उनके मानवाधिकार उल्लंघन के मूलभूत कारणों का हल निकाला जा सके.

रोहिंज्या शरणार्थी संकट के मूलभूत कारणों का हल निकालना होगा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रोहिंज्या शरणार्थी संकट की तरफ़ ज़्यादा ध्यान दिये जाने का आहवान करते हुए कहा है कि इस संकट की जड़ में बैठे कारणों का हल निकाले की ज़रूरत है. ध्यान रहे कि रोहिंज्या शरणार्थी संकट अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है. 

रोहिंज्या शरणार्थी, 3 साल बाद, पहले से कहीं ज़्यादा असहाय

संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों का कहना है कि तीन साल पहले म्याँमार में रहने वाले रोहिंज्या लोगों को उनके घरों से बाहर निकाल दिया गया था जिसके बाद उन्हें सीमा पार बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी थी. रोहिंज्या शरणार्थी संकट के तीन वर्ष गुज़र जाने के बाद भी बेघर रोहिंज्या महिलाएँ, पुरुष और बच्चे पहले से कहीं ज़्यादा असहाय हालात में हैं.

रोहिंज्या संकट का स्थायी समाधान ढूँढने की आवश्यकता पर बल

शरणार्थी मामलों की संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNHCR) ने विस्थापित और राष्ट्रविहीन रोहिंज्या समुदाय के लिये अपील जारी करते हुए कहा है कि म्याँमार और अन्य देशों में रह रहे रोहिंज्या समुदाय के लोगों की पीड़ाओं को ना भुलाकर उनकी मुश्किलों का स्थायी हल निकाला जाना होगा. तीन वर्ष पहले अगस्त 2017 में म्याँमार में दमनकारी सैन्य अभियान शुरू होने के बाद लाखों रोहिंज्या शरणार्थियों ने बांग्लादेश में शरण ली थी. लेकिन उनके समक्ष आज भी चुनौतियाँ हैं जिन्हें कोविड-19 महामारी ने और भी गम्भीर बना दिया है.

कोविड-19: रोहिंज्या बच्चों की पढ़ाई-लिखाई जारी रखने के प्रयास

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के फैलाव को रोकने के लिए दुनिया भर में स्कूलों को बन्द किया गया है. बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में रोहिंज्या शरणार्थी शिविरों में रह रहे शेफ़ुका जैसे बहुत से छात्र इस नई वास्तविकता में ख़ुद को ढालने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन बिना बिजली आपूर्ति के शरणार्थी कैम्प में रह कर पढ़ना अन्य किसी स्थान की तुलना में कहीं ज़्यादा चुनौतीपूर्ण है. 

कोविड-19: रोहिंज्या शरणार्थी शिविरों में घनी आबादी है चिन्ता का सबब

बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में घनी आबादी वाले रोहिंज्या शरणार्थी शिविरों में कोरोवनावायरस संक्रमण के फैलाव के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर चार हो गई है जिससे चिन्ताएँ बढ़ गई हैं. यूएन एजेंसियों ने आठ लाख 60 हज़ार से ज़्यादा रोहिंज्या शरणार्थियों को पनाह देने वाले इन शिविरों में कोविड-19 से बचाव के लिए स्वास्थ्य तैयारियाँ और बचाव उपाय तेज़ कर दिए हैं. 

बांग्लादेश में रोहिंज्या शरणार्थी शिविर में कोरोनावायरस की दस्तक

बांग्लादेश में रोहिंज्या शरणार्थी शिविरों वाले इलाक़ों में वैश्विक महामारी कोविड-19 के मामले की पुष्टि होने के बाद संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसियों ने राहत और ऐहतियात के लिए अतिरिक्त उपायों की घोषणा की है. साथ ही बीमारी के व्यापक फैलाव को रोकने के लिए 32 करोड़ डॉलर की धनराशि की अपील की है. 

रोहिंज्या शिविरों में ऐहतियाती तैयारियाँ

म्याँमार में 2017 में भड़की हिंसा व सुरक्षा बलों के दमन से बचकर भागे लगभग साढ़े सात लाख रोहिंज्या शरणार्थी बांग्लादेश में शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं. वहाँ पहले से लाखों अन्य रोहिंज्या शरणार्थी भी रहे हैं जिन्हें मिलाकर ये विशालतम शरणार्थी बस्ती बन गई है. यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने इस भीड़ भरी बस्ती में कोविड-19 महामारी के फैलने की आशंका के बीच यूएन ख़ास तैयारियाँ की हैं. देखें वीडियो फ़ीचर...